क्रूड ऑयल के उबाल से सहमा दलाल स्ट्रीट: सेंसेक्स  क्रैश, महज 5 सेकंड में निवेशकों के डूबे लाख करोड़

क्रूड ऑयल के उबाल से सहमा दलाल स्ट्रीट: सेंसेक्स क्रैश, महज 5 सेकंड में निवेशकों के डूबे लाख करोड़

सप्ताह के एक बेहद संवेदनशील कारोबारी सत्र के दौरान भारतीय शेयर बाजार में उस समय हड़कंप मच गया जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतों में अचानक जोरदार उबाल देखने को मिला। पश्चिम एशिया में गहराते भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन को लेकर पैदा हुई अनिश्चितताओं के कारण ब्रेंट क्रूड के दाम तेजी से ऊपर भागे, जिसका सीधा और मनोवैज्ञानिक असर घरेलू दलाल स्ट्रीट पर बहुत ही नकारात्मक रूप से पड़ा। भारत अपनी कुल ऊर्जा और तेल जरूरतों का एक बहुत बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में कच्चे तेल के दाम बढ़ने से देश के राजकोषीय घाटे, आयात बिल और घरेलू महंगाई के बेकाबू होने का खतरा तुरंत बढ़ जाता है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने इस जोखिम को भांपते हुए भारतीय बाजारों से बड़ी मात्रा में पूंजी निकालनी शुरू कर दी, जिससे देखते ही देखते शेयर बाजार में बिकवाली का ऐसा दबाव बना कि प्रमुख सूचकांक धड़ाम से नीचे आ गिरे और निवेशकों की गाढ़ी कमाई कुछ ही पलों में हवा हो गई।

महज 5 सेकंड के भीतर निवेशकों की संपत्ति से जुड़े ₹5 लाख करोड़ साफ

शेयर बाजार की इस अचानक और तीव्र गिरावट की गति इतनी डरावनी थी कि शायद ही किसी खुदरा निवेशक को संभालने का मौका मिला हो। बाजार खुलते ही या कारोबार के एक खास चरण में बिकवाली का ऐसा सैलाब आया कि महज 5 सेकंड के भीतर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइज़ेशन लगभग 5 लाख करोड़ रुपये तक घट गया। इस भयानक पांच सेकंड के पैनिक ने साबित कर दिया कि आधुनिक एल्गोरिथम ट्रेडिंग और हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग (HFT) के इस दौर में ग्लोबल कमोडिटी मार्केट की हलचल कितनी तेजी से घरेलू निवेशकों के पोर्टफोलियो को तहस-नहस कर सकती है। दिग्गज कंपनियों के शेयरों से लेकर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों तक में चौतरफा बिकवाली देखने को मिली, जिससे निवेशकों के चेहरे पर उदासी छा गई और पूरे बाजार में मायूसी का माहौल फैल गया।

सेंसेक्स में 700 अंकों से अधिक की भारी फिसलन और सेक्टोरल इंडेक्स का हाल

कच्चे तेल के इस आक्रामक तेवर के चलते प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स (Sensex) में 700 अंकों से अधिक की भारी-भरकम फिसलन दर्ज की गई, जबकि निफ्टी (Nifty) भी अपने अहम मनोवैज्ञानिक समर्थन स्तरों को तोड़ते हुए काफी नीचे लुढ़क गया। बाजार के इस भारी दबाव में बैंकिंग, ऑटोमोबाइल, मेटल और रियल्टी सेक्टर के शेयरों की सबसे बुरी हालत रही क्योंकि ये सेक्टर कच्चे तेल की कीमतों और आर्थिक गतिविधियों के उतार-चढ़ाव के प्रति सबसे ज्यादा संवेदनशील माने जाते हैं। कंपनियों के इनपुट कॉस्ट बढ़ने और मार्जिन पर दबाव आने की आशंका के चलते निवेशकों ने मुनाफावसूली करना ही बेहतर समझा। हालांकि, कुछ रक्षा और चुनिंदा एनर्जी शेयरों में सीमित खरीदारी जरूर देखी गई, लेकिन वह पूरे बाजार में मचे हाहाकार को रोकने के लिए नाकाफी साबित हुई, जिससे तकनीकी विश्लेषकों की चिंताएं और अधिक बढ़ गई हैं।

आगे कैसी रहेगी बाजार की चाल और निवेशकों को क्या बरतनी चाहिए सावधानी

कमोडिटी और स्टॉक मार्केट के जानकारों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती और पश्चिम एशिया के हालात सामान्य नहीं होते, तब तक भारतीय शेयर बाजार में इसी तरह के उतार-चढ़ाव और अस्थिरता का दौर बना रह सकता है। खुदरा और लॉन्ग-टर्म निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे घबराहट में आकर (Panic selling) अपने क्वालिटी शेयरों को कौड़ियों के दाम न बेचें, बल्कि अपनी निवेश रणनीति को मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों तक ही सीमित रखें। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर आने वाले बयानों और देश के आगामी वृहद आर्थिक आंकड़ों पर भी अब बाजार की पैनी नजर टिकी हुई है। यदि क्रूड ऑयल के दामों में नरमी आती है और घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) बाजार को संभालने के लिए आगे आते हैं, तो एक बार फिर से निचले स्तरों पर रिकवरी देखने को मिल सकती है, बशर्ते ग्लोबल फ्रंट पर कोई नया भू-राजनीतिक संकट सिर न उठाए।