भोजपुरी के असली 'पॉवर स्टार' पवन सिंह के ये 5 ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स, जिनके आस-पास भी नहीं भटक पाते खेसारी लाल यादव

भोजपुरी के असली 'पॉवर स्टार' पवन सिंह के ये 5 ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स, जिनके आस-पास भी नहीं भटक पाते खेसारी लाल यादव

भोजपुरी फिल्म और म्यूजिक इंडस्ट्री में जब भी किसी ऐसे ग्लोबल आइकॉन की बात होती है जिसने क्षेत्रीय सिनेमा के दायरे को तोड़कर सात समंदर पार अपनी पहचान बनाई है, तो जुबां पर सबसे पहला नाम पवन सिंह का आता है। अपने करोड़ों फैंस के बीच 'पॉवर स्टार' के नाम से मशहूर पवन सिंह सिर्फ एक बेमिसाल अभिनेता ही नहीं, बल्कि एक जादूई प्लेबैक सिंगर और बेहतरीन म्यूजिक कंपोजर भी हैं। बिहार के आरा जिले की मिट्टी से निकलकर दुनिया भर के दिलों पर राज करने वाले इस दिग्गज कलाकार ने अपने करियर में सफलता के वो झंडे गाड़े हैं, जो किसी भी अन्य भोजपुरी सुपरस्टार के लिए आज भी एक अधूरा ख्वाब हैं। आइए नजर डालते हैं पवन सिंह के उन बेजोड़ और ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स पर, जो उन्हें इस इंडस्ट्री का बेताज बादशाह बनाते हैं।

'लॉलीपॉप लागेलू' का ग्लोबल क्रेज और अरबों का डिजिटल साम्राज्य

पवन सिंह के करियर में साल 2008 एक ऐसा मील का पत्थर साबित हुआ, जिसने भोजपुरी संगीत का इतिहास ही बदल कर रख दिया। इसी साल उनका ब्लॉकबस्टर गाना ‘लॉलीपॉप लागेलू’ रिलीज हुआ था। इस गाने की दीवानगी का आलम यह था कि इसने न केवल पूरे भारत को झुमाया, बल्कि विदेशों में होने वाली शादियों और नाइट क्लबों तक में अपनी धाक जमाई। आज भी इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म्स पर यह गाना सबसे पॉपुलर भारतीय गानों में गिना जाता है। इसके अलावा डिजिटल स्ट्रीमिंग की बात करें तो स्पॉटिफाई, एप्पल म्यूजिक और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स पर पवन सिंह का एकछत्र राज है। उनके 'बवाल गाने' एल्बम और ‘छलकता हमरो जवनिया’ जैसे कल्ट गानों को दुनिया भर में अरबों बार देखा और सुना जा चुका है, जो एक अटूट रिकॉर्ड है।

बॉलीवुड में धाकड़ एंट्री और फिल्मफेयर का ऐतिहासिक नॉमिनेशन

आमतौर पर भोजपुरी स्टार्स को बॉलीवुड फिल्मों में छोटे-मोटे कैमियो या गानों में एक्टिंग करते देखा गया है, लेकिन बतौर लीड प्लेबैक सिंगर मुख्यधारा के हिंदी सिनेमा में धाक जमाना पवन सिंह की सबसे बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने बॉलीवुड की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘स्त्री 2’ के चार्टबस्टर गाने 'आई नहीं' और फिल्म 'विकी विद्या का वो वाला वीडियो' के सुपरहिट गाने 'चुम्मा' में अपनी शानदार आवाज देकर हिंदी बेल्ट में धूम मचा दी। इस बड़ी कामयाबी के बाद उन्होंने क्षेत्रीय सिनेमा की उस दीवार को भी तोड़ दिया जो पुरस्कारों के आड़े आती थी। फिल्म ‘स्त्री 2’ के गाने 'आई नहीं' के लिए पवन सिंह को प्रतिष्ठित फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में 'बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर' की कैटेगरी में नॉमिनेशन मिला। भोजपुरी संगीत के इतिहास में इस मुकाम तक पहुंचने वाले वह पहले और एकमात्र गायक हैं। इसके साथ ही उन्होंने इंटरनेशनल लेवल पर आयोजित होने वाले TOIFA में 'सॉन्ग ऑफ द ईयर' का अवॉर्ड भी अपने नाम किया है।

