DNA: प्राइवेट के बाद अब सरकारी सिस्टम में भी Layoff! IAS-IPS के पद क्यों घटा रहा हिमाचल? क्या है सुक्खू सरकार की मजबूरी

DNA: प्राइवेट के बाद अब सरकारी सिस्टम में भी Layoff! IAS-IPS के पद क्यों घटा रहा हिमाचल? क्या है सुक्खू सरकार की मजबूरी

हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा प्रशासनिक सुधार और वित्तीय अनुशासन के तहत अखिल भारतीय सेवाओं (IAS, IPS और IFS) के पदों में कटौती करने के निर्णय पर राज्य में सियासी हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य के प्रशासनिक ढांचे को युक्तिसंगत बनाने के लिए यह कदम उठाया है।

पदों में कटौती के मुख्य आंकड़े और प्रशासनिक योजना

  • आईएएस कैडर: राज्य में आईएएस अधिकारियों के स्वीकृत पदों की संख्या 153 से घटाकर 130 करने का प्रस्ताव है, जिसे केंद्र सरकार के पास भेजा गया है। मुख्यमंत्री का मानना है कि राज्य की प्रशासनिक जरूरतों के अनुसार भविष्य में इसे और घटाकर 100 से 110 के बीच लाया जा सकता है।

  • आईएफएस कैडर: भारतीय वन सेवा के पदों को 118 से घटाकर 83 करने का प्रस्ताव है।

  • आईपीएस कैडर: भारतीय पुलिस सेवा के पदों में भी इसी तर्ज पर कमी की प्रक्रिया पर काम चल रहा है।

सुक्खू सरकार की क्या है मजबूरी और उद्देश्य?

  1. वित्तीय संकट और राजस्व व्यय में कमी: हिमाचल प्रदेश लंबे समय से आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, खासकर तब से जब राज्य को मिलने वाले रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट में बदलाव और वित्तीय दबाव बढ़ा है। प्रशासनिक कैडर को छोटा करने से सरकार के राजस्व खर्च में हर साल लगभग 100 से 200 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है। इस बचाए गए धन को जनहित और विकास कार्यों में लगाया जाएगा।

  2. अधिकारियों के पास काम की कमी: सरकार का तर्क है कि छोटे पहाड़ी राज्य में जितने आईएएस और अन्य वरिष्ठ अधिकारी तैनात हैं, उनके अनुपात में कई बार बड़े या पर्याप्त विभाग नहीं होते। कई अधिकारियों को छोटे विभाग मिलने के कारण उनकी पूरी क्षमता और प्रतिभा का सही इस्तेमाल नहीं हो पाता।

  3. सिस्टम में बदलाव: सुक्खू सरकार का मानना है कि राज्य को भारी-भरकम प्रशासनिक फौज की बजाय योजनाओं को जमीन पर सख्ती और तेजी से लागू करने वाले चुस्त-दुरुस्त तंत्र की जरूरत है। इसके साथ ही, केंद्र में डेपुटेशन पर जाने वाले अधिकारियों की फाइलों को बिना देरी के तुरंत मंजूरी दी जा रही है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और विरोध

इस फैसले को लेकर विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने सरकार पर कड़ा हमला बोला है। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा है कि एक तरफ वरिष्ठ अधिकारियों के कैडर घटाए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ चहेते सेवानिवृत्त अधिकारियों को बड़े पदों पर सलाहकार और कैबिनेट रैंक के साथ बैठाया जा रहा है। विपक्ष का यह भी आरोप है कि सरकार अपने वित्तीय कुप्रबंधन को छिपाने के लिए प्रशासनिक ढांचे को कमजोर कर रही है। इसके बावजूद, सरकार का पक्ष है कि आत्मनिर्भर हिमाचल की दिशा में आगे बढ़ने के लिए कुछ कड़े और दूरदर्शी फैसले लेने जरूरी हैं, ताकि राज्य की वित्तीय सेहत को सुधारा जा सके।