Instagram पर दोस्ती, दुबई के रास्ते पाकिस्तान भेजे 8 ... दिल्ली से ISI का जासूस दंपती गिरफ्तार
देश की राजधानी नई दिल्ली से एक बेहद चौंकाने वाला और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने देश की सुरक्षा एजेंसियों के भी कान खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया की आभासी दुनिया में शुरू हुई एक मामूली सी दोस्ती किस तरह देश की सुरक्षा के लिए नासूर बन सकती है, इसकी बानगी इस ताजा मामले में देखने को मिली है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक ऐसे जासूस दंपती को धर दबोचा है जो सीधे तौर पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के नापाक इशारों पर काम कर रहा था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस खतरनाक खेल के तहत दुबई के रास्ते पाकिस्तान में कुल आठ फर्जी सिम कार्ड भेजे गए थे, जिनका इस्तेमाल देश की गोपनीय जानकारियों को साझा करने और आतंकी गतिविधियों को संचालित करने के लिए किया जा रहा था। इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद से देश भर की सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है और इस पूरे नेटवर्क की गहराई से छानबीन शुरू कर दी गई है।
सोशल मीडिया बना नया हथियार: इंस्टाग्राम पर बुना गया था जासूसी का खतरनाक जाल
आज के डिजिटल दौर में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स केवल बातचीत या मनोरंजन का जरिया नहीं रह गए हैं, बल्कि दुश्मन देश की खुफिया एजेंसियां इनका इस्तेमाल देश के खिलाफ साजिश रचने के लिए कर रही हैं। दिल्ली से पकड़े गए इस जासूस दंपती का नेटवर्क भी इसी आधुनिक हथकंडे का शिकार बना था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, सोशल मीडिया ऐप इंस्टाग्राम पर पहले दोस्ती का जाल बुना गया और फिर धीरे-धीरे पैसों का लालच या अन्य दबाव देकर इन्हें पाकिस्तान के हैंडलर्स के लिए काम करने के वास्ते तैयार किया गया। आरोपियों ने शुरू में इसे एक आम ऑनलाइन दोस्ती समझा था, लेकिन धीरे-धीरे वे इस दलदल में इस कदर धंसते चले गए कि वे देश की सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील राज दुश्मन को सौंपने लगे। यह मामला एक बार फिर से इस बात की कड़ी चेतावनी देता है कि सोशल मीडिया पर अजनबी लोगों से जुड़ते समय कितनी सतर्कता बरतने की जरूरत है।
दुबई के रास्ते पाकिस्तान भेजे गए 8 सिम कार्ड, खुला बड़ा राज
इस पूरी साजिश का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि जासूसी के इस खेल को अंजाम देने के लिए तकनीकी रूप से बेहद शातिर तरीके अपनाए गए थे। गिरफ्तार किए गए दंपती ने भारत से दुबई के रास्ते पाकिस्तान कुल 8 सिम कार्ड भेजे थे। इन सिम कार्ड्स का इस्तेमाल भारतीय नंबरों पर फर्जी आईडी के जरिए ओटीपी हासिल करने, गुप्त चैट ग्रुप चलाने और खुफिया संदेशों का आदान-प्रदान करने के लिए किया जाता था। जब सुरक्षा एजेंसियों ने इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और डिजिटल फुटप्रिंट्स की गहराई से जांच की, तो इन फर्जी सिम कार्ड्स के तार सीधे दिल्ली के इस दंपती से जा जुड़े। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन सिम कार्ड्स को खरीदने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कहां और कैसे किया गया था तथा इसमें स्थानीय स्तर पर और कौन-कौन लोग उनकी मदद कर रहे थे।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में फैला था स्लीपर सेल का खतरनाक जाल
देश की राजधानी होने के कारण दिल्ली हमेशा से विदेशी खुफिया एजेंसियों और राष्ट्रविरोधी ताकतों के निशाने पर रहती है। इस दंपती की गिरफ्तारी से यह साफ हो गया है कि किस तरह स्थानीय नागरिकों को मोहरा बनाकर स्लीपर सेल या जासूसी नेटवर्क को जमीन पर उतारा जा रहा है। आरोपी काफी समय से बेहद शातिर तरीके से अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे ताकि किसी को उन पर शक न हो। वे रक्षा प्रतिष्ठानों, सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ठिकानों और वीआईपी मूवमेंट से जुड़ी जानकारियों को जुटाकर पाकिस्तान भेजने की फिराक में थे। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की यह कार्रवाई देश की आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से एक बहुत बड़ी सफलता मानी जा रही है, जिससे एक बड़े संभावित खतरे को समय रहते टाल दिया गया है।
सुरक्षा एजेंसियों की सख्त कार्रवाई और देश की सतर्कता का संदेश
इस सनसनीखेज खुलासे के बाद देश भर में खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों ने चौकसी और अधिक बढ़ा दी है। सीमा पार से संचालित होने वाले ऐसे जासूसी नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने के लिए साइबर सेल और काउंटर-इंटेलिजेंस यूनिट्स मिलकर काम कर रही हैं। आम नागरिकों के लिए भी यह घटना एक बड़ा सबक है कि वे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर अनजान लोगों के साथ अपनी व्यक्तिगत या देश से जुड़ी कोई भी जानकारी साझा करने से बचें। भारत की सुरक्षा एजेंसियां देश की संप्रभुता और अखंडता के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी शख्स को बख्शने के मूड में नहीं हैं, और इस मामले में आगे कई और बड़े खुलासे होने की पूरी संभावना है।