
अदबी तंज़ीम फख़्र ए हिंदुस्तान के ज़ेरे एहतिमाम ओपन माइक मुशायरा व कवि सम्मेलन का इनइक़ाद सीज़ार स्पोर्ट क्लब आलमबाग़, लखनऊ में हुआ।
जिस की सदारत उरई जालौन के मशहूर ओ मारूफ़ शायर जनाब फरीद अली बशर साहब ने की और मेहमाने ऐजाजी भी रहे | फरीद अली बशर साहब को फख्र हिंदुस्तान अवॉर्ड से नवाजा गया निज़ामत के फ़राएज़ अर्चना सिंह ने अदा किए। मेहमान ए ख़ुसूसी की हैसियत से ख़ूबसूरत लबो लहजे के शायर जनाब परवेज अख्तर साहब ने शिरकत की ।
सदर ए मुशायरा फरीद अली बशर साहब ने अपने सदारती ख़िताब में कहा कि नई नस्ल का उर्दू अदब की तरफ़ रुझान उर्दू के मुस्तक़बिल के लिए फ़ेल ए नेक है, लिहाज़ा नौजवान उर्दू सीखने पर तवज्जा दें तो उनके मुस्तक़बिल के लिए बेहतर होगा।
पसंद किए जाने वाले अशआर क़ारईन की नज़र हैं।
कश्ती को मुस्कुरा के वहीं पर डुबो दिया।
उसने कहा था इश्क का अंजाम चाहिए।
फरीद अली बशर
वक्त के साथ बदलते रहे उनवान सभी
नाम अब भी है मोहब्बत का मोहब्बत लेकिन
परवेज अख्तर
लोग दुनिया से हार जाते है
हम अभी एक ही से हरे थे
आरीफ अल्वी
होगी खुशहाल तुम्हारी मगर ये अपनी तो
ज़िंदगी बोझ है और सर पे उठा रक्खी है
अली मुनफरिद
तमन्ना एक बाक़ी है फ़क़त दिल की मेरे अब तो
किसी नाज़ुक से लब की “रूह” मैं फ़रियाद हो जाऊँ
रेहान रूह
दुनिया है क़ैदख़ाना मगर फिर भी जाने क्यूँ
अपने खुदा से इसके लिए दूर हो गये
सैयद राशिद हमीद
सियासत खेलते है मस्जिदों मंदिर पे जो असीम
हमारे देश की कुर्सी पे वो गद्दार बायेठे हैं
आसिम शफ़ीक़ बिसवानी
इम्तेहां लेती है किस दर्जा मुहब्बत आफी
ये नई नस्ल का फ़रहाद नहीं समझेगा
अफरीन फहीम
इनके अलावा देशराज देसाई, अशोक कुमार , स्मृति मिश्र , एम आर प्यूश , फिरोज खान , राजिया अंसारी , हुमा अंसारी, मदीहा शैख, हारून रशीद , नीरज सिंह , विशू दीप दुबे , अर्सलान बेग ,प्रखर कपूर, रहबेर , वीरेंद्र तिवारी , अजनली राय , शमशाद अहमद , वग़ैरा ने भी कलाम पेश किए।
आख़िर में कनवीनर मुशायरा आरिफ़ अल्वी ने कलमात ए शुक्र अदा किए।



