सुबह उठते ही फोन देखने की आदत को कहें अलविदा: 10 मिनट करें 'ओम' का जाप

सुबह उठते ही फोन देखने की आदत को कहें अलविदा: 10 मिनट करें 'ओम' का जाप

भागदौड़ भरी इस आधुनिक और डिजिटल दुनिया में हमारी सुबह की शुरुआत आंख खुलते ही सोशल मीडिया नोटिफिकेशन, ईमेल्स और स्मार्टफोन की स्क्रीन देखने के साथ होती है। सुबह-सुबह बिस्तर पर लेटे-लेटे मोबाइल फोन चलाने की यह आदत हमारे नर्वस सिस्टम, मानसिक स्वास्थ्य और दिनभर के फोकस को पूरी तरह से बर्बाद कर रही है। लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि यदि आप अपने दिन की शुरुआत फोन देखने के बजाय सिर्फ 10 मिनट के लिए प्राचीन भारतीय मंत्र और ब्रह्मांड की मूल ध्वनि 'ओम' (Om Chanting) के जाप से करें, तो आपकी पूरी जिंदगी में कितना सकारात्मक बदलाव आ सकता है? प्राचीन वेदों से लेकर आधुनिक न्यूरोसाइंस और मेडिकल साइंस तक इस बात की पुष्टि कर चुके हैं कि सुबह के वक्त 'ओम' का उच्चारण हमारे मस्तिष्क की तरंगों को संतुलित करने, तनाव को छूमंतर करने और शरीर में एक अद्भुत ऊर्जा का संचार करने का सबसे बेहतरीन प्राकृतिक साधन है। आज के इस विस्तृत, ज्ञानवर्धक और स्वास्थ्यवर्धक आलेख में हम आपको सुबह उठकर फोन देखने की आदत छोड़ने और केवल 10 मिनट 'ओम' का जाप करने से मिलने वाले उन चमत्कारी फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें जानकर आप आज से ही अपनी इस नई आदत की शुरुआत कर देंगे।

सुबह उठते ही मोबाइल फोन देखना हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए क्यों है जहर?

जब हम सुबह की शुरुआत आंख खुलते ही स्मार्टफोन की स्क्रीन पर नीली रोशनी (Blue Light) देखकर करते हैं, तो हमारे दिमाग में अचानक कोर्टिसोल और डोपामाइन का एक ऐसा असंतुलन पैदा होता है जो हमारे पूरे दिन के मूड को तनावपूर्ण बना देता है। दुनिया भर के स्लीप एक्सपर्ट्स और न्यूरोलॉजिस्ट्स का यह कहना है कि सुबह का पहला एक घंटा हमारे मस्तिष्क के लिए सबसे ज्यादा संवेदनशील होता है, और उस समय नकारात्मक खबरों, सोशल मीडिया या काम के संदेशों के संपर्क में आने से एंग्जायटी, मानसिक थकान और फोकस की कमी जैसी समस्याएं घेरने लगती हैं। इसके विपरीत, यदि आप सुबह उठकर बिना किसी स्क्रीन को छुए शांत चित्त से एकाग्र होकर बैठते हैं और पवित्र मंत्र 'ओम' का उच्चारण करते हैं, तो आपका दिमाग बाहरी दुनिया के शोर-शराबे से कटकर पूरी तरह से केंद्रित हो जाता है और आपके भीतर एक गहरी मानसिक शांति का अहसास उतरने लगता है।

'ओम' के उच्चारण का वैज्ञानिक रहस्य: कैसे कंपन आपके पूरे तंत्रिका तंत्र को करती है चार्ज

'ओम' केवल कोई साधारण धार्मिक शब्द नहीं है, बल्कि यह तीन अक्षरों 'अ', 'उ' और 'म' से मिलकर बनी एक ऐसी सार्वभौमिक ध्वनि है जिसकी कंपन (Vibration) हमारे पूरे शरीर और मस्तिष्क की कोशिकाओं को झकझोर कर रख देती है। जब आप सुबह के शांत वातावरण में रीढ़ की हड्डी सीधी करके बैठकर धीमी और गहरी सांस के साथ 'ओम' का उच्चारण करते हैं, तो गले, छाती और सिर के ऊपरी हिस्से में एक सूक्ष्म कंपन पैदा होती है। यह कंपन हमारे vagus nerve को एक्टिव करती है, जिससे दिल की धड़कन नियंत्रित होती है, ब्लड प्रेशर सामान्य होता है और शरीर का पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम (Parasympathetic Nervous System) सक्रिय हो जाता है। नियमित रूप से केवल 10 मिनट किया जाने वाला यह अभ्यास आपके मस्तिष्क के तनाव केंद्रों को शांत करता है और एकाग्रता, स्मरण शक्ति तथा डिसीजन मेकिंग पावर में जबरदस्त सुधार करता है।

मानसिक तनाव, एंग्जायटी और नींद की समस्या का सबसे अचूक प्राकृतिक समाधान

जो लोग अनिद्रा (Insomnia), रात में बार-बार नींद टूटने, या दिनभर अत्यधिक मानसिक तनाव से परेशान रहते हैं, उनके लिए सुबह का यह 10 मिनट का अभ्यास किसी वरदान से कम नहीं है। जब आप नियमित रूप से 'ओम' का जाप अपनी दिनचर्या में शामिल करते हैं, तो आपके शरीर से नकारात्मक ऊर्जा बाहर निकल जाती है और मन में सकारात्मक विचारों का प्रवाह बढ़ जाता है। रात को सोते समय जिन लोगों के दिमाग में विचारों का बवंडर चलता रहता है, वे यदि सुबह इस क्रिया को अपना लें, तो रात को उन्हें बहुत ही गहरी और सुकून भरी नींद आने लगती है। इसके अलावा, यह आपके फेफड़ों की क्षमता (Lung Capacity) को भी मजबूत करता है क्योंकि इसके उच्चारण के दौरान ली जाने वाली गहरी सांसें शरीर के कोने-कोने तक शुद्ध ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करती हैं।

आज से ही अपनी सुबह को बनाएं डिजिटल मुक्त और अपनाएं यह प्राचीन जीवनशैली

यदि आप भी अपनी वर्तमान जीवनशैली से थक चुके हैं और जीवन में अधिक शांति, ऊर्जा तथा संतुलन चाहते हैं, तो कल सुबह का इंतजार मत कीजिए बल्कि आज ही से इस बदलाव की शुरुआत कीजिए। सुबह उठते ही सबसे पहले अपने फोन को दूर किसी कोने में रख दें, साफ पानी पिएँ, किसी शांत जगह पर सुआसन या पद्मासन में बैठ जाएं और अपनी आँखें बंद करके कम से कम 10 मिनट तक पूरी तन्मयता से 'ओम' का लंबा और गहरा जाप करें। शुरुआती दिनों में आपको थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन कुछ ही हफ्तों के भीतर आपको अपने भीतर होने वाले सकारात्मक बदलाव साफ महसूस होने लगेंगे। डिजिटल स्क्रीन की गुलामी छोड़कर अपनी प्राचीन संस्कृति और स्वास्थ्य के इस अमूल्य खजाने को अपनाएं, क्योंकि एक शांत मन और स्वस्थ शरीर ही आपकी सबसे बड़ी और असली पूंजी है।