152 वोटों से दर्ज की जीत, एनडीए की राजनीतिक पकड़ और मजबूत
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के प्रत्याशी और महाराष्ट्र के राज्यपाल सी. पी. राधाकृष्णन ने मंगलवार को भारत के नए उपराष्ट्रपति पद का चुनाव जीत लिया। उन्होंने विपक्षी गठबंधन आई.एन.डी.आई. के उम्मीदवार एवं सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी को 152 वोटों से पराजित किया।
राज्यसभा महासचिव और चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर पी. सी. मोदी ने बताया कि कुल 781 सांसदों में से 767 सांसदों ने मतदान किया। इनमें से 752 मत वैध पाए गए, जबकि 15 मत अमान्य घोषित किए गए। राधाकृष्णन को 452 वोट और रेड्डी को 300 वोट मिले।
राजनीतिक महत्व
यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया था। ऐसे में सत्ता पक्ष के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा की कसौटी माना जा रहा था। एनडीए ने भारी बहुमत के साथ जीत दर्ज कर यह संदेश दिया कि संसद में उसकी पकड़ बरकरार है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस जीत से न केवल एनडीए को राज्यसभा में और मजबूती मिलेगी, बल्कि विपक्ष की रणनीति पर भी सवाल उठेंगे। चूंकि उपराष्ट्रपति राज्यसभा के सभापति भी होते हैं, ऐसे में राधाकृष्णन का कार्यकाल सदन की कार्यवाही और सत्तापक्ष–विपक्ष के बीच संवाद की दिशा तय करने में अहम होगा।
राधाकृष्णन का राजनीतिक सफर
सी. पी. राधाकृष्णन का राजनीतिक करियर लंबा और विविध रहा है। वे भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता रहे हैं और संगठन के साथ-साथ प्रशासनिक जिम्मेदारियों का भी अनुभव रखते हैं। महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में उनकी सादगी और प्रशासनिक दक्षता की चर्चा रही। अब उपराष्ट्रपति बनने के बाद उनके सामने संसदीय परंपराओं को मजबूत करने और सदन को सुचारू रूप से चलाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।
आगामी चुनौतियाँ
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक सदन के पटल पर लाने वाली है। ऐसे में उपराष्ट्रपति के रूप में राधाकृष्णन का संतुलित और दृढ़ नेतृत्व संसद की गरिमा बनाए रखने में महत्वपूर्ण होगी ।




