खट्टी डकार और सीने में जलन से हैं परेशान, समझें शरीर में पित्त बढ़ने के ये 7 डरावने संकेत, आयुर्वेद से मिनटों में बॉडी को करें कूल
जैसे-जैसे गर्मी का पारा चढ़ता है, वैसे-वैसे हमारे शरीर के भीतर भी कई तरह के बदलाव होने लगते हैं। इस मौसम में अक्सर लोग पेट की गड़बड़ी, सीने में जलन और त्वचा पर दानों की शिकायत करते हैं। कई बार हम इसे सामान्य गर्मी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन आयुर्वेद के नजरिए से देखें तो यह शरीर में पित्त दोष बढ़ने के साफ संकेत हैं। आयुर्वेद के अनुसार हमारा शरीर वात, पित्त और कफ जैसे तीन स्तंभों पर टिका है। जब शरीर में इन तीनों का संतुलन बिगड़ता है, तो बीमारियां हमें घेरने लगती हैं। चूंकि पित्त का सीधा संबंध अग्नि और गर्मी से है, इसलिए इस मौसम में इसका प्रकोप सबसे ज्यादा देखने को मिलता है। अगर आपकी बॉडी में भी कुछ खास लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो समझ जाएं कि अब आपको अपनी जीवनशैली में बदलाव करने की सख्त जरूरत है।
इन शुरुआती लक्षणों से पहचानें कि आपके शरीर में बढ़ गया है पित्त
जब शरीर के भीतर पित्त की मात्रा जरूरत से ज्यादा बढ़ जाती है, तो बॉडी हमें कई तरह के सिग्नल्स देना शुरू कर देती है। इन शुरुआती लक्षणों को पहचानकर आप समय रहते गंभीर बीमारियों से बच सकते हैं। पित्त बढ़ने पर सबसे पहले सीने में तेज जलन (एसिडिटी) महसूस होने लगती है और बार-बार खट्टी डकारें आने लगती हैं। इसके अलावा त्वचा पर लाल रंग के रैशेज, खुजली वाले छोटे-छोटे चकत्ते और चेहरे पर फोड़े-फुंसियां निकलने लगती हैं। इतना ही नहीं, आंखों में हर वक्त लालिमा और जलन बनी रहती है, मुंह का स्वाद अक्सर कड़वा या खट्टा रहता है और सिर में अचानक तेज दर्द की शिकायत होने लगती है। यह सारे लक्षण साफ बताते हैं कि आपके शरीर को तुरंत अंदरूनी ठंडक की जरूरत है।
क्या खाएं और किन चीजों से तुरंत बना लें दूरी: जानिए सही डाइट चार्ट
शरीर में पित्त की अधिकता को नियंत्रित करने के लिए सबसे पहला और जरूरी कदम है आपके खानपान में सुधार। जब शरीर में गर्मी बढ़ी हो, तो अपनी दैनिक डाइट में मीठे रस वाले ताजे फलों को जरूर शामिल करें। इसके साथ ही कड़वे रस वाली सब्जियां जैसे करेला, लौकी, तुरई, परवल और खीरा खाना बेहद फायदेमंद होता है। नारियल पानी, मिश्री और गुलकंद का नियमित सेवन शरीर की गर्मी को सोख लेता है। फलों में पका हुआ केला, अनार और मीठे अंगूर खाने से पित्त शांत होता है। इसके अलावा दूध और शुद्ध देसी घी को भी अपनी डाइट का हिस्सा बनाएं।
वहीं दूसरी ओर, कुछ ऐसी चीजें भी हैं जिन्हें भूलकर भी नहीं खाना चाहिए। पित्त के मरीजों को गर्मियों में ज्यादा तीखे, अत्यधिक खट्टे और बहुत ज्यादा नमक वाले भोजन से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। नमक शरीर के जरूरी पानी को सोख लेता है, जिससे डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा गहरे तले-भुने खाद्य पदार्थ और रात के समय दही खाने की गलती तो बिल्कुल भी न करें, क्योंकि यह शरीर में एसिड की मात्रा को और बढ़ा देते हैं।
बढ़े हुए पित्त और त्वचा की समस्याओं के लिए आजमाएं 'अभ्यंग' थेरेपी
अगर पित्त बढ़ने की वजह से आपकी त्वचा पर लाल धब्बे, रैशेज या चकत्ते हो गए हैं, तो आयुर्वेद में इसका एक बेहद असरदार इलाज बताया गया है जिसे 'अभ्यंग' यानी ठंडे तेल की मालिश कहा जाता है। इसके लिए आप शुद्ध नारियल का तेल या फिर चंदन मिश्रित तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। रात को सोने से पहले इस तेल से अपने पैरों के तलवों, नाभि और सिर पर हल्के हाथों से मालिश करें। ऐसा करने से शरीर की नसें शांत होती हैं, बॉडी को गहरी रिलैक्सेशन मिलती है, अनिद्रा की समस्या दूर होकर गहरी नींद आती है और त्वचा की जलन भी पूरी तरह ठीक हो जाती है।
शीतली प्राणायाम: शरीर को अंदर से एसी जैसा ठंडा कर देगा यह योगासन
खानपान और मालिश के अलावा आप एक बेहद आसान योगासन के जरिए अपनी बॉडी को अंदर से पूरी तरह कूल कर सकते हैं, जिसे 'शीतली प्राणायाम' कहा जाता है। इसे करने का तरीका बेहद सरल है। सबसे पहले किसी शांत जगह पर आराम से बैठ जाएं और अपनी जीभ को बाहर निकालकर एक खोखली नली या पाइप की तरह मोड़ लें। अब इसी मुड़ी हुई जीभ के रास्ते मुंह से एक लंबी और गहरी सांस अंदर की तरफ खींचें। सांस लेने के बाद कुछ सेकंड के लिए अपनी सांस को अंदर ही रोककर रखें और फिर मुंह बंद करके नाक के जरिए धीरे-धीरे सांस को बाहर छोड़ दें। रोजाना सुबह और शाम इस प्राणायाम का कम से कम 10 बार अभ्यास करें। यह आपकी बॉडी के इंटरनल टेम्परेचर को तुरंत कम करने और बढ़े हुए पित्त को शांत करने का सबसे अचूक प्राकृतिक उपाय है।