राजामौली ने फहाद फासिल को कहा 'नाग', आवेशम की सफलता पर ब्लॉकबस्टर फिल्म
भारतीय सिनेमा जगत में जब भी कभी दो दिग्गजों के बीच आपसी सराहना और कला के प्रति सम्मान की बात आती है, तो वह क्षण किसी उत्सव से कम नहीं होता। दक्षिण भारत के साथ-साथ पूरी दुनिया में अपनी विजुअल मास्टरपीस फिल्मों जैसे 'बाहुबली' और 'आरआरआर' के लिए पहचाने जाने वाले विश्वविख्यात निर्देशक एस.एस. राजामौली (SS Rajamouli) इन दिनों अपनी एक दिलचस्प टिप्पणी को लेकर सुर्खियों में छाए हुए हैं। हाल ही में उन्होंने अपनी सिनेमाई व्यस्त, और रचनात्मक दुनिया के बीच मलयालम सिनेमा के सबसे प्रतिभाशाली और वर्सटाइल अभिनेता फहाद फासिल (Fahadh Faasil) की हालिया सुपरहिट और कल्ट क्लासिक बन चुकी फिल्म 'आवेशम' (Aavesham) को देखा। फिल्म देखने के बाद राजामौली इतने अधिक प्रभावित हुए कि उन्होंने फहाद फासिल की अभिनय शैली की तुलना एक 'नाग' से कर डाली और कहा कि उन्हें इस अद्भुत अभिनेता से पर्दे पर नफरत करना बेहद पसंद है। निर्देशक राजामौली द्वारा की गई इस अनूठी और भावपूर्ण तारीफ ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है, और सिनेप्रेमी इस बात की चर्चा कर रहे हैं कि आखिर कैसे एक जीनियस निर्देशक ने दूसरे जीनियस अभिनेता के काम को अनोखे अंदाज में सराहा है।
फहाद फासिल की फिल्म 'आवेशम' और उनका बेजोड़ अभिनय कौशल
मलयालम सिनेमा के जाने-माने अभिनेता फहाद फासिल ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी फिल्मों के चयन और हर किरदार में जान फूंक देने की क्षमता से न केवल दक्षिण भारत बल्कि पूरे देश के दर्शकों के दिलों पर राज किया है। उनकी हालिया रिलीज फिल्म 'आवेशम' ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए झंडे गाड़े और क्रिटिक्स द्वारा भी इसे मास्टरपीस करार दिया गया। इस फिल्म में फहाद ने एक ऐसे गैंगस्टर का किरदार निभाया है जो अपने अनोखे अंदाज, सनक और गजब के स्वैग से दर्शकों को हंसाता भी है और डराता भी है। उनकी इस परफॉर्मेंस ने यह साबित कर दिया कि वे सिनेमा के पर्दे पर बिना किसी लाउड डायलॉग के केवल अपनी आंखों के इशारों और शारीरिक भाषा (Body Language) से किसी भी सीन को कितना खतरनाक और मनोरंजक बना सकते हैं। जब देश के सबसे बड़े निर्देशक एस.एस. राजामौली ने इस फिल्म को देखा, तो वे फहाद की इस अदाकारी के कायल हो गए और उनके मुंह से अनायास ही अभिनेता की तारीफ में वे शब्द निकल पड़े जिन्होंने इंटरनेट पर खलबली मचा दी है।
क्यों राजामौली ने फहाद फासिल को कहा 'नाग' और क्या थे उनके मायने?
जब एस.एस. राजामौली ने फहाद फासिल की तारीफ करते हुए उन्हें 'नाग' (Cobra/Snake) कहकर संबोधित किया, तो कई लोग पहली बार में चौंक गए कि इसका क्या मतलब हो सकता है। दरअसल, सिनेमाई संदर्भों और संवाद की भाषा में इस शब्द का उपयोग एक ऐसे बेहद खतरनाक, शांत लेकिन पैनी नजर रखने वाले और अपने शिकार को पल भर में सम्मोहित कर लेने वाले जीव या पात्र के लिए किया जाता है जो पर्दे पर अपनी स्क्रीन प्रेजेंस से दर्शकों को बांध लेता है। राजामौली का यह कहना था कि फहाद जब पर्दे पर नेगेटिव या ग्रे शेड वाले किरदार निभाते हैं, तो उनकी चाल-ढाल और आंखों का तीखापन एक नाग की तरह इतना सटीक और खतरनाक होता है कि दर्शक उनसे नफरत करने पर मजबूर हो जाते हैं, लेकिन साथ ही उनके अभिनय से अपनी नजरें नहीं हटा पाते। निर्देशक ने यह भी साझा किया कि उन्हें फहाद की इसी खूबी से प्यार है कि वे स्क्रीन पर जितने खूंखार नजर आते हैं, दर्शक उनके काम के उतने ही दीवाने हो जाते हैं। यह किसी भी अभिनेता के लिए सबसे बड़ा कॉम्प्लीमेंट है जब देश का नंबर वन डायरेक्टर उसके अभिनय के हर एक पैंतरे को इस गहराई से समझे।
भारतीय सिनेमा में पैन-इंडिया और क्षेत्रीय फिल्मों का बढ़ता आपसी मेल
राजामौली और फहाद फासिल जैसी प्रतिभाओं के बीच का यह संवाद इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि आज भारतीय सिनेमा अब अलग-अलग भाषाओं या इंडस्ट्रीज में नहीं बंटा है, बल्कि पूरा देश एक सिंगल सिनेमाई कम्युनिटी के रूप में उभर रहा है। दक्षिण भारत के निर्देशक जब मलयालम सिनेमा के बेहतरीन कलाकारों की तारीफ करते हैं और उनकी फिल्मों को सराहते हैं, तो इससे पूरे देश के दर्शकों को यह संदेश जाता है कि अच्छी कहानी और दमदार अभिनय की कोई भाषा या सीमा नहीं होती। 'आवेशम' जैसी फिल्मों की सफलता यह दिखाती है कि दर्शक अब लीक से हटकर कुछ नया और रॉ देखना चाहते हैं। राजामौली द्वारा फहाद फासिल की गई इस सराहना ने न केवल मलयालम फिल्म इंडस्ट्री का मान बढ़ाया है, बल्कि आने वाले समय में इन दोनों दिग्गजों के किसी संभावित सहयोग को लेकर भी फैंस के मन में उम्मीदों की नई किरण जगा दी है, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।