Monday Bloating: क्या आपको भी हर सोमवार महसूस होता है पेट में भारीपन और गैस? डॉक्टरों ने बताया वीकेंड की किन गलतियों से बिगड़ता है आपका डाइजेशन
अक्सर देखा जाता है कि लोग सोमवार की सुबह उठते ही पेट फूलने (Bloating), भारीपन, गैस और अजीब सी बेचैनी की शिकायत करते हैं। कई लोग इसे कामकाजी सप्ताह की शुरुआत का तनाव या एक सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों और डॉक्टरों की मानें, तो सोमवार सुबह होने वाली इस शारीरिक परेशानी का सीधा कनेक्शन आपके सप्ताहांत (वीकेंड) के रूटीन और खान-पान से जुड़ा हुआ है। शनिवार और रविवार की छुट्टी के दौरान हमारी जीवनशैली में आने वाले अचानक बदलावों पर हमारा पाचन तंत्र बहुत तेजी से और नकारात्मक प्रतिक्रिया देता है, जिसका खामियाजा हमें सोमवार को भुगतना पड़ता है।
वीकेंड पर बाहर का मसालेदार खाना और तेल बढ़ाता है पाचन तंत्र की मुसीबत
कैलाश दीपक अस्पताल की मशहूर सलाहकार चिकित्सक डॉ. मानसी निगम ने इस समस्या पर विस्तार से बात करते हुए बताया कि वीकेंड पर लोगों की खान-पान की आदतें उनके वर्किंग डेज (सोमवार से शुक्रवार) की नियमित दिनचर्या से पूरी तरह अलग हो जाती हैं। छुट्टियों के मूड में लोग अक्सर भारी भोजन, मैदा, तले-भुने खाद्य पदार्थ, कोल्ड ड्रिंक्स, ज्यादा मीठी चीजें और शराब का सेवन अनियंत्रित मात्रा में करते हैं। रेस्तरां और कैफे के खाने में घर के बने शुद्ध भोजन की तुलना में तेल, नमक, प्रिजर्वेटिव्स और तीखे मसालों की मात्रा काफी अधिक होती है। ऐसे में हमारे संवेदनशील पाचन तंत्र को इस भारी-भरकम भोजन को पचाने के लिए सामान्य से दोगुनी मेहनत करनी पड़ती है, जो अंततः अपच और गैस का रूप ले लेती है।
अनियमित समय पर खाना और अचानक ओवरईटिंग करने से पेट पर पड़ता है अतिरिक्त दबाव
डॉ. निगम के मुताबिक, वीकेंड के बाद होने वाली अपच हमेशा किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होती, बल्कि यह मुख्य रूप से खराब रूटीन का नतीजा है। अधिक मात्रा में भोजन करने या गलत कॉम्बिनेशन खाने से पेट फूलना, खट्टी डकारें आना, एसिडिटी, मतली और पेट का अत्यधिक भरा हुआ महसूस होना बेहद आम लक्षण हैं। इस समस्या को सबसे ज्यादा बढ़ावा देता है भोजन का अनियमित समय। सप्ताहांत में लोग अक्सर सुबह का नाश्ता या दोपहर का खाना छोड़ देते हैं या बहुत देर से खाते हैं, और फिर अचानक देर रात को भारी मात्रा में ओवरईटिंग (ज्यादा खाना) कर लेते हैं। भोजन के इस असंतुलन से पेट और आंतों की दीवारों पर अचानक अतिरिक्त दबाव पड़ता है जिससे पाचन क्रिया बुरी तरह धीमी हो जाती है।
गर्मी का मौसम और पानी की कमी: आंतों के गुड बैक्टीरिया का बिगड़ जाता है संतुलन
स्वास्थ्य संस्थान 'लिवलाइवली' के संस्थापक प्रांशुल अग्रवाल ने इस बात पर विशेष प्रकाश डाला कि वीकेंड की ये अस्वस्थ आदतें हमारे पेट के 'गट माइक्रोबायोम' (Gut Microbiome) को अस्थाई रूप से पूरी तरह तहस-नहस कर देती हैं। माइक्रोबायोम वास्तव में हमारी आंतों में रहने वाले उन लाभकारी बैक्टीरिया का समुदाय है जो भोजन को पचाने, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और पेट को दुरुस्त रखने का काम करते हैं।
अग्रवाल के अनुसार, बाहर का अनहेल्दी फूड, पर्याप्त नींद न लेना और पानी की कमी (निर्जलीकरण) सीधे इन गुड बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचाती है। खासकर गर्मी के मौसम में यह समस्या और भी ज्यादा गंभीर रूप ले लेती है। तेज गर्मी के कारण शरीर में डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है, जिससे पाचन रस सूखने लगते हैं और मामूली निर्जलीकरण भी मेटाबॉलिज्म को सुस्त कर देता है। इसके अलावा, गर्मी में बाहर रखा हुआ खाना बहुत जल्दी खराब हो जाता है, जिससे बैक्टीरिया पनपने लगते हैं और फूड पॉइजनिंग, दस्त या पेट में भयंकर इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। रेस्तरां के खाने में फाइबर की मात्रा न के बराबर होती है, जबकि प्रोसेस्ड इंग्रीडिएंट्स और कैफीन अधिक होते हैं, जो एसिडिटी को ट्रिगर करते हैं।
एक्सपर्ट टिप्स: इन छोटी-छोटी आसान आदतों से हमेशा दुरुस्त रहेगा आपका पेट
विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि वीकेंड के बाद होने वाली यह असुविधा अस्थाई होती है और कुछ दिनों में खुद ठीक हो जाती है, लेकिन अगर आप कुछ बुनियादी बातों का ध्यान रखें तो इससे पूरी तरह बच सकते हैं। पेट के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए डॉ. मानसी निगम की सलाह बेहद व्यावहारिक और सीधी है। उनका कहना है कि आप वीकेंड पर अपनी छुट्टियों और घूमने-फिरने का पूरा आनंद लें, लेकिन अपनी डाइट में एक जरूरी संतुलन जरूर बनाकर रखें।
इसके लिए हमेशा भोजन कम और नियंत्रित मात्रा में करें। दिन भर में भरपूर मात्रा में पानी पीते रहें ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे। वीकेंड पर भी देर रात को भारी भोजन करने से पूरी तरह बचें और दिन के समय अपने आहार में सलाद, फल और छाछ जैसे फाइबर व प्रोबायोटिक्स से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करें। आंतों के स्वास्थ्य को बेहतर रखने के लिए केवल समस्या होने पर ही ध्यान न दें, बल्कि रोजाना पर्याप्त पानी पीने और सचेत होकर खाने (माइंडफुल ईटिंग) की आदत डालें। यह छोटी सी सजगता आपको दीर्घकालिक रूप से पेट की हर बीमारी से दूर रखेगी।