नवरात्रि का महापर्व शुरू हो चुका है और इस पावन अवसर पर आज पहले दिन, प्रकृति और आस्था का मिलन माँ शैलपुत्री के रूप में हो रहा है। शैलपुत्री यानी ‘पहाड़ों की पुत्री’, जो हिमालय की बेटी और सती के पुनर्जन्म के रूप में पूजी जाती हैं। उनका स्वरूप अलौकिक है— उनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में कमल सुशोभित है, जो शक्ति और सौंदर्य का प्रतीक है। वे नंदी नामक बैल पर सवार हैं, जो धर्म और शांति का संदेश देता है।

माँ शैलपुत्री की पूजा से जीवन में स्थिरता, दृढ़ता और धैर्य आता है। वे उन सभी भक्तों को आशीर्वाद देती हैं जो अपने लक्ष्य की ओर निष्ठापूर्वक बढ़ते हैं। उनकी आराधना से मन में शांति और जीवन में सफलता आती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, माँ शैलपुत्री की पूजा करने से व्यक्ति अपने पूर्व जन्मों के पापों से मुक्ति पा सकता है और जीवन में नई शुरुआत कर सकता है।
इस नवरात्रि के प्रथम दिन, भक्तजन माँ शैलपुत्री के दरबार में श्रद्धापूर्वक माथा टेक रहे हैं। हर तरफ भजन, कीर्तन और माँ के जयकारों की गूंज सुनाई दे रही है। मंदिरों को फूलों और रोशनी से सजाया गया है। भक्तों के चेहरे पर एक असीम शांति और भक्ति का भाव है।
माँ शैलपुत्री की पूजा सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ हमारे गहरे संबंध का प्रतीक भी है। वे हमें सिखाती हैं कि जीवन में कठिनाइयों के बावजूद, हमें अडिग रहना चाहिए, ठीक वैसे ही जैसे हिमालय अपनी जगह पर अटल है।
इस नवरात्रि, आइए हम सब मिलकर माँ शैलपुत्री से प्रार्थना करें कि वे हमें शक्ति, साहस और धैर्य प्रदान करें ताकि हम जीवन की हर चुनौती का सामना कर सकें।
जय माँ शैलपुत्री!



