Sanjay Dutt: 'लोगों ने मेरे पिता के पतन का जश्न मनाया...' जेल के उन काले दिनों को याद कर छलका बेटी त्रिशला दत्त का दर्द, बयां की आपबीती

Sanjay Dutt: 'लोगों ने मेरे पिता के पतन का जश्न मनाया...' जेल के उन काले दिनों को याद कर छलका बेटी त्रिशला दत्त का दर्द, बयां की आपबीती

बॉलीवुड के 'बाबा' यानी संजय दत्त की जिंदगी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं रही है। उन्होंने अपने जीवन में अर्श से फर्श और फिर फर्श से अर्श तक का सफर देखा है। साल 1993 के मुंबई बम धमाकों के दौरान जब संजय दत्त का नाम प्रतिबंधित हथियार रखने के मामले में आया, तो पूरे देश में सनसनी फैल गई थी। इस केस की वजह से संजू बाबा को जेल की सलाखों के पीछे भी रहना पड़ा था। अब सालों बाद, संजय दत्त की बड़ी बेटी त्रिशला दत्त ने अपने पिता के उस सबसे काले दौर और जेल के दिनों को याद करते हुए एक ऐसा दर्द बयां किया है, जिसे सुनकर किसी की भी आंखें नम हो जाएं। उन्होंने बताया कि जब उनका परिवार बिखर रहा था, तब दुनिया उनके दर्द का तमाशा देख रही थी।

महज 5 साल की उम्र में झेला जिंदगी का सबसे बड़ा सदमा

एक मशहूर पॉडकास्ट 'इनसाइड थॉट्स आउट लाउड' में खुलकर बात करते हुए 38 वर्षीय त्रिशला दत्त ने अपने बचपन के उस दर्दनाक अनुभव को साझा किया। त्रिशला ने बताया कि जब उनके पिता संजय दत्त टाडा कोर्ट और जेल के चक्कर काट रहे थे, तब वह महज 5 साल की एक मासूम बच्ची थीं। त्रिशला ने कहा, "मेरे पिता ने बहुत कम उम्र में ड्रग्स की लत का सामना किया, फिर वह उससे बाहर निकले। इसके बाद उन्हें जेल जाना पड़ा, जहां उन्होंने लगभग तीन साल बिताए। मैं सोच भी नहीं सकती कि उस दौर में वह खुद मानसिक रूप से किस कदर टूटे होंगे और क्या महसूस कर रहे होंगे।"

जब पूरी दुनिया देख रही थी परिवार की तबाही का तमाशा

त्रिशला दत्त ने पॉडकास्ट में बताया कि जब आपका परिवार इस तरह की कानूनी और मानसिक मुसीबतों से गुजर रहा हो और पूरी दुनिया की नजरें आप पर टिकी हों, तो वह स्थिति बेहद खौफनाक होती है। उन्होंने कहा, "वह समय हमारे लिए बहुत ज्यादा मुश्किल था। मैं न्यूयॉर्क में थी और उनसे ठीक से बात भी नहीं कर पाती थी। अगर मैं कभी फोन करती भी थी, तो उनके आसपास हमेशा लोगों का हुजूम रहता था। जब दुनिया आपके हंसते-खेलते परिवार को बिखरता हुआ देखती है, तो उस दर्द को झेलना आसान नहीं होता। बहुत से लोग सिर्फ यह देखने के लिए मुझे घूरते थे कि इस सब पर मेरा रिएक्शन क्या होगा। लेकिन मैंने तय कर लिया था कि मुझे टूटकर बिखरना नहीं है, बल्कि अपने पिता के लिए एक मजबूत ढाल बनना है। मैं अपने पापा से कभी नाराज नहीं हुई।"

'बहुत से लोग मना रहे थे पिता के पतन का जश्न'

साक्षात्कार के दौरान त्रिशला का दर्द तब और गहरा हो गया जब उन्होंने समाज के दोगलेपन का जिक्र किया। त्रिशला ने बेहद भावुक होते हुए कहा, "मैंने उस दौर में सब कुछ देखा है और सब कुछ पढ़ा है। जब मेरे पिता अपने जीवन के सबसे खराब दौर से गुजर रहे थे, तो बहुत से लोग उनके पतन (Downfall) का जश्न मना रहे थे। लोग खुश थे कि वह वापस जेल जा रहे हैं क्योंकि हर किसी की अपनी एक राय थी।" त्रिशला ने यह भी स्वीकार किया कि इतनी कम उम्र में इस तरह का मानसिक ट्रॉमा झेलने के कारण स्कूल और समाज में उन्हें काफी बुली (प्रताड़ित) भी किया गया था, जिससे उबरने में उन्हें कई साल लग गए।

बेटी की कामयाबी पर गर्व महसूस करते हैं संजू बाबा

आज त्रिशला दत्त अमेरिका में एक सफल साइकोथैरेपिस्ट (Psychotherapist) के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। उन्होंने बताया कि भले ही उनके पिता ने सीधे तौर पर उनके बदलाव की तारीफ न की हो, लेकिन वह अक्सर जताते हैं कि उन्हें अपनी बेटी पर कितना नाज है। त्रिशला के मुताबिक, "पापा हमेशा मुझसे कहते हैं कि उन्हें मुझ पर बहुत गर्व है कि मैं इतने मुश्किल हालातों से निकलकर आज इस मुकाम तक पहुंची हूं। वह हमेशा मुझे अपने काम पर फोकस करने की सलाह देते हैं और कहते हैं कि लाइफ में चाहे जो हो जाए, वह हमेशा एक मजबूत दीवार की तरह मेरे पीछे खड़े हैं।"

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