दुनिया भर में छाई मंदी के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की रॉकेट जैसी रफ्तार

दुनिया भर में छाई मंदी के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की रॉकेट जैसी रफ्तार

वैश्विक स्तर पर छाई आर्थिक सुस्ती, भू-राजनीतिक तनावों और महंगाई के दबाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) एक बार फिर दुनिया के लिए उम्मीद का सबसे बड़ा आधार बनकर उभरी है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ (International Monetary Fund) ने भारत की विकास दर पर अपना अटूट भरोसा जताते हुए वित्त वर्ष के लिए भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP Growth Rate) के अनुमान में बढ़ोतरी कर दी है।

आईएमएफ द्वारा जारी अपनी नवीनतम 'वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक' (World Economic Outlook) रिपोर्ट में यह स्पष्ट स्वीकार किया गया है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है। जहां चीन, अमेरिका और यूरोपीय देशों जैसे बड़े दिग्गजों की विकास दर सुस्ती की मार झेल रही है, वहीं भारत की जीडीपी रफ्तार रॉकेट की तरह आगे बढ़ रही है। वैश्विक वित्तीय संस्थाओं द्वारा भारत के आर्थिक प्रदर्शन को सराहा जाना देश के मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस और कंजम्पशन सेक्टर की अभूतपूर्व मजबूती को दर्शाता है।

किन घरेलू और वैश्विक कारणों से भारत की जीडीपी में आ रहा है इतना बड़ा उछाल?

आईएमएफ और दुनिया भर के अर्थशास्त्रियों का मानना है कि भारत की इस दमदार विकास दर के पीछे कई मजबूत आंतरिक और बाहरी कारक काम कर रहे हैं। भारत में लगातार बढ़ रही घरेलू मांग (Strong Domestic Demand), रिकॉर्ड जीएसटी कलेक्शन, और केंद्र सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे यानी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट (Capital Expenditure) पर किया जा रहा भारी-भरकम सरकारी खर्च इस ग्रोथ के मुख्य चालक हैं।

इसके अलावा, भारत का मजबूत बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र (Banking Sector Stability), डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम (UPI) और 'मेक इन इंडिया' के तहत बढ़ता घरेलू उत्पादन देश को हर झटके से सुरक्षित रख रहा है। आईएमएफ ने अपनी रिपोर्ट में विशेष रूप से उल्लेख किया है कि भारत में सेवा क्षेत्र (Services Sector) का निर्यात और निजी निवेश (Private Investment) में सुधार ऐसे कारक हैं जिन्होंने अर्थव्यवस्था की नींव को और अधिक ठोस बना दिया है, जिससे वैश्विक विपरीत परिस्थितियों का भी भारत पर बहुत कम असर पड़ रहा है।

दुनिया के दिग्गज देशों को पछाड़कर भारत कैसे बन रहा है ग्लोबल ग्रोथ का मुख्य इंजन?

आईएमएफ के आंकड़ों के विश्लेषण से यह बात साफ हो जाती है कि आने वाले वर्षों में वैश्विक आर्थिक विकास (Global Economic Growth) का एक बड़ा हिस्सा अकेले भारत से संचालित होने वाला है। चीन की सुस्त पड़ती अर्थव्यवस्था और वहां के रियल एस्टेट संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय निवेशक अब भारत को दुनिया के सबसे सुरक्षित और उच्च रिटर्न देने वाले बाजार के रूप में देख रहे हैं।

भारत की युवा आबादी (Demographic Dividend), तेजी से बढ़ता मध्यम वर्ग और शहरीकरण मिलकर एक ऐसा विशाल बाजार तैयार कर रहे हैं जिसकी मिसाल पूरी दुनिया में कहीं और नहीं मिलती। आईएमएफ के इस संशोधित ग्रोथ अनुमान ने क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के उस विश्वास को और मजबूत कर दिया है कि भारत 2030 से पहले दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति (3rd Largest Economy) बनने के अपने लक्ष्य की ओर बेहद मजबूती से कदम बढ़ा रहा है।

भारत की इस ऐतिहासिक आर्थिक छलांग का आम जनता और नौकरियों पर क्या पड़ेगा प्रभाव?

जीडीपी ग्रोथ अनुमान में इस बढ़ोतरी का सीधा फायदा देश के आम नागरिकों, युवाओं और कारोबारियों को मिलना तय है। जब देश की अर्थव्यवस्था इस रफ्तार से आगे बढ़ती है, तो नए-नए उद्योगों की स्थापना होती है, जिससे आईटी, ऑटोमोबाइल, रियल एस्टेट, बैंकिंग, और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में लाखों नए रोजगार (Job Creation) के अवसर पैदा होते हैं।

इसके साथ ही, मजबूत विकास दर से सरकार का कर राजस्व बढ़ता है, जिससे आम जनता के लिए सड़क, रेल, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सार्वजनिक सुविधाओं का विस्तार करना आसान हो जाता है। आईएमएफ की यह सकारात्मक रिपोर्ट न केवल दलाल स्ट्रीट और शेयर बाजार के निवेशकों का हौसला बढ़ा रही है, बल्कि भारत की आर्थिक संप्रभुता को दुनिया के पटल पर एक नई पहचान भी दिला रही है।