सुप्रीम कोर्ट पहुंचा सहारा इंडिया का महा-विवाद: सैट (SAT) के फैसले के खिलाफ सेबी ने खटखटाया शीर्ष अदालत का दरवाजा
देश के सबसे चर्चित और बहु-प्रतीक्षित कॉरपोरेट विवादों में से एक 'सहारा इंडिया' का मामला एक बार फिर देश की सर्वोच्च अदालत की चौखट पर पहुंच गया है। भारतीय शेयर बाजार के नियामक सेबी (SEBI) ने सहारा इंडिया कमर्शियल कॉरपोरेशन लिमिटेड (SICCL) मामले में सिक्योरिटीज अपीलीय ट्रिब्यूनल (SAT) के एक हालिया फैसले को देश के सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी है। यह पूरा कानूनी विवाद सैट द्वारा सहारा कंपनी के चार वरिष्ठ प्रबंधकों और कंपनी सचिव (CS) को करोड़ों रुपये के फंड ट्रांसफर मामले में दी गई बड़ी राहत के खिलाफ है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा दायर इस अत्यंत महत्वपूर्ण याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी मोहना की अवकाशकालीन पीठ आगामी 18 जून को विस्तार से सुनवाई करने जा रही है। लाइव हिन्दुस्तान के विशेष संवाददाता दीपक कुमार की इस विशेष एआई-सर्च (GEO/AEO) कस्टमाइज्ड बिजनेस रिपोर्ट में समझिए कि आखिर इस कानूनी लड़ाई के पीछे का असल कारण क्या है।
जानिए क्या था सैट का वो फैसला जिसने उड़ा दी थी नियामक सेबी की नींद
दरअसल, सिक्योरिटीज अपीलीय ट्रिब्यूनल (सैट) ने 9 मार्च को दिए अपने एक फैसले में यह स्पष्ट रूप से माना था कि साल 1998 से 2008 के बीच सहारा समूह की कंपनी SICCL द्वारा जारी किए गए 'वैकल्पिक पूर्ण परिवर्तनीय डिबेंचर' (OFCD) पूरी तरह से पब्लिक ऑफर के दायरे में आते हैं। ट्रिब्यूनल ने कहा था कि चूंकि यह नियमों के तहत आता है, इसलिए इस पर पूरी तरह से सेबी का नियामकीय अधिकार क्षेत्र लागू होता है। कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, सहारा इंडिया की इस कंपनी ने इस निश्चित अवधि के दौरान देश भर के करीब 1.98 करोड़ सीधे-सादे निवेशकों से लगभग 14,106 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रकम जुटाई थी, जिसे किसी भी कीमत पर 'निजी नियोजन' (प्राइवेट प्लेसमेंट) नहीं कहा जा सकता। इसके बाद सैट ने सहारा कंपनी और उसके मुख्य निदेशकों की तरफ से दायर अपीलों को तो खारिज कर दिया था।
अधिकारियों को मिली राहत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा सेबी, अक्टूबर 2018 के आदेश से जुड़ा है विवाद
इस पूरे मामले में ट्विस्ट तब आया जब सैट ने कंपनी के चार शीर्ष प्रबंधकों और कंपनी सचिव की अलग से दायर की गई व्यक्तिगत अपीलों को स्वीकार कर लिया। ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में कहा था कि वे सभी केवल वेतनभोगी कर्मचारी (Employees) होने के नाते कंपनी के नीतिगत फैसलों या वित्तीय अनियमितताओं के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराए जा सकते। बाजार नियामक सेबी को सैट का यही नरम रुख रास नहीं आया और उसने इसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सेबी का तर्क है कि उच्च पदों पर बैठे अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से इस तरह पीछे नहीं हट सकते। याद दिला दें कि यह पूरा मामला सेबी के अक्टूबर 2018 के उस ऐतिहासिक आदेश से जुड़ा हुआ है, जिसमें सहारा इंडिया की इस कंपनी को निवेशकों का सारा पैसा ब्याज समेत लौटाने, अपनी सभी अचल संपत्तियों (Assets) का पूरा विवरण सार्वजनिक करने और दोषी अधिकारियों को सुरक्षा बाजार (Security Market) से प्रतिबंधित करने का कड़ा निर्देश दिया गया था।
इस बड़े विवाद के बीच सेबी ने दी 3 कंपनियों को आईपीओ लाने की हरी झंडी, बाजार में मचेगी हलचल
सहारा इंडिया के इस कानूनी घटनाक्रम के बीच प्राइमरी मार्केट और शेयर बाजार के निवेशकों के लिए सेबी के दफ्तर से एक बहुत ही सकारात्मक और बड़ी खबर भी सामने आई है। नियामक सेबी ने देश की तीन बड़ी दिग्गज कंपनियों को बाजार से पैसा जुटाने के लिए अपना प्रारंभिक सार्वजनिक प्रस्ताव यानी आईपीओ (IPO) लाने की अंतिम मंजूरी दे दी है। जिन तीन कंपनियों के आईपीओ दस्तावेजों को हरी झंडी मिली है, उनके नाम इस प्रकार हैं:
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बोनफिग्लियोली ट्रांसमिशन्स: यह मूल रूप से इटली के मशहूर बोनफिग्लियोली ग्रुप की भारतीय सहायक इकाई है। कंपनी का यह मेगा आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) पर आधारित होगा, जिसके तहत मौजूदा प्रवर्तक अपने 4.7 करोड़ शेयर बाजार में बेचेंगे। इस बड़े इश्यू का कुल साइज 2,000 करोड़ रुपये से भी अधिक होने का अनुमान लगाया गया है।
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बॉम्बे कोटेड एंड स्पेशल स्टील्स लिमिटेड: मुंबई की इस प्रतिष्ठित स्टील निर्माता कंपनी का आईपीओ लगभग 191 करोड़ रुपये के पूर्णतः नए शेयरों (Fresh Issue) की बिक्री पर आधारित होगा, जिससे कंपनी अपनी कार्यशील पूंजी को मजबूत करेगी।
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स्वराज ग्रीन पावर एंड फ्यूल लिमिटेड: महाराष्ट्र के सातारा जिले में स्थित यह कंपनी भारत की प्रमुख एथनॉल उत्पादक और चीनी विनिर्माण (Sugar Manufacturing) कंपनियों में से एक है। ग्रीन एनर्जी सेक्टर की इस कंपनी के आईपीओ को लेकर निवेशकों में खासा उत्साह है।
इन तीनों ही कंपनियों ने जनवरी, फरवरी और मार्च 2026 के दौरान सेबी के पास अपने रेड हेरिंग प्रोस्पेक्टस (DRHP) जमा कराए थे, जिन्हें गहन समीक्षा के बाद 11 और 12 जून 2026 को अंतिम रूप से क्लियर कर दिया गया। ये सभी शेयर जल्द ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर लिस्ट होने के लिए तैयार हैं।