Thyroid Diet Myth Buster: क्या थायरॉइड को कंट्रोल करने वाली कोई जादुई डाइट है, जानिए एक्सपर्ट्स ने किस बड़े भ्रम से उठाया पर्दा

Thyroid Diet Myth Buster: क्या थायरॉइड को कंट्रोल करने वाली कोई जादुई डाइट है, जानिए एक्सपर्ट्स ने किस बड़े भ्रम से उठाया पर्दा

आज के समय में थायरॉइड की समस्या एक आम लाइफस्टाइल बीमारी बन चुकी है। गर्दन के निचले हिस्से में मौजूद यह छोटी सी तितली के आकार की ग्रंथि भले ही दिखने में बहुत मामूली लगे, लेकिन यह हमारे शरीर के पूरे मेटाबॉलिज्म, तापमान, दिल की धड़कन, मूड और एनर्जी लेवल को नियंत्रित करती है। जब इस ग्रंथि के काम करने की रफ्तार सुस्त या तेज होती है, तो शरीर का पूरा सिस्टम बिगड़ जाता है। सोशल मीडिया पर अक्सर दावा किया जाता है कि एक खास तरह की डाइट से थायरॉइड को जड़ से खत्म किया जा सकता है। लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों और डॉक्टरों ने इस दावे की सच्चाई बताते हुए साफ किया है कि थायरॉइड को ठीक करने वाली कोई 'जादुई डाइट' दुनिया में मौजूद नहीं है।

दवा सबसे जरूरी, मगर खानपान का भी है बड़ा रोल

वरिष्ठ डॉक्टर नंदनी शंकरा नरायणा के अनुसार, केवल खानपान में बदलाव करके थायरॉइड की बीमारी को न तो पूरी तरह पैदा किया जा सकता है और न ही इसे जड़ से खत्म किया जा सकता है। इस बीमारी के इलाज में सबसे मुख्य और अहम भूमिका डॉक्टर द्वारा दी गई दवाइयों की ही होती है। हालांकि, आपका खानपान इस बात को जरूर प्रभावित करता है कि आपकी थायरॉइड ग्रंथि कितनी अच्छी तरह और सुचारू रूप से काम करेगी। एक सही और संतुलित भोजन थायरॉइड ग्लैंड को अपना काम बेहतर तरीके से करने में ईंधन की तरह मदद करता है।

थायरॉइड ग्रंथि के तीन सबसे बड़े मददगार: आयोडीन, सेलेनियम और जिंक

थायरॉइड को एक्टिव और सेहतमंद रखने के लिए शरीर को कुछ खास पोषक तत्वों की नियमित रूप से आवश्यकता होती है। इनमें सबसे पहला और महत्वपूर्ण नाम है आयोडीन का। आयोडीन ही वह मुख्य तत्व है जिसकी मदद से यह ग्रंथि थायरॉइड हार्मोन का निर्माण करती है। शरीर में इसकी कमी होते ही हार्मोनल असंतुलन शुरू हो जाता है और थायरॉइड ग्लैंड बढ़ने (घेंघा रोग) की नौबत आ सकती है। आयोडीन की पूर्ति के लिए सीमित मात्रा में आयोडीन युक्त नमक, दूध, अंडे और समुद्री भोजन का सेवन किया जा सकता है।

आयोडीन के अलावा सेलेनियम और जिंक भी इस ग्रंथि के रक्षक माने जाते हैं। सेलेनियम थायरॉइड हार्मोन को शरीर में सक्रिय (एक्टिव) करने का काम करता है और ग्रंथि को किसी भी तरह के नुकसान से बचाता है। वहीं जिंक हार्मोन के सही निर्माण में सहायता करता है। इन दोनों तत्वों की कमी को पूरा करने के लिए आप अपनी थायरॉइड फ्रेंडली डाइट में अंडे, कद्दू या सूरजमुखी के बीज, दालें, मेवे और साबुत अनाज शामिल कर सकते हैं।

क्या सच में ब्रोकली, पत्ता गोभी और फूलगोभी हैं थायरॉइड के दुश्मन

इंटरनेट और सोशल मीडिया पर एक बहुत बड़ा भ्रम फैलाया गया है कि हाइपोथायरॉइडिज्म के मरीजों को ब्रोकली, पत्ता गोभी और फूलगोभी जैसी क्रूसिफेरस (Cruciferous) सब्जियां भूलकर भी नहीं खानी चाहिए क्योंकि ये थायरॉइड को बढ़ाती हैं। लेकिन डॉक्टरों ने इस डर को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक बड़ी गलतफहमी है। अगर आप इन सब्जियों को कच्चा खाने के बजाय अच्छी तरह से पकाकर या उबालकर सामान्य मात्रा में खाते हैं, तो ये शरीर को कोई नुकसान नहीं पहुंचातीं। इसके विपरीत, इन हरी सब्जियों में भरपूर मात्रा में फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो आपके पाचन और समग्र स्वास्थ्य के लिए बेहद गुणकारी होते हैं।

इन असली दुश्मनों से दूरी बनाना है बेहद जरूरी

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, थायरॉइड के मरीजों के लिए असली खतरा हरी सब्जियां नहीं, बल्कि बाजार में मिलने वाला अत्यधिक प्रोसेस्ड और जंक फूड है। बहुत ज्यादा तला-भुना खाना, चाट-पकौड़ी, प्रिजर्वेटिव्स वाले डिब्बाबंद फूड और शुगर से भरे मीठे कोल्ड ड्रिंक्स शरीर में अंदरूनी सूजन (Inflammation) को बढ़ाते हैं। इसकी वजह से मरीजों का वजन तेजी से भागता है और उन्हें हर वक्त थकान व कमजोरी महसूस होने लगती है, जिससे थायरॉइड के लक्षण और ज्यादा गंभीर रूप ले लेते हैं।

इसके साथ ही 'नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डाइजेस्टिव एंड किडनी डिजीज' की एक रिपोर्ट के अनुसार, थायरॉइड की दवा लेने के समय का विशेष ध्यान रखना चाहिए। सुबह खाली पेट दवा लेने के तुरंत बाद कुछ भी खाने-पीने से बचना चाहिए क्योंकि कुछ खाद्य पदार्थ दवा के अवशोषण को रोक देते हैं जिससे उसका असर कम हो जाता है। कुल मिलाकर डॉक्टरों की यही सलाह है कि किसी भी तरह की सख्त या क्रैश डाइट के चक्कर में न पड़ें। रोजाना ताजा, घर का बना संतुलित भोजन खाएं और बिना डॉक्टरी सलाह के अपने खाने में कोई बड़ा बदलाव न करें।

 

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