समय रहते रिटायरमेंट प्लानिंग करना क्यों है बेहद जरूरी, जानिए इसके बड़े फायदे
दौड़भाग भरी इस आधुनिक जिंदगी में हर व्यक्ति अपने आज को बेहतर बनाने और अपनी वर्तमान जरूरतों को पूरा करने में दिन-रात जुटा रहता है लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि जब आपकी उम्र काम करने की नहीं रहेगी और शरीर साथ नहीं देगा, तब आपका आने वाला कल कैसा होगा। आज के दौर में जहां महंगाई लगातार आसमान छू रही है और जीवनशैली के खर्चे दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं, वहां बिना किसी ठोस योजना के भविष्य की कल्पना करना अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने जैसा साबित हो सकता है। यही कारण है कि आज के समय में रिटायरमेंट प्लानिंग यानी सेवानिवृत्ति की योजना बनाना केवल किसी अमीर या बुजुर्ग व्यक्ति का काम नहीं रह गया है, बल्कि यह हर उस समझदार युवा और कामकाजी इंसान के लिए सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए जो अपने भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित और आत्मनिर्भर देखना चाहता है। जब आप अपनी जवानी के दिनों में नियमित रूप से थोड़ी-थोड़ी बचत करना शुरू करते हैं, तो कंपाउंडिंग यानी चक्रवृद्धि ब्याज की ताकत से वही छोटी सी रकम आने वाले समय में एक बहुत बड़ा और मजबूत वित्तीय फंड बन जाती है जो आपके बुढ़ापे का सबसे बड़ा और सच्चा सहारा बनती है।
महंगाई के इस दौर में रेगुलर इनकम रुकने के बाद कैसे संभलेगा घर और क्या कहती है आज की आर्थिक हकीकत
आज से कुछ दशक पहले जब संयुक्त परिवार हुआ करते थे और जीवन का खर्च सीमित था, तब बुढ़ापे की चिंता इतनी गहरी नहीं होती थी जितनी कि आज के परमाणु परिवारों और अनिश्चित दौर में हो गई है। जब कोई व्यक्ति अपनी नौकरी या व्यवसाय से रिटायर होता है, तो उसकी महीने की सैलरी या नियमित आमदनी का स्रोत अचानक से हमेशा के लिए बंद हो जाता है, जबकि घर का राशन, बिजली का बिल, दवाइयों का खर्चा और रोजमर्रा की जरूरतें कभी कम नहीं होती हैं। मेडिकल साइंस की तरक्की के कारण आज इंसान की उम्र तो बढ़ रही है लेकिन बढ़ती उम्र के साथ बीमारियां और इलाज के महंगे खर्च भी साए की तरह साथ चलते हैं, जिनके लिए पर्याप्त पैसों का होना बेहद जरूरी है। यदि आपने समय रहते अपने कामकाजी जीवन में ही भविष्य के लिए एक अलग और सुरक्षित फंड तैयार नहीं किया है, तो रिटायरमेंट के बाद का जीवन आर्थिक तंगी और दूसरों पर निर्भरता का शिकार बन सकता है जो किसी भी स्वाभिमानी व्यक्ति के लिए बेहद कष्टदायक अनुभव होता है।
कंपाउंडिंग का चमत्कारी गणित और जितनी जल्दी शुरू करेंगे निवेश, उतना ही बड़ा होगा आपका फायदा
वित्तीय जानकारों और बड़े-बड़े निवेशकों का हमेशा से यह मंत्र रहा है कि पैसे से पैसा कमाने का सबसे अचूक हथियार कंपाउंडिंग यानी चक्रवृद्धि ब्याज है जिसकी ताकत को अल्बर्ट आइंस्टीन ने दुनिया का आठवां अजूबा बताया था। अगर आप अपनी रिटायरमेंट की प्लानिंग अपने करियर के शुरुआती दौर यानी 25 से 30 साल की उम्र में ही शुरू कर देते हैं, तो आपको हर महीने बहुत बड़ी रकम बचाने की कोई आवश्यकता नहीं पड़ती है बल्कि छोटी-छोटी बचत भी लंबी अवधि में बड़ा पहाड़ बन जाती है। इसके विपरीत, यदि आप रिटायरमेंट की योजना बनाने में बहुत देर कर देते हैं और 40 या 45 की उम्र के बाद जागते हैं, तो आपको वही लक्ष्य हासिल करने के लिए हर महीने अपनी कमाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा दांव पर लगाना पड़ेगा जो वर्तमान खर्चों के बीच लगभग असंभव सा लगने लगता है। समय की यह छोटी सी बढ़त आपके निवेश को बिना किसी अतिरिक्त मानसिक तनाव के करोड़ों रुपये के फंड में बदलने की पूरी क्षमता रखती है, बशर्ते आप अनुशासन के साथ हर महीने लगातार निवेश करने की सही आदत डाल लें।
सरकारी योजनाओं से लेकर म्यूचुअल फंड तक, जानिए रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए कौन-कौन से हैं बेस्ट और सुरक्षित विकल्प
अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए आज के वित्तीय बाजार में निवेश के ऐसे कई शानदार और भरोसेमंद विकल्प उपलब्ध हैं जो आपकी जोखिम लेने की क्षमता और उम्र के हिसाब से बेहतरीन रिटर्न दे सकते हैं। नेशनल पेंशन सिस्टम यानी एनपीएस, पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी पीपीएफ, कर्मचारी भविष्य निधि यानी ईपीएफ और वरिष्ठ नागरिक बचत योजना जैसी सरकारी स्कीमें पूरी तरह से सुरक्षित मानी जाती हैं जो गारंटीड रिटर्न के साथ टैक्स बचाने का भी बड़ा लाभ देती हैं। वहीं दूसरी ओर, अगर आप थोड़ा सा रिस्क लेकर महंगाई को मात देने वाला और सबसे तगड़ा रिटर्न पाना चाहते हैं, तो इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में लॉन्ग-ترم सिप यानी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान के जरिए निवेश करना सबसे उत्तम मार्ग माना जाता है। इन सभी वित्तीय साधनों में थोड़ा-थोड़ा पैसा निवेश करके आप न केवल अपने आज के टैक्स को बचा सकते हैं बल्कि अपने बुढ़ापे को इतना मजबूत और शानदार बना सकते हैं कि आपको अपनी जरूरतों के लिए कभी भी किसी के आगे हाथ फैलाने की जरूरत नहीं पड़े।