
रामेश्वर महादेव की पौराणिक कथा
त्रेतायुग में रावण वध के बाद जब भगवान राम ने पंचक्रोशी यात्रा आरंभ की, तो उन्होंने काशी के इस क्षेत्र में रात्रि विश्राम किया। अगले दिन पूजा के लिए शिवलिंग की आवश्यकता थी। श्रीराम ने हनुमान जी को लिंग लाने का आदेश दिया, लेकिन शुभ मुहूर्त न निकल जाए, इस चिंता में उन्होंने वरुणा नदी की एक मुट्ठी रेत से शिवलिंग का निर्माण कर विधिपूर्वक उसकी स्थापना की। यही स्वरूप आगे चलकर रामेश्वर महादेव के रूप में विख्यात हुआ।
आस्था और लोकश्रुति
यह मंदिर सिर्फ पूजा-अर्चना का स्थान नहीं, बल्कि आस्था का प्रतीक है। सावन और पंचक्रोशी यात्रा के दौरान यहाँ श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। लोककथाओं के अनुसार, यहाँ दर्शन करने से पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।
इतिहास और विवाद
हालांकि, इतिहासकार मानते हैं कि प्राचीन काशी खंड में इस कथा का प्रत्यक्ष उल्लेख नहीं मिलता। विद्वानों का कहना है कि समय के साथ मौखिक परंपराएँ और लोकश्रुतियाँ इस कथा से जुड़ गईं, जिसने इसे और लोकप्रिय बना दिया।
वर्तमान में महत्व
आज रामेश्वर महादेव मंदिर काशी की धार्मिक पहचान का अहम हिस्सा है। यह मंदिर न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देता है बल्कि काशी की सांस्कृतिक धरोहर का भी प्रतीक है। यहाँ प्रतिवर्ष होने वाले आयोजन, मेले और सावन का उत्सव, इस स्थान को और अधिक जीवंत बना देते हैं।



