सेट पर अचानक जीभ हिलाकर चीख पड़े थे आशुतोष राणा, थम गई थी पूरे क्रू की सांसें
भारतीय सिनेमा के इतिहास में जब भी सबसे खतरनाक, खूंखार और आइकॉनिक खलनायकों की बात की जाती है, तो फिल्म ‘संघर्ष’ में अभिनेता आशुतोष राणा द्वारा निभाए गए ‘लज्जाशंकर पांडे’ का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है। साल 1999 में रिलीज हुई यह मनोवैज्ञानिक थ्रिलर फिल्म आज भी अपने बेहतरीन सस्पेंस और अभिनय के लिए जानी जाती है, लेकिन इस फिल्म के बारे में एक ऐसा किस्सा जुड़ा है जिसे सुनकर आज भी लोगों की सांसें थम जाती हैं। तनुजा चंद्रा द्वारा निर्देशित इस फिल्म में अक्षय कुमार और प्रीति जिंटा ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं, लेकिन पूरी फिल्म की लाइट, कैमरा और एक्शन को अपनी एक खतरनाक उपस्थिति से चुराने वाले शख्स सिर्फ और सिर्फ आशुतोष राणा थे। उनके द्वारा पर्दे पर निभाया गया तांत्रिक लज्जाशंकर पांडे का वह खौफनाक रूप बच्चों से लेकर बड़ों तक के दिलों में एक अजीब सा डर पैदा कर देता था। इस फिल्म की शूटिंग के दौरान सेट पर कुछ ऐसा हुआ था जिसने न केवल निर्देशक और क्रू मेंबर्स को हैरान कर दिया था, बल्कि खुद आशुतोष राणा के अभिनय कौशल की गहराई को पूरी दुनिया के सामने लाकर रख दिया था। यह वह दौर था जब वीएफएक्स (VFX) या कंप्यूटर जनित प्रभावों का इस्तेमाल बहुत सीमित था, और कलाकारों को अपनी आंखों के भावों, शारीरिक भाषा और आवाज के दम पर ही उस डर को पैदा करना पड़ता था, जो सीधे दर्शकों की रूह को कंपा दे।
जब सेट पर बिना किसी पूर्व रिहर्सल या स्क्रिप्ट के अचानक जीभ हिलाकर चीख पड़े थे आशुतोष राणा, थम गई थी क्रू की सांसें
‘संघर्ष’ फिल्म के उस सबसे डरावने और चर्चित दृश्य के पीछे की कहानी बेहद रोमांचक है जिसे आज भी फिल्म इंडस्ट्री के गलियारों में एक मिसाल के रूप में याद किया जाता है। फिल्म के एक खास सीक्वेंस में लज्जाशंकर पांडे को एक विशेष प्रकार की पूजा और अपने ईष्ट को प्रसन्न करने के लिए एक अजीबोगरीब मुद्रा में दिखना था। निर्देशकों और पटकथा लेखकों ने उस सीन के लिए एक सामान्य रूपरेखा तैयार की थी, लेकिन जब कैमरे के सामने आने का वक्त आया, तो आशुतोष राणा उस किरदार की गहराई में इतनी बुरी तरह उतर चुके थे कि वे खुद भूल गए कि वे अभिनय कर रहे हैं या वे असल जिंदगी में उस खूंखार तांत्रिक बन चुके हैं। बिना किसी पूर्व रिहर्सल, बिना किसी लंबी स्क्रिप्ट और बिना निर्देशक के किसी खास निर्देश के, आशुतोष राणा ने कैमरे के सामने अचानक अपनी जीभ को एक बेहद अनोखे और डरावने तरीके से हिलाना शुरू कर दिया और एक ऐसी खौफनाक चीख निकाली जिसे सुनते ही सेट पर मौजूद सभी लोगों के होश उड़ गए। उस अचानक हुई घटना से वहां मौजूद क्रू मेंबर्स, कैमरामैन और निर्देशक की सांसें पल भर के लिए थम गईं, क्योंकि किसी को यह उम्मीद नहीं थी कि कोई अभिनेता अपनी कला को इस हद तक जीवंत कर सकता है कि सामने वाला इंसान सचमुच में सहम जाए। वह शॉट इतना परफेक्ट और असली था कि निर्देशक ने उसमें बिना किसी कट के उसे फाइनल कर लिया, जो आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे बेहतरीन और रोंगटे खड़े कर देने वाले दृश्यों में गिना जाता है।