साउथ सिनेमा में धमाकेदार डेब्यू करने वाले पहले भोजपुरी गायक

पवन सिंह सिर्फ उत्तर भारत या बॉलीवुड तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने दक्षिण भारतीय सिनेमा (साउथ इंडस्ट्री) में भी अपनी आवाज का लोहा मनवाया है। भोजपुरी सिनेमा के इतिहास में वह पहले ऐसे इकलौते सुपरस्टार बन चुके हैं जिन्होंने सीधे साउथ फिल्म इंडस्ट्री में सिंगर के तौर पर एंट्री ली है। उन्होंने तेलुगू सिनेमा के जाने-माने स्टार अदीवी शेष की पैन-इंडिया फिल्म 'डकैत' के हाई-एनर्जी गाने 'टच बडी' के लिए प्लेबैक सिंगिंग की है। यह प्रयोग न केवल सफल रहा बल्कि इसने साबित कर दिया कि पवन सिंह की आवाज की पहुंच किसी एक भाषा या क्षेत्र तक सीमित नहीं है।

गायकी के बाद अभिनय की दुनिया में भी लगातार दी ब्लॉकबस्टर फिल्में

संगीत की दुनिया में अपनी बादशाहत कायम करने के बाद पवन सिंह ने साल 2007 में अभिनय की दुनिया में कदम रखा। उनकी पहली डेब्यू फिल्म ‘रंगली चुनरिया तोहरे नाम’ थी, जिसने बॉक्स ऑफिस पर बेहतरीन प्रदर्शन किया। इसके बाद पवन सिंह ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने ‘प्रतिज्ञा’, 'सत्या', 'क्रैक फाइटर', 'शेर सिंह', 'मां तुझे सलाम' और 'हर हर गंगे' जैसी एक से बढ़कर एक सुपरहिट और ब्लॉकबस्टर फिल्में देकर खुद को भोजपुरी बॉक्स ऑफिस का सबसे भरोसेमंद अभिनेता साबित किया। अभिनय और गायकी का यह डेडली कॉम्बिनेशन उन्हें अपने समकालीन कलाकारों जैसे खेसारी लाल यादव से काफी आगे ले जाता है।

उतार-चढ़ाव से भरी निजी जिंदगी और विवादों का नाता

पवन सिंह की प्रोफेशनल लाइफ जितनी चमकदार रही है, उनकी पर्सनल लाइफ उतनी ही विवादों और दुखों से घिरी रही है। साल 2014 में उन्होंने नीलम सिंह से शादी की थी, लेकिन शादी के कुछ ही समय बाद नीलम ने मुंबई में आत्महत्या कर ली, जिससे पवन सिंह को गहरा सदमा लगा। इसके बाद साल 2018 में उन्होंने ज्योति सिंह के साथ अपनी दूसरी पारी की शुरुआत की। हालांकि, वक्त के साथ इस रिश्ते में भी दरार आ गई और दोनों के बीच का यह पारिवारिक विवाद कोर्ट की दहलीज तक पहुंच गया, जो आज भी सुर्खियों में बना रहता है।

सियासत का गलियारा: बीजेपी से बगावत, निर्दलीय चुनाव और घर वापसी

फिल्मी पर्दे के साथ-साथ पवन सिंह ने राजनीति के अखाड़े में भी अपनी किस्मत आजमाई है। वह लंबे समय तक भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सक्रिय सदस्य रहे। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें पश्चिम बंगाल की आसनसोल सीट से उम्मीदवार घोषित किया था, लेकिन कुछ स्थानीय और राजनीतिक विवादों के चलते उन्होंने वहां से चुनाव लड़ने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने बगावती तेवर अपनाते हुए बिहार की काराकाट लोकसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पर्चा दाखिल किया। इस त्रिकोणीय और कड़े मुकाबले में उन्हें जीत तो नहीं मिली, लेकिन वह दूसरे स्थान पर रहकर अपनी राजनीतिक ताकत का अहसास कराने में सफल रहे। चुनावी उतार-चढ़ाव के बाद साल 2025 में पवन सिंह ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया और अपनी राजनीतिक पारी को आगे बढ़ा रहे हैं।

 

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