शर्ट में हिडन कैमरा और वोट चोरी का खौफ! फलता पुनर्मतदान में ग्रामीणों ने खोली बाहुबलियों की पोल, दर्ज हुई 88% वोटिंग

शर्ट में हिडन कैमरा और वोट चोरी का खौफ! फलता पुनर्मतदान में ग्रामीणों ने खोली बाहुबलियों की पोल, दर्ज हुई 88% वोटिंग

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले का फलता विधानसभा क्षेत्र एक बार फिर सुर्खियों में है। गुरुवार को हुए पुनर्मतदान (Re-polling) में यहां की जनता ने जो हिम्मत दिखाई है, उसने हर किसी को चौंका दिया है। खौफ और धमकियों की जंजीरों को तोड़ते हुए फलता में करीब 88 प्रतिशत (सटीक आंकड़ा 87.90%) मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। सुबह 7 बजे से शुरू होकर शाम 6 बजे तक चली इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि ममता बनर्जी के इस गढ़ में इस बार तृणमूल कांग्रेस (TMC) का कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं था, और पूरा चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से निपट गया।

शर्ट में हिडन कैमरा और वोट चोरी की इनसाइड स्टोरी

इस पुनर्मतदान के दौरान ग्राउंड पर जो कहानियां निकलकर सामने आईं, वे किसी थ्रिलर फिल्म की स्क्रिप्ट जैसी हैं। स्थानीय मतदाताओं ने खुलकर बताया कि इससे पहले यहां किस तरह 'वोटों की चोरी' की जाती थी। 50 वर्षीय ग्रामीण गुलाम हुसैन ने आपबीती सुनाते हुए कहा, "पहले हमें खुलेआम धमकियां दी जाती थीं कि अगर टीएमसी के अलावा किसी और पार्टी को एक भी वोट मिला, तो अंजाम भुगतना होगा। हद तो तब हो गई जब उनके एजेंट अपनी शर्ट में हिडन कैमरा लगाकर बैठते थे ताकि यह देख सकें कि कौन किसे वोट दे रहा है। इसी खौफ के कारण बीते 29 अप्रैल को हम अपनी पसंद की पार्टी को वोट नहीं दे पाए थे।" हुसैन ने आगे कहा कि आज उन्होंने बिना डरे वोट डाला है और बाहुबलियों को करारा जवाब दिया है।

गायब रहे टीएमसी के बाहुबली जहांगीर खान, पत्नी ने डाला वोट

फलता के श्रीरामपुर पश्चिम दुर्गापुर प्राइमरी स्कूल बूथ पर सबकी नजरें टिकी हुई थीं। पिछले चुनाव में 29 अप्रैल को टीएमसी के बाहुबली नेता माने जाने वाले जहांगीर खान ने इसी बूथ पर अपना वोट डाला था और उन पर बूथ लूटने के गंभीर आरोप भी लगे थे। लेकिन इस बार नजारा बिल्कुल बदला हुआ था। जहांगीर खान खुद मतदान केंद्र से पूरी तरह नदारद रहे, हालांकि खबरें हैं कि उनकी पत्नी वोट डालने जरूर पहुंची थीं। इस बार पूरे इलाके में टीएमसी के झंडे और बैनर भी न के बराबर दिखाई दिए, जो इस क्षेत्र की बदलती सियासी हवा का साफ इशारा है।

गायब हुआ खौफ, भाजपा और लेफ्ट के बीच सीधा मुकाबला

टीएमसी उम्मीदवार की अनुपस्थिति में अब फलता की इस सीट पर मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (BJP) और लेफ्ट के बीच माना जा रहा है, जबकि कांग्रेस भी त्रिकोणीय संघर्ष बनाने की कोशिश में जुटी है। भाजपा कार्यकर्ता रणजीत दलुई ने उत्साहपूर्वक बताया, "आज हम यहां पूरी बहादुरी के साथ पोलिंग बूथ पर बैठे हैं। पहले जो लोग हमें अपने चुनावी कैंप तक नहीं खोलने देते थे, आज वे खुद गायब हैं।" वहीं भाजपा पदाधिकारी सोमा घोष ने भी दावा किया कि फलता के लोगों ने पहली बार बिना किसी दबाव और डर के खुलकर अपने वोट की ताकत दिखाई है।

आखिर क्यों रद्द करना पड़ा था 29 अप्रैल का चुनाव?

आपको बता दें कि फलता विधानसभा क्षेत्र में दूसरे चरण के तहत 29 अप्रैल को मतदान हुआ था। उस दौरान चुनाव में बड़े पैमाने पर धांधली और अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं। सबसे बड़ा विवाद तब खड़ा हुआ जब कई बूथों से यह रिपोर्ट आई कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) पर भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार का नाम और उनका चुनाव चिन्ह (कमल) टेप और अन्य चीजों से जानबूझकर ढंक दिया गया था। इस भारी बवाल के बाद चुनाव आयोग ने संज्ञान लेते हुए फलता का चुनाव रद्द कर दिया था और पुनर्मतदान का आदेश दिया था।

चुनाव आयोग के मुताबिक, इस बार के पुनर्मतदान में पुख्ता सुरक्षा इंतजामों के कारण कहीं से भी किसी अप्रिय घटना, हिंसा या ईवीएम में छेड़छाड़ की कोई शिकायत नहीं मिली है। अब हर किसी की नजरें रविवार को आने वाले चुनावी नतीजों पर टिकी हैं।

 

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