‘भारत पिछले 20 सालों में पूरी तरह बदल चुका है...’ बेल्जियम के प्रधानमंत्री की तारीफ के पीछे...

‘भारत पिछले 20 सालों में पूरी तरह बदल चुका है...’ बेल्जियम के प्रधानमंत्री की तारीफ के पीछे...

आज के इस आधुनिक और भू-राजनीतिक रूप से तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत का कद अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार मजबूत होता जा रहा है। दुनिया के बड़े-बड़े विकसित देश अब इस बात को खुलकर स्वीकार करने लगे हैं कि वैश्विक शांति, आर्थिक स्थिरता और भविष्य की तकनीकी प्रगति में भारत की भागीदारी के बिना कोई भी बड़ा कदम उठा पाना संभव नहीं है। इसी कड़ी में यूरोप के एक बेहद महत्वपूर्ण और आर्थिक रूप से संपन्न देश बेल्जियम के प्रधानमंत्री की तरफ से भारत को लेकर एक ऐसा बयान सामने आया है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। बेल्जियम के प्रधानमंत्री ने मुक्त कंठ से भारत की तारीफ करते हुए यह कहा है कि ‘भारत पिछले 20 सालों में बहुत बदल चुका है’ और आज यह देश केवल पारंपरिक व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया की एक बड़ी महाशक्ति के रूप में उभरकर सामने आया है। इस तारीफ के पीछे केवल औपचारिक कूटनीति ही नहीं, बल्कि एक बहुत बड़ा रणनीतिक और व्यावसायिक दांव छिपा हुआ है, क्योंकि दोनों देशों के बीच सदियों पुराना व्यापारिक रिश्ता अब हीरों की चमक से निकलकर रक्षा (Defense), अंतरिक्ष (Space), हरित ऊर्जा (Green Energy) और उच्च तकनीक (High-Tech) के नए क्षितिज छूने लगा है।

डायमंड कैपिटल एंटवर्प से लेकर भारत के साथ डिफेंस कॉरिडोर तक, कैसे मजबूत हो रही है दोनों देशों की पुरानी दोस्ती

बेल्जियम और भारत के बीच के संबंधों का इतिहास दशकों पुराना है, और इसमें बेल्जियम का खूबसूरत शहर एंटवर्प (Antwerp) दुनिया भर में हीरो के व्यापार (Diamond Trading) के लिए केंद्र बिंदु रहा है। भारत के सूरत और मुंबई के हीरा व्यापारी वर्षों से एंटवर्प के साथ मिलकर दुनिया के सबसे बड़े डायमंड मार्केट को संचालित करते आए हैं। लेकिन समय के साथ अब इस रिश्ते की परिभाषा पूरी तरह से बदल चुकी है। बेल्जियम के प्रधानमंत्री के इस ताजा बयान और उनकी नीतियों से यह साफ जाहिर होता है कि अब दोनों देशों का ध्यान केवल आभूषणों और पारंपरिक वस्तुओं के आयात-निर्यात तक सीमित नहीं है, बल्कि यह साझेदारी अब अत्याधुनिक रक्षा तकनीक, सेमीकंडक्टर, बंदरगाह विकास और समुद्री सुरक्षा जैसे गंभीर रणनीतिक क्षेत्रों में प्रवेश कर चुकी है। भारत अपनी ‘मेक इन इंडिया’ (Make In India) और रक्षा आत्मनिर्भरता की नीतियों के तहत दुनिया के प्रमुख देशों के साथ मिलकर अत्याधुनिक हथियारों और तकनीकी उपकरणों का सह-उत्पादन (Co-production) कर रहा है, और ऐसे में यूरोपीय संघ के केंद्र में बैठे बेल्जियम के साथ इस प्रकार की गहरी नजदीकियां भारत के डिफेंस सेक्टर को एक नई वैश्विक उड़ान देने का काम कर रही हैं।

भू-राजनीतिक समीकरणों और यूरोपीय बाजार में भारत की बढ़ती स्वीकार्यता का बड़ा कूटनीतिक संदेश

जब पश्चिमी देशों का कोई शीर्ष नेता यह सार्वजनिक रूप से स्वीकार करता है कि भारत ने पिछले दो दशकों में अपनी आंतरिक नीतियों, डिजिटल क्रांति और आर्थिक सुधारों के दम पर अपनी पूरी तस्वीर बदल दी है, तो इसका एक बहुत बड़ा भूराजनीतिक संदेश पूरी दुनिया में जाता है। आज का भारत वह देश नहीं है जो केवल अंतरराष्ट्रीय समझौतों का पालन करे, बल्कि आज का भारत ग्लोबल साउथ (Global South) की आवाज बनकर दुनिया को एक नई दिशा दिखाने का माद्दा रखता है। बेल्जियम यूरोपीय संघ (European Union) का एक बेहद अहम सदस्य देश है, और यूरोपीय देशों के साथ भारत के मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की चर्चाओं के बीच इस तरह के सकारात्मक बयान इस बात का पुख्ता प्रमाण हैं कि आने वाले समय में भारत और यूरोप के आर्थिक रिश्ते नई ऊंचाइयों को छूने वाले हैं। बेल्जियम के प्रधानमंत्री ने भारत की प्रशासनिक दक्षता, बुनियादी ढांचे के विकास और मेक इन इंडिया पहल के तहत निवेशकों के लिए तैयार किए गए अनुकूल माहौल की जमकर सराहना की है। जानकारों का यह मानना है कि यह कूटनीतिक प्रशंसा आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच अरबों डॉलर के नए निवेश और तकनीकी समझौतों का रास्ता साफ करने वाली है, जिससे भारतीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

भविष्य की साझेदारियां और वैश्विक मंच पर भारत का बढ़ता दबदबा, दुनिया मान रही है देश की आर्थिक ताकत का लोहा

भारत और बेल्जियम के बीच बढ़ते इन प्रगाढ़ संबंधों का दायरा केवल व्यापार और रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) और हरित हाइड्रोजन (Green Hydrogen) जैसी भविष्य की जरूरतें भी शामिल हैं। बेल्जियम के पास बंदरगाह प्रबंधन और उन्नत लॉजिस्टिक्स तकनीक में महारਤ हासिल है, जबकि भारत के पास विशाल बाजार, कुशल युवा कार्यबल और दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था की ताकत है। जब ये दोनों ताकतें आपस में हाथ मिलाती हैं, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बहुत बड़ा और सकारात्मक संकेत बन जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत जिस प्रकार से दुनिया के हर कोने के साथ अपने संबंधों को संतुलित और मजबूत करते हुए आगे बढ़ रहा है, उसने यह साबित कर दिया है कि भारत अब किसी पर निर्भर रहने वाला देश नहीं, बल्कि दुनिया को रास्ता दिखाने वाला एक प्रमुख नेतृत्वकर्ता बन चुका है। बेल्जियम के प्रधानमंत्री की यह तारीफ इस बात की मुहर है कि आने वाला दौर भारत का है, और वैश्विक पटल पर भारत की यह बढ़ती साख हर उस भारतीय के लिए गर्व का विषय है जो देश की तरक्की में अपना योगदान दे रहा है।