एक अभिनेता की अद्भुत तल्लीनता और वह समर्पण, जिसने खलनायक की परिभाषा को हमेशा के लिए बदलकर रख दिया
सिनेमा जगत में कई ऐसे कलाकार आते हैं जो अपनी फिल्मों में विलेन का किरदार निभाते हैं, लेकिन कुछ ही ऐसे सितारे होते हैं जो उस नकारात्मक किरदार को अमर बना देते हैं। आशुतोष राणा ने ‘संघर्ष’ फिल्म में लज्जाशंकर पांडे का किरदार निभाकर यह साबित कर दिया कि एक बेहतरीन अभिनेता के लिए यह मायने नहीं रखता कि वह हीरो है या विलेन, बल्कि यह मायने रखता है कि वह परदे पर कितनी शिद्दत से अपनी जान फूंक रहा है। उस एक खौफनाक सीन के बाद जब डायरेक्टर ने 'कट' बोला, तो सेट पर एक लंबी खामोशियां छा गई थी, क्योंकि कोई भी यह समझ नहीं पा रहा था कि आशुतोष ने उस तरह की हरकत कैसे सोच ली। बाद में एक इंटरव्यू के दौरान जब आशुतोष राणा से इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि वे शूटिंग के दौरान अपने किरदार में इस कदर खो जाते थे कि उन्हें अपने आसपास की दुनिया का होश ही नहीं रहता था। उनका यह समर्पण और अभिनय के प्रति पागलपन ही था जिसकी वजह से वह फिल्म आज भी कल्ट क्लासिक का दर्जा प्राप्त कर चुकी है। आज के आधुनिक दौर में जहां अभिनेता अक्सर कृत्रिम तरीकों और वीएफएक्स का सहारा लेते हैं, वहां 90 के दशक के इन कलाकारों का वह कच्चा और वास्तविक अभिनय आज की पीढ़ी के लिए एक बहुत बड़ा पाठ है कि असली एक्टिंग किसे कहते हैं।
सोशल मीडिया पर आज भी ट्रेंड करता है वो खौफनाक दृश्य, फैंस शेयर करते हैं फिल्म के अनसुने और दिलचस्प किस्से
भले ही ‘संघर्ष’ फिल्म को रिलीज हुए दो दशक से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन आज भी इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इस फिल्म के सीन्स, डायलॉग्स और आशुतोष राणा की वह डरावनी हंसी धड़ल्ले से शेयर की जाती है। इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब शॉट्स और एक्स (ट्विटर) पर जब भी सबसे डरावने बॉलीवुड विलेन की बात होती है, तो लज्जाशंकर पांडे का नाम सबसे ऊपर चमकता हुआ दिखाई देता है। नई पीढ़ी के दर्शक भी जब इस फिल्म को ओटीटी या अन्य माध्यमों पर देखते हैं, तो वे आशुतोष राणा के उस बिना रिहर्सल वाले जीभ हिलाने और चीखने वाले सीन की तारीफ किए बिना नहीं रह पाते। लोग सोशल मीडिया पर यह चर्चा करते हैं कि कैसे उस दौर में बिना किसी हाई-टेक तकनीक के केवल मजबूत अभिनय के दम पर ऐसे मास्टरपीस बनाए जाते थे जो आज की फिल्मों को भी टक्कर दे सकते हैं। आशुतोष राणा का वह किरदार आज भी हर उस शख्स के जेहन में ताजा है जिसने उस फिल्म को बड़े परदे या टेलीविजन पर देखा है, और यह इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि सच्ची मेहनत और बेजोड़ प्रतिभा कभी भी समय की धूल में नहीं छुपती, बल्कि वक्त के साथ और अधिक चमकदार होती जाती है।