ब्राजील में भयंकर संकट और भारत में अचानक बढ़ी मांग, बेलगाम हुए चीनी के दाम ने बढ़ाई चिंता
अंतरराष्ट्रीय बाजार से लेकर देश की घरेलू मंडियों तक एक बार फिर खाने-पीने की जरूरी चीजों की कीमतों को लेकर हलचल तेज हो गई है, जहां आम आदमी की रसोई का सबसे अहम हिस्सा मानी जाने वाली चीनी के दाम तेजी से बेलगाम होने लगे हैं। दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक देशों में शुमार ब्राजील में मौसम की मार और कृषि संकट के कारण गन्ने की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है, जिसके चलते वैश्विक स्तर पर चीनी की आपूर्ति चरमरा गई है और इसका सीधा असर भारत जैसे खपत वाले देशों पर पड़ रहा है। दूसरी तरफ, भारत के भीतर त्योहारों के सीजन और घरेलू खपत में अचानक आए भारी उछाल के कारण मांग आसमान छू रही है, जिससे थोक और खुदरा बाजारों में चीनी की कीमतें लगातार ऊपर की ओर भाग रही हैं। इस बढ़ती महंगाई और कीमतों के अनियंत्रित होने के रुख को देखते हुए अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों ने एक बड़ी चेतावनी जारी कर दी है कि यदि समय रहते आपूर्ति श्रृंखला को नियंत्रित नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में आम जनता को मीठे के लिए अपनी जेबें और ज्यादा ढीली करनी पड़ सकती हैं। सरकार और उद्योग जगत के बीच इस बात को लेकर गहन मंथन शुरू हो चुका है कि कैसे वैश्विक संकट के इस दौर में देश के भीतर चीनी के दामों को स्थिर रखा जाए और जमाखोरों पर लगाम लगाई जाए ताकि बाजार में कृत्रिम कमी पैदा न हो सके।
ब्राजील के कृषि संकट और मौसम की मार ने कैसे हिलाया दुनिया भर का शुगर मार्केट
दक्षिण अमेरिका के महाशक्ति देश ब्राजील को दुनिया की चीनी की राजधानी कहा जाता है, क्योंकि वहां से होने वाला निर्यात वैश्विक बाजार की कीमतों को सीधे तौर पर नियंत्रित करता है। लेकिन पिछले कुछ महीनों के दौरान ब्राजील के प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में भयंकर सूखे, अनियोजित मौसम और अत्यधिक गर्मी के कारण फसलों को जो भारी क्षति पहुंची है, उसने वहां की पूरी चीनी अर्थव्यवस्था को संकट में डाल दिया है। इस प्राकृतिक आपदा के चलते ब्राजील में चीनी मिलों का पेराई सीजन समय से पहले प्रभावित हुआ है, जिससे अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को मिलने वाली आपूर्ति में भारी गिरावट दर्ज की गई है। जब दुनिया के सबसे बड़े निर्यातक देश के पास ही खुद की मांग पूरी करने के लाले पड़ने लगते हैं, तो वैश्विक बाजार में भगदड़ मच जाती है और अंतरराष्ट्रीय फ्यूचर्स मार्केट में चीनी के दाम रॉकेट की रफ्तार से ऊपर उठने लगते हैं। ब्राजील के इस संकट ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि दुनिया की खाद्य सुरक्षा कितनी ज्यादा नाजुक स्थिति में है और कैसे किसी एक देश का मौसम परिवर्तन पूरी दुनिया के बाजारों को हिलाकर रख सकता है।
भारत में घरेलू मांग का बढ़ता दबाव और त्योहारों के सीजन में चीनी के बढ़ते खुदरा दाम
अंतरराष्ट्रीय बाजार की उथल-पुथल का असर जब देश की घरेलू मंडियों पर पड़ा, तो भारत के भीतर भी चीनी के थोक और खुदरा दामों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक होने के साथ-साथ इसका सबसे बड़ा उपभोक्ता भी है, और ऐसे समय में जब देश में आगामी त्योहारों का सीजन नजदीक आ रहा है, मांग में जबरदस्त तेजी दर्ज की जा रही है। मिष्टान्न निर्माताओं, बेकरी उद्योगों और कोल्ड ड्रिंक तथा फूड प्रोसेसिंग कंपनियों द्वारा थोक में चीनी की भारी खरीद किए जाने के कारण बाजार में मांग और आपूर्ति के बीच का संतुलन बिगड़ गया है। इसके अलावा, पिछले सत्र में देश के कुछ हिस्सों में मानसून की अनियमितता के कारण गन्ने के उत्पादन में जो हल्की गिरावट दर्ज की गई थी, उसने भी व्यापारियों को स्टॉक होल्ड करने के लिए प्रेरित किया है, जिससे कीमतों में कृत्रिम उछाल आने लगा है। आम उपभोक्ता जो पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे हैं, उनके लिए चीनी के दामों का इस तरह बेलगाम होना एक बहुत बड़ा झटका है, क्योंकि यह सीधे तौर पर दूध, मिठाइयां और अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतों को भी प्रभावित करने का काम कर रहा है।
सरकार की बड़ी चेतावनी और बढ़ती महंगाई से निपटने के लिए उठाए जाने वाले संभावित सख्त कदम
बाजार में चीनी के दामों को इस प्रकार बेलगाम होते देख और भविष्य के संकट की आशंका को भांपते हुए नीति निर्माताओं और खाद्य मंत्रालय की ओर से एक गंभीर चेतावनी जारी की गई है। सरकार इस बात पर पैनी नजर रख रही है कि कहीं व्यापारी और बड़े स्टॉकिस्ट अनुचित मुनाफे के चक्कर में चीनी की कालाबाजारी या भारी मात्रा में होर्डिंग तो नहीं कर रहे हैं, क्योंकि ऐसा होने पर बाजार में कृत्रिम किल्लत पैदा हो सकती है। जानकारों का मानना है कि यदि स्थिति ऐसे ही नियंत्रण से बाहर होती रही, तो सरकार घरेलू बाजार में कीमतों को काबू में रखने के लिए चीनी के निर्यात पर पूरी तरह रोक लगाने या कोटा प्रणाली को और अधिक सख्त करने जैसे कड़े कदम उठा सकती है। इसके अलावा, देश के विशाल बफर स्टॉक से चीनी की खुले बाजार में बिक्री के जरिए आपूर्ति को सुचारू बनाने के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है ताकि आम आदमी को महंगाई की इस आंधी से बचाया जा सके। आने वाले हफ्तों में सरकार के ये नीतिगत फैसले तय करेंगे कि देश की रसोई में मिठास बरकरार रहेगी या फिर महंगाई के कारण आम जनता का बजट पूरी तरह से बिगड़ जाएगा।