सऊदी अरब से लेकर आपकी रसोई तक, जानिए भारत में कैसे तय होते हैं गैस के दाम और क्यों बदलती है कीमत

सऊदी अरब से लेकर आपकी रसोई तक, जानिए भारत में कैसे तय होते हैं गैस के दाम और क्यों बदलती है कीमत

भारत में एलपीजी सिलेंडर के दाम हर महीने की पहली तारीख को अपडेट होते हैं। जुलाई की शुरुआत में सरकार ने कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में 183.50 रुपये की कटौती की है। लेकिन घरेलू सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया।

इस फैसले से होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारियों को राहत मिली है। वहीं घरों में इस्तेमाल होने वाले सिलेंडर की कीमत जस की तस बनी हुई है।

गैस की असली कीमत कहां से तय होती है

भारत अपनी जरूरत की लगभग 50% एलपीजी गैस बाहर से आयात करता है। इसकी शुरुआती कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार के हिसाब से तय होती है।

यह कीमत मुख्य रूप से सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी की दरों पर आधारित होती है। खरीद डॉलर में होती है। इसलिए डॉलर की मजबूती या कमजोरी का सीधा असर भारत में गैस के दाम पर पड़ता है।

इसके अलावा आयात में कई अतिरिक्त खर्च जुड़ते हैं जैसे

  • समुद्री परिवहन खर्च
  • इंश्योरेंस
  • कस्टम ड्यूटी
  • पोर्ट चार्ज

इन सभी खर्चों के बाद गैस भारत पहुंचती है।

देश के अंदर कैसे बढ़ती है कीमत

भारत में पहुंचने के बाद गैस को अलग-अलग राज्यों और शहरों तक पहुंचाया जाता है। इस प्रक्रिया में कई अतिरिक्त खर्च जुड़ते हैं।

इनमें शामिल हैं

  • ट्रांसपोर्ट खर्च
  • सिलेंडर में गैस भरने की लागत
  • मार्केटिंग खर्च
  • डीलर का कमीशन

इसके बाद हर राज्य में टैक्स और ढुलाई लागत अलग होने के कारण सिलेंडर के दाम भी अलग-अलग हो जाते हैं।

घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर में बड़ा अंतर क्यों

  • घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में सबसे बड़ा फर्क उनके इस्तेमाल को लेकर है।
  • घरेलू सिलेंडर घरों के लिए होता है। सरकार इस पर राहत और सब्सिडी देती है ताकि आम लोगों पर बोझ कम रहे।
  • वहीं कमर्शियल सिलेंडर का इस्तेमाल व्यापार में होता है। जैसे होटल और रेस्टोरेंट। इस पर किसी तरह की सब्सिडी नहीं दी जाती।
  • इसी वजह से कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ज्यादा रहती है और यह बाजार के हिसाब से जल्दी बदलती है।

टैक्स और सब्सिडी का असर

  • सरकारी टैक्स सिस्टम भी दोनों सिलेंडरों की कीमतों में बड़ा फर्क पैदा करता है।
  • घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर लगभग 5% जीएसटी लगता है। साथ ही उज्ज्वला जैसी योजनाओं के तहत सरकार सब्सिडी भी देती है।
  • कमर्शियल सिलेंडर पर 18% जीएसटी लगाया जाता है। इस पर कोई सब्सिडी नहीं मिलती। इसलिए सरकार को इससे ज्यादा राजस्व मिलता है।

महंगाई के झटके से बचाती है सरकार की 'लगाम'

  • जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस महंगी हो जाती है तो उसका असर सीधे आम लोगों पर पड़ सकता है।
  • ऐसी स्थिति में सरकार हस्तक्षेप करती है। कभी कंपनियों को घाटा सहने के लिए कहा जाता है। कभी टैक्स में बदलाव करके राहत दी जाती है।
  • इसका उद्देश्य होता है कि घरेलू उपभोक्ताओं पर महंगाई का सीधा असर कम पड़े।