दुपहिया 2 : गजराज राव और स्पर्श श्रीवास्तव की कॉमेडी फिर लाई धड़कपुर में भूचाल
ओटीटी प्लेटफॉर्म अमेजन प्राइम वीडियो पर बहुचर्चित कॉमेडी-ड्रामा वेब सीरीज 'दुपहिया' का दूसरा सीजन यानी 'दुपहिया 2' रिलीज हो चुका है। पहले सीजन की सफलता के बाद फैंस को इस सीजन का बेसब्री से इंतजार था। इस बार काल्पनिक गांव धड़कपुर की कहानी एक बार फिर से दर्शकों को हंसाने और गुदगुदाने के लिए पूरी तरह से तैयार है, हालांकि इस बार गांव का माहौल थोड़ा बदला हुआ नजर आ रहा है। आइए जानते हैं कि इस बार धड़कपुर में क्या नया तूफान आया है और कलाकारों ने कैसा प्रदर्शन किया है।
क्या है 'दुपहिया 2' की कहानी और धड़कपुर में इस बार क्यों मचा है नया बवाल
दुपहिया के दूसरे सीजन की कहानी वहीं से शुरू होती है जहां पहले सीजन का अंत हुआ था। इस बार धड़कपुर गांव में बनवारी झा (गजराज राव) की बंजर जमीन पर एक नया मोबाइल टावर लगाए जाने को लेकर जबरदस्त विवाद खड़ा हो गया है। गांव वालों का अंधविश्वास और आधुनिक तकनीक के बीच का टकराव इस सीजन का मुख्य केंद्र है। टावर लगते ही गांव में अजीबोगरीब अफवाहों का दौर शुरू हो जाता है। दूसरी तरफ, रोशनी (शिवानी रघुवंशी) इस बार अपनी शादी के बजाय एसएससी की परीक्षा पास करने की जद्दोजहद में लगी हुई है। परीक्षा पास करने और 'जुगाड़' बिठाने के चक्कर में रोशनी एक नैतिक जाल में फंस जाती है। इसके अलावा इंस्पेक्टर मिथिलेश को इस पूरे घटनाक्रम में एक बड़े घोटाले की बू आती है, जिससे कहानी में और अधिक रोमांच पैदा होता है।
कलाकारों का अभिनय और नए किरदारों की एंट्री का क्या रहा प्रभाव
अभिनय की बात करें तो गजराज राव ने एक बार फिर अपने सधे हुए अभिनय और कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों का दिल जीत लिया है। वहीं पुष्पलता के रूप में रेणुका शहाणे ने भी अपने किरदार में परिपक्वता और गर्माहट लाई है। 'लापता लेडीज' फेम स्पर्श श्रीवास्तव (भुगोल) और भुवन अरोड़ा (अमावस) ने अपनी ऊर्जा से सीरीज में जान फूंक दी है। इसके साथ ही भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार दिनेश लाल यादव 'निरहुआ' की इस सीजन में एक खास और मजेदार एंट्री हुई है, जो दर्शकों को काफी गुदगुदाती है। यशपाल शर्मा सहित अन्य कलाकारों ने भी अपने छोटे-छोटे किरदारों के साथ पूरा न्याय किया है। हालांकि, कुछ जगहों पर पटकथा थोड़ी धीमी पड़ जाती है और बीच के एपिसोड्स में कसावट की कमी खलती है, लेकिन कलाकारों का शानदार अभिनय इस कमी को पूरा कर देता है।
निर्देशन, संगीत और क्या आपको देखनी चाहिए यह सीरीज या नहीं
सोनम नायर के निर्देशन में बनी इस सीरीज का ग्रामीण सेटअप और प्रामाणिक लोकेशन इसकी सबसे बड़ी ताकत है। सीरीज का बैकग्राउंड स्कोर और देहाती माहौल दर्शकों को सीधे गांव की जमीन से जोड़ता है। हालांकि पहले सीजन की तुलना में इस बार नवीनता थोड़ी कम लगती है और कुछ जगहों पर जोक्स खींचे हुए प्रतीत होते हैं, फिर भी यह एक साफ-सुथरी और परिवार के साथ देखने लायक मनोरंजक सीरीज है। अगर आप हल्के-फुल्के पारिवारिक ड्रामे और छोटे शहर की अनोखी कहानियों के शौकीन हैं, तो यह वीकेंड पर देखने के लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है।