'तू चीज बड़ी है मस्त...' गाने वाली मशहूर सिंगर अब कहां हैं? 41 की उम्र में रचाई शादी, पति पर लगे घटिया आरोपों पर तोड़ी थी चुप्पी

'तू चीज बड़ी है मस्त...' गाने वाली मशहूर सिंगर अब कहां हैं? 41 की उम्र में रचाई शादी, पति पर लगे घटिया आरोपों पर तोड़ी थी चुप्पी

'तुमसे मिलकर ना जाने क्यों', 'बोले चूड़ियां', 'हवा हवाई' और 'डोला रे डोला' जैसे सुपरहिट गानों से 90 के दशक में हर दिल पर राज करने वाली सुरों की मल्लिका कविता कृष्णमूर्ति (Kavita Krishnamurthy) की आवाज आज भी लोगों के कानों में रस घोलती है। हालांकि, आज के दौर की चकाचौंध में हिंदी फिल्मों के गानों से वह थोड़ी दूर जरूर हो गई हैं, लेकिन आज भी देश-विदेश के बड़े म्यूजिक कॉन्सर्ट्स और लाइव शोज में उनका जलवा कायम है। सुरों की इस जादूगरनी की प्रोफेशनल लाइफ जितनी शानदार रही, उनकी पर्सनल लाइफ और बॉलीवुड में एंट्री का सफर उतना ही दिलचस्प और उतार-चढ़ाव भरा रहा। आइए जानते हैं उनकी जिंदगी का वो सच जिसे बहुत कम लोग जानते हैं।

कभी सिंगर नहीं बनना चाहती थीं कविता, एक पड़ोसन ने बदला भाग्य

यह बात बेहद हैरान करने वाली है कि 5 हजार से ज्यादा गानों को अपनी आवाज देने वाली कविता कृष्णमूर्ति बचपन में कभी सिंगर बनने का सपना नहीं देखती थीं। उनकी किस्मत का रुख तब बदला जब उनके पड़ोस में रहने वाली एक बंगाली आंटी ने उनके भीतर छुपे संगीत के टैलेंट को पहचाना। उन्हीं के कहने पर कविता ने बाकायदा क्लासिकल म्यूजिक की शिक्षा लेनी शुरू की। धीरे-धीरे वह स्थानीय प्रोग्राम्स में हिस्सा लेने लगीं और इसी दौरान संगीत की दुनिया के दिग्गज मन्ना डे की नजर उन पर पड़ी, जिसके बाद वह उनके स्टेज शोज में नजर आने लगीं।

डबिंग आर्टिस्ट के तौर पर की शुरुआत, लता-आशा के लिए गाती थीं डमी गाने

साल 1970 में कविता कृष्णमूर्ति ने फिल्म इंडस्ट्री में कदम तो रखा, लेकिन एक सिंगर के तौर पर नहीं बल्कि एक डबिंग आर्टिस्ट के रूप में। उस दौर में जब कोई गाना लता मंगेशकर या आशा भोसले जैसी सीनियर सिंगर्स के लिए तय होता था, तो उनकी गैरमौजूदगी में फिल्म की शूटिंग के लिए कविता से वह गाना रिकॉर्ड करवाया जाता था ताकि शूटिंग न रुके। बाद में जब बड़ी सिंगर्स अपनी डेट्स के हिसाब से गाना गातीं, तो कविता की आवाज को फिल्म से रिप्लेस कर दिया जाता था।

जब तंग आकर लिया बड़ा फैसला और ये गाना बना करियर का टर्निंग पॉइंट

लगातार डमी गाने गाने की वजह से इंडस्ट्री के लोग कविता को सिर्फ एक डबिंग आर्टिस्ट के तौर पर ही देखने लगे थे। इस बात से परेशान होकर आखिरकार कविता ने कड़ा स्टैंड लिया और साफ कह दिया कि वह डबिंग नहीं, बल्कि एक इंडिपेंडेंट सिंगर बनना चाहती हैं। साल 1976 में उन्हें फिल्म 'काहे को ब्याही विदेश' में पहला ब्रेक मिला। इसके बाद साल 1985 में आया गाना 'तुमसे मिलकर ना जाने क्यों' उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ और उन्होंने इंडस्ट्री में अपनी एक अलग पहचान स्थापित कर ली।

'हवा हवाई' से 'डोला रे डोला' तक, दिए बैक-टू-बैक चार्टबस्टर गाने

फिल्म 'मिस्टर इंडिया' के गाने 'हवा हवाई' की जबरदस्त कामयाबी के बाद कविता कृष्णमूर्ति बॉलीवुड की टॉप सिंगर्स की लिस्ट में शुमार हो गईं। इसके बाद उन्होंने 'प्यार हुआ चुपके से', 'तू चीज बड़ी है मस्त-मस्त', 'नींबूड़ा-नींबूड़ा' और 'डोला रे डोला' जैसे अनगिनत ब्लॉकबस्टर गाने गाकर इंडस्ट्री में अपने टैलेंट का लोहा मनवाया। उन्होंने कई भारतीय भाषाओं में गाने गाए और फिल्मफेयर सहित देश के कई प्रतिष्ठित अवॉर्ड्स अपने नाम किए।

41 साल की उम्र में लिया शादी का फैसला और बनीं पति की ढाल

करियर में नाम कमाने के बीच कविता कृष्णमूर्ति ने कभी शादी न करने का मन बना लिया था। लेकिन जिंदगी को कुछ और ही मंजूर था। काम के सिलसिले में उनकी मुलाकात मशहूर वॉयलन वादक एल सुब्रमण्यम से हुई। सुब्रमण्यम की पहली पत्नी का निधन कैंसर से हो चुका था और वह अकेले ही अपने चार बच्चों की परवरिश कर रहे थे। मुलाकातों का सिलसिला बढ़ा तो दोनों एक-दूसरे के करीब आ गए और आखिरकार 41 साल की उम्र में कविता ने उनसे शादी कर ली। शादी के बाद उनकी निजी जिंदगी में तब बड़ा तूफान आया जब उनके पति पर घरेलू नौकरानी द्वारा बेहद घटिया और संगीन आरोप लगाए गए। उस मुश्किल वक्त में कविता अपने पति के साथ चट्टान की तरह खड़ी रहीं, उन्होंने इन आरोपों को पूरी तरह झूठा और बेबुनियाद बताते हुए अपने पति का डटकर समर्थन किया और उन्हें इस विवाद से बाहर निकाला। आज वह अपने परिवार के साथ एक खुशहाल जिंदगी बिता रही हैं।

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