
**ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ**
**16वाँ स्थापना दिवस समारोह**
**लखनऊ, 01 अक्टूबर 2025।**
ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ ने आज अपने गौरवपूर्ण **16वें स्थापना दिवस** के अवसर पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं मातृ सम्मेलन का भव्य समारोह का आयोजन किया। विश्वविद्यालय परिवार के लिए यह अवसर न केवल स्मृतियों को ताज़ा करने का था, बल्कि भविष्य के सपनों और लक्ष्यों को साकार करने का संकल्प लेने का भी था।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः **11 बजे अटल सभागार** में हुआ, जहाँ मुख्य अतिथि पूर्व कुलपति प्रो अनिल कुमार शुक्ल, विशिष्ट अतिथि मालिनी चंद्रा, अंतरराष्ट्रीय डेटा साइंटिस्ट, डॉ मंजू सिंह, एस एल ओ, हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट एवं श्री पंकज शर्मा, सेफ्टी एक्सपर्ट के साथ विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति **प्रो. अजय तनेजा** ने दीप प्रज्ज्वलन कर समारोह का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में स्थापना दिवस के अवसर पर नारी सशक्तिकरण: सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन की दिशा में कदम विषय पर अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन भी आयोजन अटल सभागार में किया गया। इसके उपरांत उपस्थित अतिथियों को स्वागत पौधा और स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। समारोह की विधिवत शुरुआत में विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा बनाई गई विश्वविद्यालय की विकास गाथा को उद्घाटित करती डॉक्यूमेंट्री फिल्म के माध्यम से दिखाया गया।
कार्यक्रम के इस अवसर पर स्वागत अभिनंदन और संयोजन डॉ नलिनी मिश्रा ने किया। स्थापना दिवस के अवसर पर मुख्य अतिथि राष्ट्रीय सेवा योजना की विशेष कार्याधिकारी डॉ मंजू सिंह ने इस सुअवसर पर कहा कि मिशन शक्ति कार्यक्रम के माध्यम से सरकार के साथ विद्यार्थी के सहयोग से विकसित भारत का निर्माण संभव है। आपने कहा कि प्रत्येक महिला सृजन करते हुए परिवार को आगे बढ़ाती है। ठीक इसी तरह मिशन शक्ति कार्यक्रम के माध्यम से जन जागरूकता का कार्य हो रहा है।
कार्यक्रम की विशेष अतिथि डेटा वैज्ञानिक श्रीमती मालिनी चंद्रा ने विद्यार्थियों से कहा कि हम सभी विद्यार्थियों को अपनी ऊर्जा को राष्ट्र के निर्माण में लगाना चाहिए।
स्थापना दिवस पर विश्वविद्यालय को संबोधित करते हुए सड़क सुरक्षा अधिकारी पंकज शर्मा ने विद्यार्थियों को बताया कि व्यक्ति का व्यवहार ही उसकी पहचान होती है। शर्मा ने कहा कि नारी के सम्मान से ही समाज में परिवर्तन संभव है। साथ ही उन्होंने सभागार में उपस्थित विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को सड़क सुरक्षा के नियमों एवं कानूनों की विस्तार से जानकारी दी ।
इस अवसर पर आयोजित **स्थापना दिवस व्याख्यान** में मुख्य वक्ता भाषा विवि के पूर्व कुलपति **प्रो. अनिल शुक्ल** ने भाषाई समृद्धि को राष्ट्र की शक्ति बताते हुए कहा कि भाषा शिक्षा से ही नवाचार और सामाजिक परिवर्तन संभव है। विश्वविद्यालय की स्थापना नींव से नियत की यात्रा होती है। प्रो शुक्ल ने कहा कि नारी के सशक्तिकरण के लिए सहयोगी, सहभागिता और सम्मान के माध्यम से ही संभव है।
इस अवसर पर बोलते हुए अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में भाषा विवि के कुलपति प्रो तनेजा ने विश्वविद्यालय को संबोधित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ने अल्प समय में शिक्षण, अनुसंधान और सांस्कृतिक उत्थान के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय भाषाई विविधता और सांस्कृतिक संवाद को नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रो तनेजा ने क्वॉलिटी ऑफ एजुकेशन की महत्ता पर जोर देकर कहा कि गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा के माध्यम से ही विकास संभव है। तनेजा ने विश्वविद्यालय के विजन को परिभाषित करते हुए सभी को आत्मसात करने का आव्हान किया। प्रो तनेजा ने भाषा विज्ञान, हिन्दू अध्ययन के विभाग सहित नए पाठ्यक्रमों और नए एमओयू की भी घोषणा की।
16वें स्थापना दिवस समारोह में प्रथम बार नॉन टीचिंग एम्प्लॉयीज को भी सम्मानित किया गया। जिसके अंतर्गत पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं को एक शॉल, मोमेंटों, प्रशस्ति पत्र एवं ११०० रू० पारितोष के रूप में सम्मानित किया गया। अपने उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित होने वालों में श्री शाहिद, श्री विनीत शुक्ला, श्री रामस्वरूप, श्री जमना प्रसाद, श्री राजधर मिश्रा रहे ।
स्थापना समारोह के अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अंतर्गत विद्यार्थियों ने गीत, नृत्य और नाट्य प्रस्तुतियाँ दीं, जिन्होंने सभागार में उत्सव का वातावरण बना दिया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के द्वारा विजयी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन भाषा विवि के कुलसचिव डॉ महेश कुमार ने किया। जबकि संचालन डॉ नीरज शुक्ल ने किया। स्थापना समारोह में भाषा विवि की प्रथम महिला मोनिका तनेजा, डीन अकादमिक प्रो सौबान सईद, प्रो हैदर अली, प्रो चन्दना डे सहित सभी गणमान्य अतिथियों, विद्वानों, मीडिया प्रतिनिधियों, प्राध्यापकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को गरिमामय बना दिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।



