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“नत, हिमालय की कभी चोटी न होगी,राष्ट्र से बढ़कर मगर रोटी न होगी।”

कठपुतली सा ये जीवन है, जीते जाओ सोचो मत।

“नत, हिमालय की कभी चोटी न होगी,राष्ट्र से बढ़कर मगर रोटी न होगी।”तेजस भारत समाचार लखनऊ। साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था “काव्य सरिता” के तत्वावधान में एचएएल, अयोध्या मार्ग स्थित ‘वेलफेयर सेंटर’ के सभागार में मासिक काव्य गोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री दिनेश कुमार शुक्ल जी ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ कवि श्री दीनानाथ मिश्र “किंकर” जी उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री कमल किशोर ‘भावुक’ और श्री योगेश सिंह चौहान ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। संचालन संस्था अध्यक्ष श्री कैलाश प्रकाश त्रिपाठी “पुंज” द्वारा किया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ इं. राजीव वर्मा ‘वत्सल’ की वाणी वंदना से हुआ। इसके पश्चात कवि कुमार शैलेन्द्र वशिष्ठ ने “ऑपरेशन कालनेमि” पर आधारित पंक्तियाँ सुनाकर वातावरण को ऊर्जावान बनाया —“अपने लक्ष्य तक पहुँच न पायें पवन पुत्र हनुमान,पता नहीं करेगा रावण कितने कालनेमि संधान।”युवा कवि प्रदीप विश्वकर्मा ने प्रेम की कोमल भावनाओं को इन शब्दों में व्यक्त किया —“सपनों में थी चाँद सी, देती दिल को ठंड,अब तो घर में चाँदनी, गर्मी करे प्रचंड।”भोजपुरी कवि एवं पर्यावरणविद कृष्णानन्द राय ने सड़क सुरक्षा पर जन-जागरूकता बढ़ाने हेतु दोहा प्रस्तुत किया —“गति धीमी कर लीजिए जहाँ कहीं हो मोड़,सड़क सुरक्षा भाग्य पर नहीं दीजिए छोड़।”बृजेश यादव ने करवा चौथ पर आधारित अपनी रचना से सराहना बटोरी, जबकि छंदकार जितेंद्र मिश्र “भास्वर” ने माता-पिता के स्नेह और आशाओं को अपनी पंक्तियों में सुंदर रूप में पिरोया।बाराबंकी से आए कवि संजय साँवरा ने अपनी गहरी भावनाओं को यूँ व्यक्त किया —“जाने नेकी से या फिर बदी से रहे,आजकल से नहीं इक सदी से रहे।”श्री चन्द्र किशोर प्रसाद “चन्द्र” ने सामाजिक संदेश देते हुए कहा —“अपने मन के रावण को जब काल का ग्रास बनाओगे,तब सच्चे अर्थों में तुम भी पुरुषोत्तम बन जाओगे।”इं. राजीव वर्मा “वत्सल” ने हिन्दी भाषा की शुद्धता पर जोर देते हुए कहा —“नमस्कार को ‘नमश्कार’ उच्चारण करते,ऐसे हिन्दी को कैसे सम्मान मिलेगा?”वरिष्ठ गीतकार सर्वेश मिश्र “सरल” ने प्रेमाभिव्यक्ति पर भावपूर्ण गीत सुनाया —“जितना भी तय करो बढ़ जाता है,रास्ता जो तेरे दिल तक जाता है।”संचालक कैलाश प्रकाश त्रिपाठी “पुंज” ने भ्रष्टाचार पर व्यंग्य करते हुए कहा —“‘पुंज’ प्रश्न पत्र प्रथम पास किया है,फिर भी न मिली नौकरी का समाचार है,अपना न काम करना महा भ्रष्टाचार है।”विशिष्ट अतिथि योगेश सिंह चौहान ने कर्म और परिणाम पर सारगर्भित विचार व्यक्त किए, वहीं कमल किशोर “भावुक” ने अपनी प्रसिद्ध पंक्तियों से सभी का दिल जीत लिया —“बात कड़वी हो भले खोटी न होगी,नत हिमालय की कभी चोटी न होगी,भूख माना जिंदगी का सत्य कड़वा,राष्ट्र से बढ़कर मगर रोटी न होगी।”मुख्य अतिथि श्री दीनानाथ मिश्र “किंकर” की प्रेरणादायक पंक्तियों ने सभा को भावविभोर कर दिया —“डूबते का सहारा बनो, आईना तुम हमारा बनो,धर्म को मानते हो अगर, दूसरों का सहारा बनो।”अंत में अध्यक्षीय कविता के रूप में श्री दिनेश कुमार शुक्ल जी ने अपनी पंक्तियों से जीवन दर्शन प्रस्तुत किया —“कठपुतली सा ये जीवन है, जीते जाओ सोचो मत।”वरिष्ठ कवि विनायक कृष्ण कौशिक “मच्छर” और श्री रामकृष्ण वाजपेयी जी ने हास्य-व्यंग्य से गोष्ठी में नई ऊर्जा भर दी।कार्यक्रम के समापन पर संस्था अध्यक्ष एवं संचालक श्री कैलाश प्रकाश त्रिपाठी “पुंज” ने सभी अतिथियों, कवियों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया तथा अगली मासिक गोष्ठी की घोषणा के साथ कार्यक्रम का समापन किया।प्रस्तुति:चन्द्र किशोर प्रसाद “चन्द्र”

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