डायबिटीज के इस खतरनाक लक्षण 'हाइपरफैगिया' में लगती है बार-बार तेज भूख

डायबिटीज के इस खतरनाक लक्षण 'हाइपरफैगिया' में लगती है बार-बार तेज भूख

आज के भागदौड़ भरे और तनावपूर्ण जीवनशैली में मधुमेह यानी डायबिटीज एक ऐसी गंभीर और लाइलाज बीमारी बन चुकी है, जो दुनिया भर के करोड़ों लोगों को अपनी चपेट में ले चुकी है। जब कोई व्यक्ति डायबिटीज का शिकार होता है, तो उसका पूरा शरीर इंसुलिन (Insulin) के असंतुलन के कारण ऊर्जा के उत्पादन में संघर्ष करने लगता है। आमतौर पर लोग यह सोचते हैं कि डायबिटीज का मतलब केवल शरीर में ब्लड शुगर का स्तर बढ़ना है, लेकिन इसके साथ कई अन्य छिपे हुए और खतरनाक लक्षण भी जुड़े होते हैं, जिनके बारे में आम जनता को जानकारी नहीं होती है। ऐसा ही एक बेहद चौंकाने वाला और मेडिकल रूप से गंभीर लक्षण है 'डायबिटिक हाइपरफैगिया' (Diabetic Hyperphagia), जिसमें मरीज को दिन भर लगातार और अत्यधिक मात्रा में भूख लगती रहती है, बावजूद इसके कि वह भरपेट भोजन कर रहा होता है। आइए मेडिकल साइंस और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि डायबिटिक हाइपरफैगिया क्या है, यह क्यों होता है और इससे कैसे बचा जा सकता है।

क्या है डायबिटिक हाइपरफैगिया और क्यों लगती है बार-बार तेज भूख?

चिकित्सकीय भाषा में 'हाइपरफैगिया' का मतलब अत्यधिक खाने की वह स्थिति है जिसमें सामान्य से कई गुना अधिक भूख लगती है। जब यह स्थिति डायबिटीज के रोगियों में देखी जाती है, तो इसे डायबिटिक हाइपरफैगिया कहा जाता है। इस बीमारी का सबसे मुख्य कारण यह होता है कि जब किसी व्यक्ति का ब्लड शुगर लेवल अनियंत्रित हो जाता है, तो शरीर की कोशिकाओं (Cells) तक ग्लूकोज नहीं पहुंच पाता है। हमारे शरीर की हर एक कोशिका को कार्य करने के लिए ग्लूकोज यानी ऊर्जा की आवश्यकता होती है, लेकिन जब इंसुलिन सही से काम नहीं करता, तो ग्लूकोज खून में ही घूमता रहता है और कोशिकाओं को भूखा रहना पड़ता है। कोशिकाएं जब ऊर्जा के लिए तरसती हैं, तो वे मस्तिष्क को लगातार यह संकेत भेजती हैं कि शरीर को भोजन की आवश्यकता है, जिसके परिणामस्वरूप मरीज को हर कुछ देर बाद तेज भूख का अहसास होने लगता है।

खा रहे हैं भरपूर मगर शरीर को क्यों नहीं मिल रही है एनर्जी?

मधुमेह के इस विशेष चरण में सबसे विरोधाभासी बात यह होती है कि मरीज सामान्य दिनों से ज्यादा खाना खाने लगता है, लेकिन इसके बावजूद उसके शरीर में ऊर्जा की भारी कमी बनी रहती है। लोग अक्सर यह सोचते हैं कि ज्यादा खाने से कमजोरी दूर हो जाएगी, लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत होती है। चूंकि खाया गया भोजन ग्लूकोज में बदलकर कोशिकाओं तक नहीं पहुंच पाता है, इसलिए शरीर मजबूर होकर अपनी ऊर्जा की जरूरत को पूरा करने के लिए मांसपेशियों और फैट को तोड़ना शुरू कर देता है। यही कारण है कि हाइपरफैगिया से पीड़ित व्यक्ति का वजन अचानक तेजी से गिरने लगता है, उसे हमेशा थकान, कमजोरी, सुस्ती और चक्कर आने की शिकायत रहती है। यह स्थिति इस बात का स्पष्ट संकेत होती है कि रोगी का ब्लड शुगर लेवल पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर हो चुका है और उसे तुरंत किसी अच्छे डॉक्टर से परामर्श लेने की आवश्यकता है।

अनियंत्रित ब्लड शुगर और शरीर के मेटाबॉलिज्म पर इसका गंभीर असर

डायबिटिक हाइपरफैगिया केवल बार-बार भूख लगने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर के पूरे मेटाबॉलिज्म (Metabolism) को तबाह कर देता है। जब अग्नाशय (Pancreas) पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन बंद कर देता है या शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति प्रतिरोधक (Insulin Resistance) हो जाती हैं, तो शरीर के अंदर एक दुष्चक्र शुरू हो जाता है। मरीज जितना ज्यादा कार्बोहाइड्रेट या मीठा खाता है, उसका ब्लड शुगर उतना ही तेजी से ऊपर जाता है, और कोशिकाएं भूखी की भूखी रह जाती हैं। इस प्रकार शरीर के अंदर भोजन होने के बावजूद भुखमरी जैसी स्थिति बन जाती है। यदि समय रहते इस समस्या की पहचान करके इंसुलिन थेरेपी या उचित दवाओं के जरिए ब्लड शुगर को कंट्रोल नहीं किया गया, तो यह स्थिति किडनी फेलियर, नर्व डैमेज (Neuropathy), आंखों की रोशनी कमजोर होने और हृदय रोग जैसी घातक समस्याओं को न्योता दे सकती है।

डायबिटिक हाइपरफैगिया से निपटने के लिए जरूरी सावधानियां और उपचार

इस गंभीर चिकित्सीय स्थिति से बचने और अपने स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए सबसे पहली और महत्वपूर्ण शर्त यह है कि आप अपने ब्लड शुगर के स्तर को कड़ाई से नियंत्रित रखें। इसके लिए अपने डॉक्टर की सलाह के बिना खानपान में लापरवाही न बरतें और भोजन में फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों, हरी पत्तेदार सब्जियों, साबुत अनाज और प्रोटीन को शामिल करें, जो धीरे-धीरे पचते हैं और लंबे समय तक पेट भरा होने का अहसास कराते हैं। रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, चीनी, पैकेज्ड फूड और जंक फूड से पूरी तरह तौबा कर लें, क्योंकि ये चीजें ब्लड शुगर को अचानक आसमान पर पहुंचा देती हैं। नियमित रूप से योग, पैदल चलना और हल्की एक्सरसाइज करना इंसुलिन की कार्यक्षमता को सुधारने में मदद करता है। अपने शरीर के संकेतों को पहचानें और यदि आपको भी लगातार अत्यधिक भूख लगने के साथ कमजोरी महसूस हो रही है, तो इसे सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज बिल्कुल न करें और तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से अपनी जांच कराएं।