नई मां की समस्या जान डॉक्टर ने बताया आखिर क्यों होती है यह दिक्कत
मां बनना दुनिया का सबसे खूबसूरत और सुखद अहसास माना जाता है, लेकिन इस नौ महीने की खूबसूरत यात्रा और प्रसव (Delivery) के बाद महिलाओं के शरीर में कई ऐसे शारीरिक और हार्मोनल बदलाव आते हैं जिनके बारे में खुलकर बात करना आज भी हमारे समाज में संकोच का विषय माना जाता है। प्रसव के बाद जब नई मां अपने नवजात शिशु की देखभाल में व्यस्त होती है, तो कई बार उसे अपने ही शरीर में कुछ ऐसे अजीब और असहज बदलाव महसूस होते हैं जो उसे अंदर से डरा देते हैं। ऐसी ही एक बेहद आम लेकिन बेहद संवेदनशील समस्या है—खांसते, छींकते, हंसते या थोड़ा सा भी वजन उठाते वक्त यूरिन (पेशाब) का लीक हो जाना। चिकित्सा विज्ञान की भाषा में इसे 'यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस' (Urinary Incontinence) कहा जाता है। हाल ही में कई महिलाओं ने जब इस निजी और शर्मनाक समस्या को स्त्री रोग विशेषज्ञों (Gynecologists) के सामने रखा, तो डॉक्टरों ने विस्तार से समझाया कि यह दिक्कत अचानक क्यों पैदा होती है और इसके पीछे शरीर की कौन सी आंतरिक बनावट जिम्मेदार होती है। आज हम इसी महत्वपूर्ण विषय पर विस्तार से चर्चा करेंगे ताकि नई माताओं को यह समझ आ सके कि वे अकेली नहीं हैं और इस समस्या का वैज्ञानिक समाधान क्या है।
प्रेगनेंसी और नॉर्मल डिलीवरी के दौरान पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों पर पड़ने वाला भारी दबाव
महिला का शरीर गर्भधारण के दौरान नौ महीने तक लगातार कई प्रकार के शारीरिक बदलावों से गुजरता है। गर्भाशय (Uterus) का आकार जैसे-जैसे बढ़ता है, वैसे-वैसे पेल्विक फ्लोर यानी पेट के निचले हिस्से और श्रोणि क्षेत्र की मांसपेशियों पर बच्चे का पूरा वजन और दबाव पड़ने लगता है। ये पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां एक झूले या मज़बूत ट्रैम्पोलिन की तरह काम करती हैं जो मूत्राशय (Bladder), गर्भाशय और आंतों को अपनी सही जगह पर थाम कर रखती हैं और यूरिन के बहाव को नियंत्रित करने वाले वॉल्व को सहारा देती हैं। जब महिला की नॉर्मल डिलीवरी (Vaginal Delivery) होती है, तो उस दौरान इन मांसपेशियों और ऊतकों पर अत्यधिक खिंचाव और दबाव पड़ता है, जिसके कारण वे कमजोर या ढीली पड़ जाती हैं। कई बार प्रसव के दौरान पेल्विक क्षेत्र की नसों को भी हल्का नुकसान पहुंचता है, जिससे मस्तिष्क और मूत्राशय के बीच का वह तालमेल कुछ समय के लिए गड़बड़ा जाता है जो पेशाब रोकने में मदद करता है। यही कारण है कि जब नई मां खांसती है, जोर से हंसती है, सीढ़ियां चढ़ती है या अचानक कोई झटका लगता है, तो मूत्राशय पर पड़ने वाले दबाव के कारण अनैच्छिक रूप से यूरिन लीक हो जाता है।
हार्मोनल बदलाव और सिजेरियन डिलीवरी के मामलों में भी क्यों उभरती है यह समस्या
यह गलतफहमी अक्सर लोगों के मन में होती है कि यूरिन लीक होने की यह समस्या केवल नॉर्मल डिलीवरी कराने वाली महिलाओं को ही होती है, जबकि डॉक्टरों का कहना है कि सिजेरियन डिलीवरी (C-Section) करवाने वाली कई महिलाओं में भी यह परेशानी देखी गई है। इसका मुख्य कारण प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में निकलने वाले हॉर्मोन्स जैसे रिलैक्सिन (Relaxin) होते हैं, जो प्रसव को आसान बनाने के लिए शरीर के सभी जोड़ों और मांसपेशियों को ढीला कर देते हैं। इसके अलावा, गर्भ में पल रहे बच्चे का वजन पूरे नौ महीने तक पेल्विक अंगों पर लगातार दबाव बनाता रहता है, चाहे अंत में डिलीवरी किसी भी माध्यम से क्यों न हो। उम्र का बढ़ना, अत्यधिक वजन (Obesity), पुरानी कब्ज की समस्या जिसके कारण पेट पर जोर लगाना पड़ता है, या फिर बार-बार गर्भधारण करना भी इन मांसपेशियों को और अधिक कमजोर कर देता है। कई महिलाओं में यह समस्या डिलीवरी के कुछ हफ्तों या महीनों के भीतर अपने आप ठीक हो जाती है क्योंकि शरीर की मांसपेशियां खुद को दोबारा रिकवर कर लेती हैं, लेकिन कुछ मामलों में यह लंबे समय तक बनी रह सकती है और महिला के आत्मविश्वास तथा मानसिक स्वास्थ्य को गहराई से प्रभावित करने लगती है।
इस समस्या से निजात पाने के लिए केगेल एक्सरसाइज और डॉक्टर की सलाह का महत्व
यदि आप या आपके परिवार की कोई नई मां इस प्रकार की यूरिन लीकेज की समस्या से जूझ रही है, तो सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि इसमें घबराने या शर्मिंदा होने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह एक चिकित्सीय स्थिति है जिसका पूरी तरह से इलाज संभव है। स्त्री रोग विशेषज्ञ इस समस्या से निपटने के लिए सबसे पहले 'केगेल एक्सरसाइज' (Kegel Exercises) करने की जोरदार सलाह देते हैं। केगेल व्यायाम एक ऐसा आसान और असरदार तरीका है जिसे कोई भी महिला घर बैठे, लेटे हुए या बैठे-बैठे आसानी से कर सकती है, और इससे पेल्विक फ्लोर की ढीली पड़ी मांसपेशियां दोबारा मजबूत हो जाती हैं। इस एक्सरसाइज में मूत्राशय और यूरिथ्रा के आसपास की मांसपेशियों को कुछ सेकंड के लिए वैसे ही सिकोड़ा जाता है जैसे पेशाब के वेग को रोकने की कोशिश की जाती है, और फिर छोड़ दिया जाता है। इसके अलावा, अपने पानी पीने के तरीके में सुधार करना, अत्यधिक कैफीन या कार्बोनेटेड ड्रिंक्स से बचना, और अपने शरीर के वजन को नियंत्रित रखना भी इस परेशानी को दूर करने में बहुत मददगार साबित होता है। यदि समस्या बहुत अधिक गंभीर है और घरेलू अभ्यासों से सुधार नहीं हो रहा है, तो किसी अच्छे यूरोगाइनेकोलॉजिस्ट से मिलकर फिजियोथैरेपी या अन्य चिकित्सीय परामर्श अवश्य लेना चाहिए ताकि आप बिना किसी संकोच के एक स्वस्थ और खुशहाल मातृत्व जीवन का आनंद उठा सकें।