पेट्रोल-डीजल के बढ़ेंगे दाम? पीएम मोदी की 'बचत' वाली अपील के बाद देश में हलचल, जानें क्या है पूरा मामला
Petrol Diesel Price Update: देश में एक बार फिर पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से पेट्रोलियम उत्पादों का संयम से इस्तेमाल करने की अपील के बाद आम जनता के बीच यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या आने वाले दिनों में तेल के दाम बढ़ने वाले हैं? मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल के बीच पीएम मोदी का यह बयान काफी अहम माना जा रहा है।
ईरान-अमेरिका तनाव का घरेलू बाजार पर असर
दरअसल, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है। तेल कंपनियों पर इस बढ़ते बोझ का असर अब घरेलू कीमतों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। पीएम मोदी ने हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान स्पष्ट रूप से कहा कि मौजूदा वैश्विक संकट को देखते हुए हमें अपनी ऊर्जा खपत को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने सुझाव दिया कि हमें केवल आवश्यकतानुसार ही ईंधन का उपयोग करना चाहिए, ताकि न केवल विदेशी मुद्रा बचे बल्कि युद्ध के प्रतिकूल प्रभावों से भी निपटा जा सके।
'तैयार रहना चाहिए': दिलीप घोष का बड़ा बयान
प्रधानमंत्री के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पश्चिम बंगाल के नेता दिलीप घोष ने भी जनता को आने वाले समय के लिए सचेत किया है। उन्होंने कहा कि पिछले करीब 3 साल से वैश्विक स्तर पर जो युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं, उसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। घोष ने कहा, "हमने पिछले काफी समय से कीमतों को बढ़ने नहीं दिया है, लेकिन जब संकट लंबा खिंचता है, तो उसका असर होना स्वाभाविक है। प्रधानमंत्री ने सबको समय रहते सचेत किया है और हमें किसी भी स्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए।" उन्होंने यह भी साफ किया कि देश में पेट्रोल का पर्याप्त स्टॉक है, लेकिन आयात पर निर्भरता के कारण सावधानी जरूरी है।
ग्रीन एनर्जी और एथेनॉल पर सरकार का जोर
पीएम मोदी ने केवल बचत की बात ही नहीं की, बल्कि भारत के भविष्य के रोडमैप पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारत सौर ऊर्जा और पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार का मुख्य लक्ष्य अब शत-प्रतिशत एलपीजी कवरेज के बाद पाइपलाइन के जरिए सस्ती गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करना और सीएनजी के उपयोग को बढ़ावा देना है। इन कदमों से भारत ऊर्जा संकट का मजबूती से सामना कर पा रहा है, लेकिन वर्तमान भू-राजनीतिक स्थितियों को देखते हुए संयम ही सबसे बड़ा बचाव है।