मानसून सत्र के हंगामे पर किरेन रिजिजू का तीखा हमला: राहुल गांधी और विपक्ष पर साधा निशाना
संसद के हालिया मानसून सत्र के दौरान दोनों सदनों में हुए भारी हंगामे और कार्यवाही बाधित होने के बाद राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। सरकार का आरोप है कि विपक्ष ने बिना किसी ठोस मुद्दे के केवल व्यवधान पैदा करने के लिए संसद का बहुमूल्य समय और जनता का पैसा बर्बाद किया। इस गतिरोध के चलते कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य और जनहित के मुद्दे अधर में लटक गए, जिसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
'दिमागी नक्सल' और जंतर-मंतर के मुद्दों पर तीखे सवाल
किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी और विपक्षी दलों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि संसद को बहस और चर्चा का मंच बनाने के बजाय विपक्ष ने इसे राजनीतिक लाभ और विरोध प्रदर्शन का अखाड़ा बना दिया है। रिजिजू ने विभिन्न मुद्दों का हवाला देते हुए विपक्ष के रुख को आड़े हाथों लिया और कहा कि इस तरह का रवैया देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा के अनुकूल नहीं है। सरकार का यह भी कहना है कि विपक्ष के पास सदन में चर्चा के दौरान अपने तर्कों के समर्थन में ठोस आधार नहीं था, जिसके चलते वे लगातार हंगामे का रास्ता चुनते रहे।
चंदा चोरी और राजनीतिक आरोपों की बौछार
संसद के बाहर और अंदर चल रहे इस राजनीतिक संघर्ष में वित्तीय अनियमितताओं और चंदे के मामलों को लेकर भी आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष के नेताओं पर निशाना साधते हुए राजनीतिक फंडिंग और अन्य मुद्दों पर गंभीर सवाल खड़े किए। सत्ता पक्ष का मानना है कि विपक्ष केवल जनता का ध्यान भटकाने के लिए ऐसे हथकंडे अपना रहा है, जबकि सरकार देश के विकास और पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ रही है। मानसून सत्र के इस तरह हंगामे की भेंट चढ़ जाने से देश के राजनीतिक गलियारों में यह बहस छिड़ गई है कि क्या भविष्य में संसद के सुचारू संचालन के लिए कोई कड़े नियम बनाने की आवश्यकता है।