डब्ल्यूईएफ सर्वे में चीन और यूरोप को पीछे छोड़ भारत निकला सबसे आगे
विश्व आर्थिक मंच (WEF) की तरफ से जारी किए गए हालिया और बेहद चौंकाने वाले सर्वे ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था में हलचल मचा दी है। वैश्विक मंदी, महंगाई और कूटनीतिक तनावों के इस दौर में भारत ने चीन और यूरोपीय देशों जैसे दिग्गजों को पीछे छोड़ते हुए विकास और निवेशकों के भरोसे के मामले में नंबर वन का स्थान हासिल कर लिया है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद दुनिया भर के अर्थशास्त्रियों और वित्तीय विश्लेषकों के वे तमाम पुराने अनुमान पूरी तरह से गलत साबित हो गए हैं, जिनमें यह दावा किया जा रहा था कि पश्चिमी देशों और चीन की तुलना में उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं सुस्त पड़ सकती हैं। भारत की इस अभूतपूर्व छलांग ने यह साबित कर दिया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था जिस मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है, उसका मुकाबला आज की तारीख में कोई दूसरा देश नहीं कर पा रहा है।
विश्व आर्थिक मंच (WEF) के नए सर्वे ने वैश्विक पटल पर मचाई सनसनी
स्विट्जरलैंड के दावोस में होने वाले विश्व आर्थिक मंच की बैठकों और उसके द्वारा समय-समय पर जारी किए जाने वाले सूचकांकों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कूटनीति में ‘बाइबल’ की तरह देखा जाता है। हाल ही में डब्ल्यूईएफ द्वारा विभिन्न देशों के आर्थिक भविष्य, कारोबारी माहौल और निवेशकों के रुख को लेकर एक व्यापक सर्वे कराया गया था। इस सर्वे के जो नतीजे सामने आए हैं, उन्होंने दुनिया की तमाम बड़ी महाशक्तियों को हैरान कर दिया है। चीन, जो दशकों से वैश्विक विकास का इंजन माना जाता था, इस बार कई मोर्चों पर पिछड़ता नजर आ रहा है। वहीं, ऊर्जा संकट, युद्ध और मंदी की मार झेल रहा यूरोप भी भारत की तेज रफ्तार के सामने फीका पड़ गया है। डब्ल्यूईएफ के इस सर्वे ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आगामी दशक पूरी तरह से भारत के नाम रहने वाला है।
चीन और यूरोप की सुस्त पड़ती रफ्तार और भारत का बढ़ता दबदबा
एक समय था जब वैश्विक निवेशकों की पहली पसंद या तो चीन की मैन्युफैक्चरिंग मार्केट होती थी या फिर यूरोपीय देशों की स्थिर अर्थव्यवस्थाएं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में भू-राजनीतिक समीकरणों, कोविड के बाद के प्रभावों और सख्त नियमों के कारण चीन की आर्थिक वृद्धि दर में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसके अलावा, रूस-यूक्रेन युद्ध और ऊर्जा संकट के चलते यूरोप के कई देश मंदी और महंगाई के दलदल में फंसे हुए हैं। इसके विपरीत, भारत ने अपनी विशाल घरेलू बाजार क्षमता, मजबूत डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर, राजनीतिक स्थिरता और युवा कार्यबल के दम पर दुनिया के हर बड़े निवेशक का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। डब्ल्यूईएफ के सर्वे में यह बात खुलकर सामने आई है कि वैश्विक सीईओ और बिजनेस लीडर्स अब चीन से अपना कारोबार समेटकर भारत को एक सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्प के रूप में देख रहे हैं।
घरेलू नीतियों, सुधारों और डिजिटल क्रांति का कमाल
भारत की इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे केंद्र सरकार द्वारा पिछले एक दशक में उठाए गए कड़े और दूरदर्शी आर्थिक सुधारों का बहुत बड़ा हाथ है। 'मेक इन इंडिया', 'डिजिटल इंडिया', पीएलआई (PLI) स्कीम्स और टैक्स व्यवस्था में किए गए व्यापक सुधारों ने देश में बिजनेस करना बेहद आसान बना दिया है। आज देश के छोटे से छोटे गांवों तक डिजिटल पेमेंट और इंटरनेट की पहुंच ने आर्थिक गतिविधियों को कई गुना बढ़ा दिया है। बुनियादी ढांचे के विकास पर सरकार का लगातार फोकस और एक्सप्रेसवे, रेलवे व एयरपोर्ट्स के निर्माण ने लॉजिस्टिक लागत को कम किया है, जिससे विदेशी निवेशकों का भरोसा भारत की विकास गाथा पर और अधिक मजबूत हुआ है। डब्ल्यूईएफ का यह सर्वे इस बात का मुहर है कि भारत केवल कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर चमत्कारिक बदलाव कर रहा है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था के नए केंद्र के रूप में उभरता हुआ भारत
विश्व आर्थिक मंच के इस सर्वे के नतीजे यह साफ इशारा करते हैं कि आने वाले समय में वैश्विक शक्ति का संतुलन पश्चिम से पूर्व की ओर तेजी से स्थानांतरित हो रहा है। भारत जिस प्रकार से दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर शीर्ष तीन की ओर कदम बढ़ा रहा है, वह ग्लोबल साउथ के देशों के लिए भी एक प्रेरणा बन चुका है। भारत की यह तरक्की केवल आंकड़ों की बाजीगरी नहीं है, बल्कि इससे देश के करोड़ों युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुल रहे हैं और जीवन स्तर में सुधार हो रहा है। आने वाले वर्षों में जब दुनिया मंदी के संकट से जूझ रही होगी, तब भारत की यह मजबूत आर्थिकी वैश्विक बाजार के लिए एक बड़े सहारे के रूप में काम करेगी, और यही वजह है कि आज पूरी दुनिया भारत की इस सफलता का लोहा मान रही है।