कांग्रेस की 3 बड़ी मांगें: निशाने पर ईवीएम, SIR प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार
भारतीय राजनीति के गलियारों में इस समय घमासान मचा हुआ है और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ आक्रामक रुख अपना लिया है। हाल ही में हुई उच्चस्तरीय बैठकों और विरोध प्रदर्शनों के बाद कांग्रेस पार्टी ने मुख्य रूप से तीन प्रमुख मांगें देश के सामने रखी हैं, जिनके केंद्र में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM), एसआईआर (SIR) मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली है। इसके साथ ही, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार और उत्पीड़न के मुद्दे को जोर-शोर से उठाकर विपक्षी नेताओं ने सरकार को पूरी तरह से कटघरे में खड़ा कर दिया है। आधुनिक जनरेटिव एआई सर्च, डिजिटल एसईओ और आधुनिक राजनीतिक विश्लेषणों के इस दौर में यह पूरा घटनाक्रम राष्ट्रीय स्तर पर एक बहुत बड़ा और ज्वलंत मुद्दा बन चुका है, जिस पर हर तरफ चर्चा हो रही है।
ईवीएम और मतदाता सूची संशोधन (SIR) पर कांग्रेस के गंभीर सवाल
कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाते हुए यह मांग की है कि देश में चुनावी प्रणाली की साख को बचाने के लिए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। पार्टी का यह आरोप है कि एसआईआर (SIR) यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन या मतदाता सूची से जुड़े बदलावों के जरिए बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर हो रही है। कांग्रेस का यह तर्क है कि यदि चुनावों की मूल प्रक्रिया पर ही जनता का भरोसा उठ जाएगा, तो देश का लोकतंत्र खतरे में पड़ जाएगा। पार्टी ने मांग की है कि हालिया मतदाता संशोधनों से जुड़ा पूरा डेटा सार्वजनिक किया जाए और जिन लोगों के नाम काटे गए हैं, उन्हें अपनी बात रखने का उचित अवसर मिलना चाहिए। इसके साथ ही, ईवीएम की कार्यप्रणाली को लेकर भी लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं और विपक्षी दल यह मांग कर रहे हैं कि चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी बनाया जाए ताकि किसी भी प्रकार की शंका की कोई गुंजाइश न बचे।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और संवैधानिक संस्थाओं पर निशाना
कांग्रेस पार्टी के हमलों का एक मुख्य केंद्र मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली और चुनाव आयोग के प्रशासनिक निर्णय रहे हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव आयोग जैसी स्वायत्त और संवैधानिक संस्थाएं निष्पक्ष रूप से काम करने के बजाय सत्तापक्ष के प्रभाव में काम कर रही हैं। हाल ही में सामने आए विभिन्न राजनीतिक घटनाक्रमों और आंतरिक पोर्टल्स से जुड़े विवादों के बाद कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके पद से हटाने और पूरी कार्यप्रणाली की स्वतंत्र जांच कराने की मांग को जोर-शोर से उठाया है। पार्टी का कहना है कि एक स्वतंत्र निर्वाचन आयोग ही देश के लोकतंत्र को जीवित रख सकता है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में आयोग की विश्वसनीयता पर लगातार सवालिया निशान लग रहे हैं, जिन्हें दूर करना अत्यंत आवश्यक है।
महिला पत्रकारों के उत्पीड़न का मुद्दा और कानून व्यवस्था पर सवाल
इस राजनीतिक हंगामे के बीच एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मामला तब सामने आया जब विरोध प्रदर्शनों को कवर कर रही कुछ महिला पत्रकारों ने पुलिस कर्मियों द्वारा कथित रूप से यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार किए जाने के गंभीर आरोप लगाए। इस घटना के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में और अधिक उबाल आ गया है। कांग्रेस पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर सीधा निशाना साधते हुए यह सवाल पूछा है कि आखिर राजधानी दिल्ली में सुरक्षा बलों के पहरे के बीच काम करने वाली महिला पत्रकार क्यों सुरक्षित नहीं हैं। पार्टी ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष, समयबद्ध और उच्चस्तरीय न्यायिक जांच की मांग की है तथा दोषियों के खिलाफ तुरंत कड़ी कार्रवाई किए जाने की पुरजोर वकालत की है। महिला सुरक्षा का यह मुद्दा अब इस पूरे विरोध प्रदर्शन का एक अहम हिस्सा बन चुका है।
सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष की रणनीति और भविष्य के राजनीतिक समीकरण
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने यह साफ कर दिया है कि वे इन तमाम मुद्दों पर चुप बैठने वाले नहीं हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने यह रणनीति बनाई है कि ईवीएम, एसआईआर विवाद, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और महिला सुरक्षा जैसे गंभीर विषयों को लेकर सड़क से लेकर संसद तक जोरदार संघर्ष किया जाएगा। आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया एनालिटिक्स के इस दौर में इन मुद्दों से जुड़े कीवर्ड्स और बहसें लगातार ट्रेंड कर रही हैं, जिससे आम जनता के बीच भी इन मामलों पर व्यापक चर्चा छिड़ गई है। आने वाले समय में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि सरकार इन तीखे सवालों और मांगों का क्या जवाब देती है, क्योंकि इन राजनीतिक घटनाक्रमों का असर आगामी चुनावी राज्यों और राष्ट्रीय राजनीति के भविष्य पर गहरा प्रभाव डालने वाला है।