स्टील्थ' टेक्नोलॉजी वाली नेक्स्ट जेनरेशन BrahMos-NG मिसाइल का इंतजार

स्टील्थ' टेक्नोलॉजी वाली नेक्स्ट जेनरेशन BrahMos-NG मिसाइल का इंतजार

दक्षिण-पूर्वी एशिया में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के बदलते सामरिक सुरक्षा परिदृश्य के बीच भारत और फिलीपींस का रक्षा सहयोग एक नया इतिहास रच रहा है। दुनिया की सबसे तेज और घातक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल 'ब्रह्मोस' (BrahMos) की पहली अंतरराष्ट्रीय डिलीवरी सफलतापूर्वक हासिल करने के बाद फिलीपींस सरकार और उसकी सेना बेहद गदगद नजर आ रही है। भारत में फिलीपींस के राजदूत जोसेल एफ. इग्नासियो (Josel F. Ignacio) ने ब्रह्मोस की तकनीक को पूरी तरह से 'अतुलनीय' (Unmatched) करार दिया है और स्पष्ट किया है कि भारत उनके देश के लिए एक अत्यंत विश्वसनीय एवं रणनीतिक रक्षा साझेदार बनकर उभरा है। अपनी तटीय सुरक्षा (Coastal Defense) को मजबूत करने के बाद अब फिलीपींस की नजर भारत द्वारा विकसित की जा रही अत्यधिक आधुनिक, हल्की और 'स्टील्थ' तकनीक से लैस नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल—'ब्रह्मोस-एनजी' (BrahMos-NG) और आकाश 1S (Akash 1S) एयर डिफेंस सिस्टम पर टिक गई है।

#1. $375 मिलियन डॉलर की ऐतिहासिक डील: ब्रह्मोस मिसाइल से मजबूत हुई फिलीपींस की समुद्री सुरक्षा

भारत और फिलीपींस के बीच जनवरी 2022 में एंटी-शिप तटीय मिसाइल प्रणाली के लिए लगभग 375 मिलियन डॉलर (करीब ₹2,780 करोड़) का ऐतिहासिक रक्षा समझौता हुआ था। इसके तहत भारत ने 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' पहल के तहत ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की तटीय बैटरियों की डिलीवरी सफलतापूर्वक पूरी कर दी है। फिलीपींस मरीन कॉर्प्स (Philippine Marine Corps) ने इन मिसाइलों को अपने रणनीतिक तटीय क्षेत्रों में तैनात कर दिया है। दक्षिण चीन सागर (South China Sea) में जारी क्षेत्रीय तनावों के बीच ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली की तैनाती ने फिलीपींस को एक मजबूत और भरोसेमंद रणनीतिक प्रतिरोध (Credible Deterrence) प्रदान किया है, जिससे किसी भी दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके।

#1. क्या है 'स्टील्थ' टेक्नोलॉजी से लैस ब्रह्मोस-एनजी (BrahMos-NG) मिसाइल की ताकत

भारत की रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और ब्रह्मोस एयरोस्पेस द्वारा विकसित की जा रही 'ब्रह्मोस-एनजी' (Next Generation) मौजूदा ब्रह्मोस मिसाइल का एक नया, अत्यधिक उन्नत, हल्का और छोटा रूप है। जहां मौजूदा ब्रह्मोस का वजन लगभग 3 टन है, वहीं ब्रह्मोस-एनजी का वजन घटकर महज 1.33 टन रह जाएगा, जिससे इसे लड़ाकू विमानों (जैसे सुखोई Su-30MKI, तेजस Mk-1A) और पनडुब्बियों पर आसानी से तैनात किया जा सकेगा। सबसे खास बात यह है कि इसमें उन्नत 'स्टील्थ टेक्नोलॉजी' (Radar Cross-Section Reduction) का इस्तेमाल किया गया है, जिसके कारण दुश्मन के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम इस मिसाइल का पता लगाने में पूरी तरह असमर्थ रहेंगे। मच 3.5 (ध्वनि की गति से साढ़े तीन गुना तेज) की रफ्तार और 290 किमी से अधिक की मारक क्षमता वाली यह मिसाइल हवा से सतह पर अचूक प्रहार करने में सक्षम है।

#1. रक्षा निर्यात का नया हब बना भारत: फिलीपींस के बाद अन्य देश भी रेस में

फिलीपींस के साथ ब्रह्मोस सौदे की शानदार सफलता ने अंतरराष्ट्रीय रक्षा बाजार में भारत की धाक जमा दी है। फिलीपींस के राजदूत ने संकेत दिया है कि ब्रह्मोस तो महज शुरुआत है, अब फिलीपींस भारतीय सेना से अगली पीढ़ी के गश्ती जहाजों (NGOPV), बुलेटप्रूफ जैकेट, सैन्य ट्रकों के साथ-साथ 'आकाश-1S' (Akash 1S) एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम खरीदने की तैयारी में है। फिलीपींस के अलावा वियतनाम, इंडोनेशिया, मिस्र (Egypt), यूएई और लैटिन अमेरिकी देश भी भारतीय ब्रह्मोस और ब्रह्मोस-एनजी मिसाइल प्रणाली को खरीदने के लिए भारत सरकार के साथ अग्रिम चरण की बातचीत कर रहे हैं।

#1. इंडो-पैसिफिक में सामरिक संतुलन और 'मेक इन इंडिया' की बड़ी सफलता

फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइल की सफल आपूर्ति भारत के रक्षा निर्यात (Defence Export) के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुई है। इससे न केवल भारत का रक्षा विनिर्माण क्षेत्र मजबूत हुआ है, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और समुद्री सुरक्षा बनाए रखने में भारत की भूमिका और अधिक अहम हो गई है। फिलीपींस जैसे मित्र देशों द्वारा भारतीय सैन्य उपकरणों की लगातार सराहना यह साबित करती है कि भारत अब केवल दुनिया का बड़ा हथियार आयातक नहीं, बल्कि एक उच्च-तकनीकी (High-Tech) और भरोसेमंद हथियार निर्यातक देश बन चुका है।