बलरामपुर। देवी उपासना की परंपरा में अपना विशेष स्थान रखने वाला मां पाटन देवी मंदिर न केवल बलरामपुर बल्कि पूरे पूर्वांचल की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मान्यता है कि मां पाटन देवी की आराधना से भक्तों के सभी संकट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।
यह प्राचीन मंदिर नवरात्र के दिनों में आस्था का अद्वितीय संगम बन जाता है। यहाँ पर दूर-दराज़ से श्रद्धालु यहां पहुंचकर मां के दर्शन करते हैं और विशेष अनुष्ठानों में शामिल होते हैं। मंदिर परिसर में गूंजते जयकारे और आरती की गूंज वातावरण को दिव्य और भक्ति-रस से परिपूर्ण कर देती है।
स्थानीय परंपरा के अनुसार, मां पाटन देवी की पूजा न केवल धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि सांस्कृतिक पहचान का भी हिस्सा है। बलरामपुर की सामाजिक और आध्यात्मिक जीवनधारा में इस मंदिर का विशेष महत्व माना जाता है।
जिला प्रशासन और मंदिर समिति हर वर्ष नवरात्र में आने वाले भारी जनसमूह को देखते हुए विशेष इंतज़ाम करती है। दर्शन की व्यवस्था से लेकर सुरक्षा और स्वच्छता तक, हर स्तर पर प्रयास किया जाता है कि श्रद्धालु बिना किसी कठिनाई के मां पाटन देवी की कृपा का लाभ उठा सकें।
आज यह मंदिर बलरामपुर की आस्था और संस्कृति का प्रतीक बन चुका है, जो श्रद्धालुओं को आकर्षित करने के साथ-साथ धार्मिक पर्यटन को भी नई दिशा दे रहा है।



