लाश का सिर किचन में, धड़ ट्रेन में... 4 लाख के लालच में किए थे हयात के टुकड़े, 24 दिन ...

लाश का सिर किचन में, धड़ ट्रेन में... 4 लाख के लालच में किए थे हयात के टुकड़े, 24 दिन ...

भारतीय समाज और अपराध की दुनिया में जब भी कोई ऐसी घटना सामने आती है जो इंसानी रूह को कंपा दे, तो लोग स्तब्ध रह जाते हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश के एक इलाके से एक ऐसा ही अत्यंत वीभत्स और दिल दहला देने वाला मर्डर केस सामने आया है जिसने हर किसी के होश उड़ा दिए हैं। महज चार लाख रुपये की छोटी सी रकम और पैसों के लालच में अपनों ने ही एक शख्स की जिंदगी इस बेरहमी से छीन ली कि हत्या के बाद उसके शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर दिए गए। इस सनसनीखेज वारदात का खुलासा तब हुआ जब पुलिस ने कड़ियों से कड़ी जोड़कर इस अंधे कत्ल की तह तक जाने का फैसला किया। मृतक की पहचान हयात के रूप में हुई है, जिसकी हत्या की इस खौफनाक दास्तान ने स्थानीय लोगों को सदमे में डाल दिया है। पुलिस के लिए भी यह केस किसी पहेلی से कम नहीं था, जिसे सुलझाने में कानून के रखवालों को पूरे 24 दिनों का लंबा संघर्ष करना पड़ा।

कैसे मिला खौफनाक सुराग: किचन में सिर और ट्रेन की बोगी में मिला धड़

इस अंधे कत्ल की जांच का सिलसिला तब शुरू हुआ जब रेलवे ट्रैक और आसपास के इलाकों से अलग-अलग जगहों पर इंसानी शरीर के अंग मिलने लगे। सबसे पहले एक यात्री ट्रेन के अंदर से एक लावारिस बैग में खून से सना हुआ धड़ बरामद हुआ, जिससे रेलवे पुलिस और स्थानीय थानों में हड़कंप मच गया। इसके बाद जब पुलिस ने गुमशुदा लोगों की सूचियों और तकनीकी सर्विलांस का सहारा लिया, तो जांच के तार एक संदिग्ध मकान तक जा पहुंचे। जब पुलिस ने उस घर की तलाशी ली, तो वहां जो मंजर सामने आया उसे देखकर पुलिस अधिकारियों के भी पैरों तले जमीन खिसक गई। घर के रसोईघर यानी किचन से मृतक हयात का सिर बरामद किया गया। शरीर के अंगों को इस तरह अलग-अलग ठिकाने लगाने की शातिर साजिश यह साबित करती थी कि हत्यारे बेहद क्रूर और चालाक थे, जिन्होंने सबूतों को मिटाने के लिए हर मुसंभिन हथकंडा अपनाया था।

पैसों का लालच और रिश्तों के कत्ल की वह दर्दनाक कहानी

पुलिस की पूछताछ और खुलासे के बाद जो सच सामने आया वह इंसानियत को शर्मसार करने वाला था। मृतक हयात का किसी के साथ वित्तीय लेन-देन या पैसों को लेकर विवाद चल रहा था और आरोपी किसी भी कीमत पर उस चार लाख रुपये की रकम को हड़पना चाहते थे। जब हयात ने पैसे देने से इनकार किया या तकादा तेज किया, तो लालच में अंधे हो चुके उन दरिंदों ने उसे अपने जाल में फंसाकर मौत के घाट उतार दिया। हत्या करने के बाद भी उनका दिल नहीं पसीजा और उन्होंने सबूत छिपाने के लिए एक सुनियोजित योजना के तहत शव को आरी और चाकुओं से काटकर अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया। एक हिस्से को किचन में छुपाया गया और दूसरे हिस्से को ट्रेन में फेंक दिया गया ताकि किसी को यह कभी पता न चल सके कि आखिर हयात के साथ क्या हुआ था। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि आज के दौर में पैसों की भूख इंसानों को किस हद तक गिरा सकती है।

24 दिनों की कड़ी मशक्कत और पुलिस की तकनीकी सर्विलांस का कमाल

बिना किसी शुरुआती सुराग के एक ऐसे ब्लाइंड मर्डर केस को सुलझाना जिसमें केवल शरीर के अलग-अलग टुकड़े मिले हों, पुलिस के लिए किसी लोहे के चने चबाने से कम नहीं था। लेकिन स्थानीय पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीमों ने हार नहीं मानी। उन्होंने आसपास के सीसीटीवी फुटेज (CCTV Footage), मोबाइल कॉल डीटेल्स (CDD), और मुखबिरों के नेटवर्क को पूरी तरह सक्रिय कर दिया। 24 दिनों तक दिन-रात एक करके पुलिस ने एक-एक संदिग्ध कड़ी को आपस में जोड़ा और आखिरकार मुख्य आरोपियों तक पहुंचने में कामयाब हो गई। पूछताछ के दौरान जब पुलिस ने मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया, तो आरोपियों की जुबान से सच खुद-ब-खुद बाहर आ गया। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार और सबूतों को भी बरामद कर लिया है, जिससे अदालत में आरोपियों को कड़ी सजा मिलने का रास्ता साफ हो गया है।

न्याय की आस और समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी

इस वीभत्स मर्डर मिस्ट्री के सुलझने के बाद भले ही पुलिस ने राहत की सांस ली हो, लेकिन समाज के मानस पटल पर यह घटना कई गंभीर सवाल छोड़ गई है। क्या लालच की आग में इंसान इतना अंधा हो सकता है कि वह अपने ही साथी की बेरहमी से हत्या कर उसके टुकड़े-टुकड़े कर दे? पीड़ित परिवार अब अदालत से यही मांग कर रहा है कि इस जघन्य अपराध को अंजाम देने वाले दरिंदों को ऐसी मिसाल कायम करने वाली सजा दी जाए ताकि भविष्य में कोई दूसरा शख्स इस तरह के खौफनाक रास्ते पर चलने की हिम्मत न जुटा सके। कानून के लंबे हाथ भले ही देर से पहुंचे हों, लेकिन उन्होंने साबित कर दिया कि अपराध चाहे कितना भी शातिर तरीके से क्यों न छिपाया जाए, सच्चाई का उजाला एक न एक दिन सामने आ ही जाता है।