नेपाल को तबाह कर भारत की तरफ बढ़ रहा पानी का सैलाब, यूपी- बिहार में हाई अलर्ट
पड़ोसी देश नेपाल में पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही भारी मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है और वहां भयंकर तबाही का मंजर देखने को मिल रहा है। इस प्राकृतिक आपदा का सीधा और गंभीर असर अब भारत के मैदानी इलाकों पर पड़ने लगा है। नेपाल के पहाड़ी और ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से आने वाला अथाह पानी और नदियों का भयंकर उफान अब भारत की सीमा की तरफ एक विशालकाय सैलाब के रूप में बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत के मौसम विभाग और केंद्रीय जल आयोग (CWC) की तरफ से जारी की गई गंभीर चेतावनियों के बाद उत्तर प्रदेश और बिहार के कई संवेदनशील जिलों में प्रशासनिक अमला पूरी तरह से सतर्क हो गया है और युद्धस्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। नेपाल के विभिन्न बैराजों से लगातार भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण गंडक नदी का जलस्तर बहुत तेजी से ऊपर की ओर भाग रहा है, जिससे निचले इलाकों में रहने वाले लाखों नागरिकों के सामने एक बार फिर से विकराल बाढ़ का गंभीर खतरा मंडराने लगा है।
गंडक नदी में उफान और तीन मीटर ऊंची खतरनाक लहरों की चेतावनी
भारत-नेपाल सीमा पर स्थित गंडक नदी (जिसे नारायणी नदी के नाम से भी जाना जाता है) का जलस्तर इस समय बेहद खतरनाक और चेतावनी वाले निशान को पार कर चुका है। विशेषज्ञों और केंद्रीय जल आयोग के ताजा आंकड़ों और सैटेलाइट अपडेट के मुताबिक, गंडक नदी में आज पानी का दबाव इतना अधिक है कि इसमें तीन मीटर तक ऊंची खतरनाक लहरें उठ सकती हैं। जल प्रवाह की यह तीव्र और आक्रामक गति नदी के दोनों किनारों और तटबंधों पर भारी दबाव बना रही है। नेपाल के प्रसिद्ध वाल्मीकि नगर बराज और त्रिवेणी घाट के पास से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण न केवल जलस्तर बढ़ा है बल्कि जलप्रलय जैसी डरावनी स्थिति उत्पन्न हो गई है। नदी के आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए लगातार लाउडस्पीकर और सायरन के जरिए चेतावनी जारी की जा रही है ताकि किसी भी संभावित बड़े जान-माल के नुकसान से समय रहते बचा जा सके और प्रशासन स्थिति पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है।
उत्तर प्रदेश और बिहार के कई संवेदनशील जिलों में प्रशासन द्वारा हाई अलर्ट घोषित
नेपाल की तरफ से आ रहे इस भयानक जलप्रलय के खतरे को पूरी गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश और बिहार की राज्य सरकारों ने जमीनी स्तर पर व्यापक तैयारियां कर ली हैं। बिहार के पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण, और मुजफ्फरपुर सहित गंडक के तटीय इलाकों से सटे सभी संवेदनशील जिलों में जिला प्रशासन ने पूरी तरह से हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। वहीं दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश के कुशीनगर, महराजगंज और देवरिया जिलों में भी बाढ़ चौकियों और आपदा नियंत्रण कक्षों को पूरी तरह से सक्रिय कर दिया गया है। नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (NDRF) और स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (SDRF) की विशेष टीमों को सबसे अधिक संवेदनशील और निचले इलाकों में तैनात कर दिया गया है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत राहत और बचाव अभियान चलाया जा सके। तटबंधों की लगातार और चौबीसों घंटे निगरानी के लिए विशेष इंजीनियरों और तकनीकी अधिकारियों की टीमों को फील्ड में उतार दिया गया है।
किसानों की लहलहाती फसलें और रिहायशी बस्तियों पर मंडराया बाढ़ का भारी खतरा
गंडक नदी के इस निरंतर बढ़ते हुए सैलाब से सबसे ज्यादा और गहरा नुकसान किसानों और तटीय बस्तियों में रहने वाले गरीब परिवारों को होने की आशंका जताई जा रही है। नदी के किनारे और कछार वाले इलाकों में खड़ी धान, गन्ने और सब्जियों की हजारों एकड़ लहलहाती फसलें इस समय पूरी तरह से जलमग्न होने के कगार पर पहुंच चुकी हैं, जिससे किसानों की महीनों की मेहनत पानी में फिरती नजर आ रही है। कई निचले गांवों के अंदर पानी धीरे-धीरे प्रवेश करना शुरू हो गया है, जिसके कारण स्थानीय ग्रामीणों को अपने पुश्तैनी घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों और ऊंचे बांधों की तरफ पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। पशुपालकों के लिए भी अपने मवेशियों को सुरक्षित बचाने और उनके लिए चारे की उचित व्यवस्था करना इस समय एक बहुत बड़ी चुनौती बन गया है। जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर बिल्कुल ध्यान न दें और प्रशासन द्वारा बनाए गए राहत शिविरों में शरण लें।
सरकार और आपदा प्रबंधन तंत्र की पैनी नजर, लोगों से पूरी तरह सतर्क रहने की अपील
इस अत्यंत विकट और चुनौतीपूर्ण परिस्थिति से निपटने के लिए राज्य और केंद्र स्तर का आपदा प्रबंधन तंत्र पूरी तरह से आपसी समन्वय बनाकर चौबीसों घंटे काम कर रहा है। मुख्यमंत्री कार्यालय खुद इस पूरी स्थिति की लगातार उच्चस्तरीय समीक्षा कर रहा है और सभी संबंधित जिलाधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि राहत सामग्री, सूखा राशन, जीवन रक्षक दवाइयां और शुद्ध पेयजल की आपूर्ति में किसी भी प्रकार की कोताही या लापरवाही न बरती जाए। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, अगले कुछ घंटों तक नेपाल के पहाड़ी और जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश का यह दौर जारी रह सकता है, जिससे गंडक नदी का जलस्तर और अधिक ऊंचाई छू सकता है। प्रशासन ने नदी के आसपास के क्षेत्रों में जाने, सेल्फी लेने या मछली पकड़ने जैसी सभी प्रकार की खतरनाक गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। क्षेत्र के सभी नागरिकों से विनम्र अनुरोध किया गया है कि वे स्थानीय प्रशासन और आपदा नियंत्रण कक्ष के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करें और पूरी तरह से सतर्क एवं सुरक्षित रहें।