वंदे मातरम पर कांग्रेस का बड़ा फैसला, सिर्फ 2 श्लोक गाने के नियम पर क्यों भड़की बीजेपी
राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में आयोजित कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की चार घंटे लंबी मैराथन बैठक के बाद पार्टी ने एक महत्वपूर्ण और बड़ा फैसला लिया है। कांग्रेस पार्टी ने यह तय किया है कि अब से आगामी सभी पार्टी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' के केवल शुरुआती दो श्लोक ही गाए जाएंगे। इस निर्णय के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर से जुबानी जंग तेज हो गई है और इसको लेकर पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है।
भाजपा का तीखा हमला और 'नई मुस्लिम लीग' का आरोप
कांग्रेस के इस कदम पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कड़ी आपत्ति जताई है और तीखा हमला बोला है। भाजपा नेताओं ने इस फैसले को लेकर कांग्रेस पार्टी पर कड़े प्रहार किए हैं और इसे देश के आत्मसम्मान तथा शहीदों के बलिदान के खिलाफ बताया है। उनका कहना है कि इस प्रकार का निर्णय एक विशेष राजनीतिक हित और तुष्टिकरण की राजनीति से प्रेरित है, जिससे राष्ट्रगीत की गरिमा प्रभावित होती है। विपक्षी पार्टी के इस रुख ने देश की राजनीति में एक नया भूचाल ला दिया है, और इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला लगातार जारी है।
स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा है 'वंदे मातरम' का इतिहास
आपको बता दें कि बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित अमर गीत 'वंदे मातरम' का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व बहुत अधिक है। यह गीत सबसे पहले 7 नवंबर, 1875 को साहित्यिक पत्रिका 'बंगदर्शन' में प्रकाशित हुआ था और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह देशभक्ति का सबसे बड़ा प्रेरणा स्त्रोत बना था। हाल ही में 15 अगस्त के एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस मुख्यालय से पूरा गीत गाए जाने का एक वीडियो वायरल होने के बाद से यह बहस नए सिरे से सुलग उठी थी, जिसके बाद अब CWC की बैठक में यह औपचारिक नीतिगत फैसला लिया गया है।