'हनुमान अंश' में नीम करोली बाबा की पत्नी रामबेटी, लखनऊ की हैं पूर्णिमा तिवारी, जिन्हें मिला था 'पार्वती माई' का रोल

'हनुमान अंश' में नीम करोली बाबा की पत्नी रामबेटी, लखनऊ की हैं पूर्णिमा तिवारी, जिन्हें मिला था 'पार्वती माई' का रोल

भारतीय आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जगत के फलक पर जब कभी भी कैंची धाम के महान संत नीम करोली बाबा के अलौकिक जीवन और उनके चमत्कारों की चर्चा होती है, तो उनके भक्तों के मन में एक अजीब सी श्रद्धा और उत्सुकता जाग जाती है। बाबा के जीवनकाल से जुड़े कई ऐसे अनछुए पहलू और रहस्य हैं जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं, और उन्हीं रहस्यों के बीच एक बेहद मार्मिक और ऐतिहासिक सच्चाई जुड़ी है उनकी धर्मपत्नी रामबेटी से, जिन्हें उनके दिव्य जीवन का एक अहम हिस्सा माना जाता है। इसी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश की तहजीब और नवाबों के शहर लखनऊ की रहने वाली प्रतिभावान अभिनेत्री पूर्णिमा तिवारी को जब 'हनुमान अंश' जैसे पवित्र और भव्य प्रोजेक्ट में मां पार्वती यानी 'पार्वती माई' का किरदार निभाने का सौभाग्य मिला, तो उनके जीवन का यह सफर एक नया इतिहास बन गया। लखनऊ की माटी से ताल्लुक रखने वाली पूर्णिमा तिवारी के लिए नीम करोली बाबा के इस आध्यामिक परिवेश से जुड़े प्रोजेक्ट में काम करना किसी चमत्कार से कम नहीं था, क्योंकि इस भूमिका ने उन्हें न केवल अभिनय की दुनिया में एक नई पहचान दिलाई, बल्कि उन्हें सनातन संस्कृति की उस गहरी धारा से भी जोड़ दिया जो पीढ़ियों से लोगों की आस्था का केंद्र बनी हुई है।

लखनऊ की गलियों से निकलकर अभिनय के आसमान पर छाने वाली पूर्णिमा तिवारी का प्रेरणादायक सफर

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ अपनी तहजीब, कला, संगीत और अदब के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है, और इसी शहर की गोद में पली-बढ़ीं पूर्णिमा तिवारी ने अपनी मेहनत और कला के दम पर मनोरंजन जगत में एक मुकाम हासिल किया है। बचपन से ही अभिनय के प्रति अगाध प्रेम रखने वाली पूर्णिमा ने जब थियेटर और कला की दुनिया में कदम रखा, तो उन्होंने कभी यह नहीं सोचा था कि उन्हें एक दिन भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता के सबसे बड़े प्रतीकों से जुड़े किसी ऐतिहासिक और धार्मिक प्रोजेक्ट में काम करने का मौका मिलेगा। लखनऊ के स्थानीय सांस्कृतिक आयोजनों और नाटकों से अपने करियर की शुरुआत करने वाली पूर्णिमा ने अपनी अदाकारी में जो सहजता और शालीनता दिखाई, उसने बड़े-बड़े निर्देशकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। जब 'हनुमान अंश' के लिए कलाकारों के ऑडिशन और चयन की प्रक्रिया चल रही थी, तब निर्माताओं की तलाश एक ऐसे चेहरे की थी जिसके व्यक्तित्व में भारतीय नारी की गरिमा, ममता और एक दैवीय तेज साफ झलकता हो, और लखनऊ की इस बेटी ने इन सभी पैमानों पर शत-प्रतिशत खरा उतरकर निर्माताओं का दिल जीत लिया।

'हनुमान अंश' में 'पार्वती माई' के किरदार की दिव्यता और पूर्णिमा तिवारी की रूहानी तैयारी

किसी भी पौराणिक या आध्यात्मिक चरित्र को पर्दे पर जीना किसी साधारण कलाकार के बस की बात नहीं होती, क्योंकि इसके लिए केवल अभिनय कला काफी नहीं है बल्कि उस पात्र की पवित्रता और ऊर्जा को अपने भीतर आत्मसात करना पड़ता है। पूर्णिमा तिवारी ने जब 'हनुमान अंश' में 'पार्वती माई' के इस अत्यंत प्रतिष्ठित और पूजनीय किरदार को स्वीकार किया, तो उन्होंने शूटिंग शुरू करने से पहले खुद को पूरी तरह से ध्यान, आध्यात्मिक अध्ययन और व्रत-नियमों में ढाल लिया था। मां पार्वती के रूप में कैमरे के सामने आना और उनके उस विराट स्वरूप को जीवंत करना जिसमें वात्सल्य, शक्ति और त्याग का अद्भुत संगम हो, एक बहुत बड़ी चुनौती थी, जिसे पूर्णिमा ने अपनी संवेदनशीलता और उत्कृष्ट अभिनय कौशल के बल पर बेहद सहजता से पूरा किया। सेट पर जब वे 'पार्वती माई' के पारंपरिक परिधान और आभूषणों में सजकर आती थीं, तो क्रू मेंबर और निर्देशक भी यह देखकर अचरज में पड़ जाते थे कि उस किरदार की ऊर्जा उन पर कितनी सटीक बैठ रही है। उनके संवाद बोलने का अंदाज, उनकी आंखों का भाव और चेहरे पर नजर आने वाला सात्विक तेज इस बात की गवाही दे रहा था कि यह केवल एक नौकरी या अभिनय नहीं, बल्कि उनकी आत्मा से निकला हुआ एक समर्पण था जिसे दर्शकों ने भी खुले दिल से सराहा और पसंद किया।

नीम करोली बाबा के आध्यात्मिक प्रभाव और 'हनुमान अंश' की इस अनूठी गाथा का सांस्कृतिक महत्व

नीम करोली बाबा के जीवन दर्शन और उनके आशीर्वाद से जुड़ी कथाएं आज देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में फैली हुई हैं, और उनके परिवार तथा उनकी जीवनसंगिनी रामबेटी के संस्मरणों को लेकर लोगों में हमेशा से एक गहरी जिज्ञासा रही है। 'हनुमान अंश' जैसी कृतियां और प्रस्तुतियां जब समाज के सामने आती हैं, तो वे केवल मनोरंजन का साधन नहीं बनतीं, बल्कि वे युवा पीढ़ी को उनकी महान सांस्कृतिक और धार्मिक जड़ों से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बन जाती हैं। लखनऊ की बेटी पूर्णिमा तिवारी द्वारा निभाया गया 'पार्वती माई' का यह किरदार आने वाले कई वर्षों तक टेलीविजन और सिनेमा के इतिहास में एक मील का पत्थर माना जाएगा, क्योंकि उन्होंने इस रोल में अपनी जिस निष्ठा और प्रतिभा का परिचय दिया है, वह दुर्लभ है। उत्तर प्रदेश और विशेषकर लखनऊ के लोगों के लिए यह अत्यंत गर्व की बात है कि उनकी माटी की एक कलाकार ने इतनी सूक्ष्मता के साथ पौराणिक चरित्र को जीवंत किया है और नीम करोली बाबा के आध्यात्मिक परिवेश से जुड़े इस आख्यान को घर-घर तक पहुंचाने में अपनी ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।