
बाराबंकी की फतेहपुर तहसील में अधिकारियों के लिए मुख्यमंत्री का जनसुनवाई आदेश कोई मायने नहीं रखता
👉🏻तहसील फतेहपुर में किसान मजदूर की भीषण गर्मी बढ़ते तापमान में पसीने से नहाया हुआ गरीब बेसहारा मजलूम किसान जरूरत मंदो की सुनने वाला कोई नही
तेजस भारत समाचार
अखिलेश श्रीवास्तव
लखनऊ/ फतेहपुर। पैतालीस डिग्री तापमान उमस भरी भीषण गर्मी में फतेहपुर का किसान जनता फरियादी वातानुकूलित कमरों में बैठने वाले अधिकारी कर घंटो उनके कार्यालय के सामने बने बरामदे की फर्श पर मिलने का इंतजार करता है लेकिन
रल्लपल्ली जगत साई आईएएस उप जिला अधिकारी फतेहपुर, बाराबंकी का दिल नहीं पसीजता है की इस आग उगलती गर्मी में दूर दराज से आए फरियादियों से मिलकर उनकी समस्या सुनकर राहत दे सके।तेज धूप आसमान छूता पारा में किसान मजदूर के शरीर से निकलते पसीने से नहाया हुआ गरीब बेसहारा मजलूम किसान जरूरत मंद की सुनने वाला तहसील फतेहपुर में कोई नही है।यहां पर तैनात अधिकारी अपने वातानुकूलित कमरे में न तो फरियादियो को बुलाकर सुनना पसंद करते है और न ही बाहर निकल कर समस्या सुनने का प्रयास करते है।यहां की यही रवैया के चलते अधिवक्ता सहित हर वर्ग के लोग परेशान है न्यायिक कार्य से अधिवक्ता ने कार्य नही करने का निर्णय लिया है।
बाराबंकी जिले की तहसील फतेहपुर में शासन की मंशा मुख्यमंत्री का आदेश किसी रद्दी की टोकरी से कम नहीं है।मुख्यमंत्री ने सभी तहसील थानों सहित सभी विभागों में सुबह दस से बारह बजे तक जनता की समस्या सुनने के निर्देश दिए है लेकिन मुख्यमंत्री का आदेश तहसील फतेहपुर अधिकारियों के लिए कोई मायने नहीं रखता है।यहां तहसील में अधिकारियों के आने जाने का कोई समय नहीं है जब मन में आया आए जब मन में आया चले गए।जन सुनवाई भगवान भरोसे हो रही है शायद यही कारण है कि यहां की जनता काफी नाराज है और नाराजगी इस चुनाव में देखी भी गई है।इस तहसील में उप जिला अधिकारी आईएएस अधिकारी रल्लपल्ली जगत साई जल्दी जनता से नही मिलने की आम जन मानस की शिकायत है घंटो इंतजार करवाने के बाद मीटिंग का बहना कर आखिर मिलने से मना ही कर देते है।शासन का आदेश है की सभी विभागों में दिव्यांग जनों के आने जाने में कोई परेशानी नहीं हो सीढ़ी पर रैंप बनवाया जाए लेकिन वहां अधिकारी अपनी सुख सुविधा के लिए तहसील कार्यालय में पार्क सीमेंट मोरंग गिट्टी के हट बनवाए जा रहे है लेकिन दिव्यांग जनों के लिए रैंप निर्माण नही करवाया गया।दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने आई एक पांच साल की बच्ची किसी तरह सीढ़ी पर घिसट कर जाने का प्रयास कर रही तब तक एक फरियादी ने उसकी मदद कर कुर्सी पर बैठाया उसने बताया कि कोई मिलता नही है कई बार आकार वापस लौटना पड़ता है रिपोर्ट लगवाने के लिए।इसी तरह उप जिला अधिकारी के कक्ष के सामने कई फरियादी मिलने के लिए घंटो से इंकार कर रहे थे उन्हें बताया गया की मीटिंग में है साहब अभी नहीं मिल सकते है।यही कमोवेस पूरे तहसील का आलम है।फरियादी अपनी फरियाद लेकर भीषण गर्मी में फतेहपुर तहसील का चक्कर लगा रहा है। ट्रेनिग समय आईएएस अधिकारी का ये आलम है तो आगे तो जिलाधिकारी, आयुक्त, सचिव,प्रमुख सचिव,अपर मुख्य सचिव तक का सफर तय करना है।ईश्वर ने आईएएस बनकर जन सेवा करने का अवसर दिया है अपनी छाप व्यवहार जनता के दिल में एक अलग पहचान बनाना चाहिए। एसे अधिकारियों को अपने की जिले के जिलाधिकारी सतेंद्र कुमार से सीख लेनी चाहिए कम समय में जहां भी रहे जनता के दिल दिमाग में बस गए हटने के बाद भी आज लोग याद करते है।जिलाधिकारी का स्वभाव सौम्य सरल सभी की सुनना समाधान करना आज भी उनकी पहली प्राथमिकता है जिलाधिकारी बाराबंकी सतेंद्र कुमार का ट्रेनिंग से लेकर आज तक जनता किसान मजदूर बेसहारा लोगों की तत्काल मदद करना ही उन्हें लोकप्रिय बनाए हुए है।युवाओं में एक आदर्श अधिकारी के रूप में जाने जाते है।राह चलते पीड़ित की समस्या सुन वही निस्तारण करवाने में कोई ताल मटोल नही करते।प्रदेश में युवा अधिकारियों में सतेंद्र कुमार का नाम प्रेरणा स्रोत से कम नहीं है।



