Petrol-Diesel Price Hike: पेट्रोल-डीजल में ₹17 तक की भारी बढ़ोतरी की तैयारी? ब्रोकरेज फर्म की इस रिपोर्ट ने उड़ाए होश
देश में महंगाई के मोर्चे पर आम जनता को एक बार फिर बड़ा झटका लग सकता है। पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने मंगलवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 90 पैसे प्रति लीटर का इजाफा कर दिया है। आपको बता दें कि एक हफ्ते के भीतर यह दूसरा मौका है जब ईंधन के दाम बढ़ाए गए हैं। लेकिन कहानी सिर्फ इतनी नहीं है। इस मामूली बढ़ोतरी के बावजूद आम उपभोक्ताओं पर आने वाले दिनों में और बड़ा बोझ बढ़ सकता है। दिग्गज ब्रोकरेज फर्म कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज (Kotak Institutional Equities) की ताजा रिपोर्ट ने जो गणित समझाया है, वह बेहद चौंकाने वाला और आम आदमी के बजट को बिगाड़ने वाला है।
तेल कंपनियों को हर महीने 25,000 करोड़ का नुकसान, जानिए पूरा गणित
ब्रोकरेज फर्म कोटक के मुताबिक, हालिया दिनों में की गई यह बढ़ोतरी ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। पश्चिम एशिया के संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार आसमान छू रही हैं, जिससे भारतीय तेल कंपनियों को भारी वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट की मानें तो सरकारी तेल कंपनियों को फिलहाल हर महीने करीब 25,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम नुकसान उठाना पड़ रहा है।
आंकड़ों के अनुसार, तेल कंपनियों को फिलहाल डीजल बेचने पर लगभग 11.40 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल पर 14.30 रुपये प्रति लीटर की अंडर-रिकवरी (लागत से कम पर बिक्री) हो रही है। ब्रोकरेज फर्म का साफ कहना है कि इस घाटे और नुकसान की पूरी भरपाई करने के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अभी भी 13 रुपये से लेकर 17 रुपये प्रति लीटर तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी की सख्त जरूरत पड़ सकती है। अगर ऐसा हुआ तो आने वाले दिनों में ईंधन के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकते हैं।
सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाना नाकाफी, जीएसटी होता ज्यादा असरदार
ईंधन के अलावा सरकार ने पिछले दिनों घरेलू बाजार को संभालने और चालू खाता घाटे को नियंत्रित करने के लिए सोने पर आयात शुल्क (Import Duty) को 6 फीसदी से बढ़ाकर सीधे 15 फीसदी करने का फैसला किया था। हालांकि, कोटक की रिपोर्ट में सरकार के इस कदम को भी लंबे समय के लिए नाकाफी बताया गया है।
ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने से घरेलू बाजार में सोने की कीमतें और अधिक बढ़ गई हैं, जिससे लोगों के पास पहले से मौजूद सोने की कुल वैल्यू तो बढ़ गई है, लेकिन इसका दीर्घकालिक आर्थिक लाभ सीमित होगा। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि सोने पर जीएसटी (GST) बढ़ाना सरकार के लिए ज्यादा प्रभावी कदम साबित हो सकता था, क्योंकि इससे सीधे तौर पर सोने की खपत को नियंत्रित करने में मदद मिलती।
कच्चे तेल के संकट से थमेगी GDP की रफ्तार? बढ़ा महंगाई का खतरा
वैश्विक स्तर पर जारी युद्ध और तनाव ने भारत के समष्टि आर्थिक परिदृश्य (Macroeconomic Outlook) को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया है। जब से युद्ध शुरू हुआ है, कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के आस-पास या उससे ऊपर टिकी हुई हैं। बीच में तो यह कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के पार भी निकल गई थीं। कच्चे तेल के उम्मीद से ज्यादा समय तक ऊंचे स्तर पर रहने के कारण अब कोटक ने देश के विकास अनुमानों को भी संशोधित किया है।
ब्रोकरेज फर्म ने अब अनुमान जताया है कि वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में भारत की जीडीपी (GDP) ग्रोथ घटकर 6% पर रह सकती है, जबकि इस दौरान औसत महंगाई दर 5% के आस-पास बनी रहने की आशंका है। रिपोर्ट के अनुसार, अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में हालात ऐसे ही बने रहे, तो केंद्र सरकार के सामने एक साथ तीन मोर्चों- बढ़ती महंगाई (Inflation), राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) और चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) को नियंत्रित करने की एक बहुत बड़ी और गंभीर चुनौती खड़ी हो जाएगी।