क्या आपने गौर किया, फिल्म ‘देवदास’ के इस सुपरहिट गाने को माधुरी दीक्षित ने खुद दी थी अपनी आवाज, बेहद दिलचस्प है ये अनसुना किस्सा

क्या आपने गौर किया, फिल्म ‘देवदास’ के इस सुपरहिट गाने को माधुरी दीक्षित ने खुद दी थी अपनी आवाज, बेहद दिलचस्प है ये अनसुना किस्सा

संजय लीला भंसाली के निर्देशन में साल 2002 में आई फिल्म ‘देवदास’ भारतीय सिनेमा के इतिहास की सबसे शानदार और यादगार फिल्मों में शुमार है। इस फिल्म के भव्य सेट, बेहतरीन अदाकारी और सुरीले गानों को लोग आज 24 साल बाद भी उतना ही पसंद करते हैं। फिल्म में ऐश्वर्या राय की खूबसूरती, शाहरुख खान की दीवानगी और माधुरी दीक्षित के लाजवाब डांस ने दर्शकों का दिल जीत लिया था। लेकिन इसी फिल्म से जुड़ा एक ऐसा अनोखा सच भी है, जिससे माधुरी दीक्षित के कड़े प्रशंसक भी आज तक अनजान हैं। अमूमन लोग जानते हैं कि माधुरी दीक्षित एक बेहतरीन अदाकारा और डांसर हैं, मगर बहुत कम लोगों को पता है कि उन्होंने ‘देवदास’ में अपनी एक्टिंग और डांस का जादू बिखेरने के साथ-साथ बकायदा अपनी आवाज में गाना भी गाया था।

जानिए कौन-सा है वो मशहूर गाना जिसमें गूंजी माधुरी दीक्षित की आवाज

अगर आप सोच रहे हैं कि फिल्म का ऐसा कौन सा गाना है जिसमें धक-धक गर्ल ने सुर लगाए थे, तो आपको बता दें कि उस बेहद लोकप्रिय गाने के बोल हैं— ‘काहे छेड़े मोहे’। जी हां, फिल्म में जब चंद्रमुखी यानी माधुरी दीक्षित घुंघरू बांधकर महफिल में थिरकती हैं, तो बैकग्राउंड में चलने वाले इस गाने में उनकी खुद की आवाज शामिल है। बहुत से लोग इसे महज एक प्लेबैक ट्रैक मानते हैं, लेकिन फिल्म मेकर्स ने इसके ऑफिशियल प्लेबैक क्रेडिट्स में बकायदा माधुरी दीक्षित का नाम बतौर सिंगर दर्ज किया है। इस गाने को और ज्यादा खास और क्लासिकल बनाने के लिए माधुरी दीक्षित ने म्यूजिक इंडस्ट्री के दो बेहद दिग्गज कलाकारों के साथ सुर से सुर मिलाए थे।

कत्थक के महागुरु पंडित बिरजू महाराज और कविता कृष्णमूर्ति के साथ जुगलबंदी

‘काहे छेड़े मोहे’ सिर्फ एक गाना नहीं बल्कि भारतीय शास्त्रीय संगीत का एक अनमोल रत्न है। इस गाने को माधुरी दीक्षित के साथ मिलकर मशहूर पार्श्व गायिका कविता कृष्णमूर्ति और कत्थक के महान उस्ताद पंडित बिरजू महाराज ने गाया था। पंडित बिरजू महाराज ने न सिर्फ इस पूरे गाने की लाजवाब और जटिल कोरियोग्राफी तैयार की थी, बल्कि गाने के बीच-बीच में आने वाले कत्थक के मुश्किल बोलों को अपनी दमदार क्लासिकल आवाज में पिरोया भी था। वहीं, सुरों की मल्लिका कविता कृष्णमूर्ति ने अपनी जादुई आवाज से इस गाने को अमर बना दिया। हिंदी, बंगाली, कन्नड़, राजस्थानी, भोजपुरी और तेलुगू समेत दर्जनों भाषाओं में अपनी आवाज का जादू बिखेरने वाली कविता कृष्णमूर्ति को उनके बेहतरीन योगदान के लिए चार बार फिल्मफेयर बेस्ट प्लेबैक सिंगर का अवॉर्ड मिल चुका है और साल 2005 में भारत सरकार ने उन्हें प्रतिष्ठित ‘पद्मश्री’ से भी सम्मानित किया था।

माधुरी दीक्षित की आवाज ने गाने में फूंक दी थी असली जान

इस गाने को जब आप ध्यान से सुनेंगे तो समझ आएगा कि इसमें जो शास्त्रीय बंदिशें और भाव हैं, उन्हें माधुरी दीक्षित ने बेहद खूबसूरती से अपनी आवाज के जरिए एक्सप्रेस किया है। पंडित बिरजू महाराज के निर्देशन में माधुरी ने इस गाने की बारीकियों को इतनी सहजता से पकड़ा कि वह प्रोफेशनल सिंगर्स को टक्कर देती नजर आईं। संजय लीला भंसाली अपनी फिल्मों के संगीत में परफेक्शन के लिए जाने जाते हैं, और उन्होंने चंद्रमुखी के किरदार को पूरी तरह जीवंत करने के लिए ही माधुरी दीक्षित से खुद इस गाने के कुछ हिस्सों को गवाया था। यही वजह है कि आज इतने सालों बाद भी जब यह गाना बजता है, तो लोग इसके मुरीद हो जाते हैं।

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