विदेश मंत्री एस. जयशंकर और सर्गेई लावरोव की बैठक के बाद MEA ने दिया बड़ा अपडेट
रूस की सेना (Russian Army) में धोखे से या अनुबंध के जाल में फंसकर युद्ध के मोर्चे पर भेजे गए भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वतन वापसी को लेकर एक बार फिर भारत सरकार ने बड़ा और स्पष्ट बयान जारी किया है। हाल ही में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव (Sergei Lavrov) के बीच हुई उच्चस्तरीय कूटनीतिक बैठक के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्थिति साफ की है। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता ने जानकारी दी है कि रूसी सेना के विभिन्न सहायता विभागों या कॉम्बैट यूनिट्स में फंसे कुल 69 भारतीय नागरिकों की सुरक्षित रिहाई और उनकी जल्द से जल्द भारत वापसी के लिए रूस की सरकार के साथ गहन और निरंतर बातचीत अंतिम चरण में चल रही है। मॉस्को में हुई इस अहम द्विपक्षीय वार्ता के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि रूस में फंसे सभी भारतीय नौजवानों को बहुत जल्द कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताओं को पूरा कर सुरक्षित स्वदेश वापस लाया जाएगा।
#1. रूस की सेना में फंसे भारतीयों का मामला और विदेश मंत्रालय का ताजा अपडेट
विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, भारत सरकार रूस में फंसे अपने नागरिकों की सुरक्षा और उनकी भारत वापसी को लेकर पहले दिन से ही अत्यंत गंभीर और संवेदनशील बनी हुई है। शुरुआत में जब यह मामला सामने आया था कि एजेंटों के झांसे में आकर और लुभावने प्रलोभनों के चक्कर में कई भारतीय रूस पहुंच गए थे और उन्हें अनजाने में रूसी सेना के साजो-सामान या सहायक पदों पर तैनात कर दिया गया, तब से लेकर अब तक भारत सरकार ने मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास (Indian Embassy in Moscow) और रूसी रक्षा मंत्रालय के समक्ष इस मुद्दे को कड़ाई से उठाया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपनी रूस यात्रा के दौरान रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव के सामने इस गंभीर मुद्दे को विशेष रूप से उठाया और मांग की कि जितने भी भारतीय अभी भी वहां फंसे हुए हैं, उनके अनुबंध (Contracts) को समय से पहले समाप्त कर उन्हें बिना किसी कानूनी अड़चन के तुरंत भारत डिपोर्ट किया जाए।
#1. रूस-यूक्रेन युद्ध के मोर्चों पर फंसे युवाओं की पहचान और सुरक्षित निकासी
विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, कुल 69 ऐसे भारतीय नागरिकों की आधिकारिक पहचान की जा चुकी है जो रूस के अलग-अलग सैन्य छावनियों या युद्ध क्षेत्रों के करीब फंसे हुए थे। इन युवाओं में से कई लोगों ने भारत वापस लौटने के लिए सोशल मीडिया और वीडियो संदेशों के जरिए गुहार लगाई थी, जिसके बाद सरकार ने तुरंत ऐक्शन लेते हुए उन तक कूटनीतिक मदद पहुंचाई। मॉस्को में भारतीय दूतावास के अधिकारी लगातार रूसी सैन्य अधिकारियों के संपर्क में हैं ताकि जो युवा वहां से निकलना चाहते हैं, उन्हें सुरक्षित स्थानों पर शरण दी जा सके और उनके कागजात तैयार किए जा सकें। हालांकि, युद्ध की वर्तमान विकट परिस्थितियों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण थोड़ी तकनीकी देरी जरूर हुई है, लेकिन रूसी प्रशासन ने भारतीय पक्ष को आश्वस्त किया है कि सभी 69 नागरिकों की वापसी की प्रक्रिया पर पूरी तेजी से काम किया जा रहा है।
#1. फर्जी एजेंटों और मानव तस्करों का जाल: युवाओं को नौकरी का झांसा देकर युद्ध क्षेत्र में भेजना
यह पूरा गंभीर संकट उस समय शुरू हुआ जब देश के अलग-अलग राज्यों (विशेषकर उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और गुजरात) के भोले-भाले युवाओं को सोशल मीडिया और यूट्यूब विज्ञापनों के जरिए रूस में 'सुरक्षित गार्ड' या 'सैनिक हेल्पर' की हाई-सैलरी वाली नौकरियों का लालच दिया गया। इन ठग एजेंटों और मानव तस्करी (Human Trafficking) करने वाले सिंडिकेट ने युवाओं को पर्यटकों के रूप में रूस बुलाया और वहां पहुंचने पर उनके पासपोर्ट व दस्तावेज अपने कब्जे में लेकर उन्हें धोखे से रूसी सेना के अनुबंध पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर कर दिया। कई युवाओं को तो बिना उचित सैन्य प्रशिक्षण के ही रूस-यूक्रेन युद्ध के संवेदनशील मोर्चों पर धकेल दिया गया, जहां उन्हें भारी जानमाल के जोखिम का सामना करना पड़ा। इस मामले के उजागर होने के बाद से भारत की केंद्रीय जांच एजेंसियों (CBI) ने देश भर में कई बड़े ट्रैवल एजेंटों और रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए कई गिरफ्तारियां भी की हैं।
#1. भारत सरकार की कड़ी चेतावनी: नागरिकों के लिए एडवाइजरी और सख्त कदम
इस पूरे प्रकरण से सबक लेते हुए भारत के विदेश मंत्रालय ने एक बार फिर सभी नागरिकों और युवाओं के लिए कड़ी एडवाइजरी जारी की है। सरकार ने स्पष्ट रूप से चेताया है कि विदेशी धरती पर नौकरी या ऊंचे वेतन के प्रस्तावों को स्वीकार करने से पहले संबंधित कंपनी, एजेंट और वीज़ा नियमों की प्रामाणिकता की पूरी जांच अवश्य कर लें। विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास लगातार ऐसे अंतरराष्ट्रीय एजेंटों पर नजर बनाए हुए हैं जो रूस या अन्य युद्धग्रस्त देशों में युवाओं को भेजने का अवैध धंधा चला रहे हैं। रूस के साथ शीर्ष स्तर पर हुई इस ताजा कूटनीतिक वार्ता के बाद अब यह पूरी तरह तय माना जा रहा है कि फंसे हुए सभी 69 भारतीय सुरक्षित अपने घरों को लौट आएंगे, जिससे उनके परिवारों ने भी राहत की सांस ली है।