RSS पर बैन की मांग करने वाले अमेरिकी संगठन को भारत का दो टूक जवाब, विदेश मंत्रालय ने बताया प्रोपेगेंडा
भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक रिश्तों के बीच एक बार फिर विदेशी धरती से भारतीय संस्थाओं को निशाना बनाने का मामला सामने आया है। हाल ही में एक अमेरिकी संगठन द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर प्रतिबंध लगाने की बेतुकी मांग किए जाने के बाद भारत सरकार ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस विदेशी संगठन के प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज करते हुए साफ कर दिया है कि ऐसे संगठनों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई विश्वसनीयता नहीं है और न ही उन्हें भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने का कोई अधिकार है। सरकार के इस दो टूक पलटवार ने उन तमाम विदेशी ताकतों को कड़ा संदेश दिया है जो भारत की सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी संस्थाओं के खिलाफ प्रोपेगेंडा फैलाने का काम करती हैं।
क्या है पूरा मामला और अमेरिकी संगठन की साजिश?
जानकारी के अनुसार, अमेरिका स्थित एक संगठन ने हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को लेकर एक पूर्वाग्रह से ग्रसित रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें संघ को निशाना बनाते हुए उस पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी। इस अमेरिकी संगठन का दावा था कि संघ की विचारधारा और गतिविधियां समाज में कथित तौर पर विभाजन पैदा करती हैं। हालांकि, भारतीय नीति-निर्माताओं और अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों ने इस मांग को सिरे से खारिज करते हुए इसे भारत की छवि धूमिल करने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया है। जानकारों का मानना है कि जैसे-जैसे वैश्विक मंच पर भारत का आर्थिक और रणनीतिक कद बढ़ रहा है, वैसे-वैसे कुछ विदेशी लॉबी और संगठन भारत की मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था और राष्ट्रवादी संगठनों को बदनाम करने के लिए ऐसे हथकंडों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
भारत सरकार का कड़ा पलटवार: "ऐसे संगठनों की कोई विश्वसनीयता नहीं"
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ताओं और शीर्ष अधिकारियों ने इस नापाक मांग का कड़ा जवाब देते हुए स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक स्वैच्छिक और सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन है, जो देश के निर्माण, सामाजिक सेवा और आपदा प्रबंधन जैसे कार्यों में दशकों से सक्रिय भूमिका निभा रहा है। भारत ने दो टूक शब्दों में कहा है कि जमीन की वास्तविक स्थिति और भारतीय संस्कृति से पूरी तरह अनजान कुछ विदेशी संगठन जब ऐसी बेबुनियाद मांगें उठाते हैं, तो उनकी खुद की क्रेडिबिलिटी (विश्वसनीयता) शून्य हो जाती है। भारत एक संप्रभु और मजबूत लोकतांत्रिक देश है, जहां की संस्थाएं और कानून पूरी तरह पारदर्शी तरीके से अपने संविधान के दायरे में काम करते हैं।
वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती ताकत से क्यों परेशान हैं विदेशी लॉबी?
विश्लेषकों का यह भी कहना है कि आज का भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति और आत्मनिर्भरता के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत की इसी बढ़ती ताकत और सांस्कृतिक पुनर्जागरण से कई अंतरराष्ट्रीय ताकतें असहज महसूस करती हैं। यही कारण है कि वे समय-समय पर आरएसएस जैसी राष्ट्रवादी संस्थाओं को निशाना बनाकर भारत की लोकतांत्रिक छवि पर सवालिया निशान लगाने का असफल प्रयास करती हैं।