कश्मीरी पंडितों को किया टारगेट, टेररिस्ट संगठन ULC के खत में जान से मारने की धमकी
कश्मीर घाटी की वादियों में एक बार फिर से दहशत का काला साया गहराता हुआ नजर आ रहा है, जहां सुरक्षा एजेंसियों और आम नागरिकों की नींद उड़ा देने वाली एक बेहद सनसनीखेज और खतरनाक साजिश बेनकाब हुई है। प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक नए और गुप्त रूप से सक्रिय हुए फ्रंट या आतंकी संगठन 'यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट' (ULC) ने घाटी में रह रहे कश्मीरी पंडितों को सीधे तौर पर निशाना बनाने का नापाक फरमान जारी किया है। सोशल मीडिया और विभिन्न स्थानीय माध्यमों तेजी से वायरल हो रहे इस खौफनाक धमकी भरे खत में कश्मीरी पंडित कर्मचारियों और अल्पसंख्यकों को खुलेआम जान से मारने की धमकियां दी गई हैं, जिससे एक बार फिर से घाटी के ट्रांजिट कैंपों और रिहायशी इलाकों में डर का माहौल पैदा हो गया है। एक तरफ जहां विस्थापित कश्मीरी पंडित कर्मचारी पहले से ही अपनी सुरक्षा और ट्रांजिट फ्लैट्स में तुरंत शिफ्ट किए जाने की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं इस नए आतंकी खत के सामने आने के बाद स्थिति और अधिक विस्फोटक हो गई है, जिससे सुरक्षाबलों और खुफिया एजेंसियों ने घाटी में अलर्ट स्तर को और ज्यादा बढ़ा दिया है।
आतंकी संगठन ULC का नया धमकी भरा खत और कश्मीरी पंडितों के खिलाफ रची जा रही साजिश
हाल ही में सामने आए इस धमकी भरे पत्र में आतंकी संगठन ULC ने उन तमाम कश्मीरी पंडितों और बाहरी लोगों को खुली चेतावनी दी है जो सरकार के प्रधानमंत्री पैकेज या अन्य योजनाओं के तहत घाटी में नौकरी कर रहे हैं या व्यवसाय चला रहे हैं। पत्र की भाषा बेहद आक्रामक और हिंसक है, जिसमें यह दावा किया गया है कि वे घाटी में किसी भी बाहरी या अल्पसंख्यक को बसने नहीं देंगे और उन्हें चुन-चुनकर निशाना बनाया जाएगा। इस तरह की धमकियों का मुख्य उद्देश्य घाटी में धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही सामान्य स्थिति को बिगाड़ना, डर का माहौल पैदा करना और धार्मिक अल्पसंख्यकों के मन में असुरक्षा की भावना को इस कदर बढ़ाना है कि वे मजबूर होकर घाटी छोड़कर वापस चले जाएं। हालांकि सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस इस बात की गहराई से तकनीकी जांच कर रही हैं कि यह खत असल में जमीन पर सक्रिय किसी स्लीपर सेल द्वारा जारी किया गया है या फिर यह पाकिस्तान में बैठे आतंकियों की किसी मनोवैज्ञानिक युद्ध (Psychological Warfare) का हिस्सा है, लेकिन इसके बावजूद किसी भी संभावित खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है।
टारगेट किलिंग का पुराना खौफ और घाटी में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर उठते गंभीर सवाल
कश्मीरी पंडित समुदाय के लिए पिछले कुछ साल किसी बुरे सपने से कम नहीं रहे हैं, क्योंकि आतंकियों ने कई मौकों पर सरकारी कार्यालयों, दुकानों और यहां तक कि उनके घरों में घुसकर निर्दोष अल्पसंख्यकों की बेरहमी से हत्या की है। जब भी घाटी में शांति बहाली के दावे किए जाते हैं, इस तरह के आतंकी संगठन अपनी उपस्थिति दर्ज कराने और डर का साम्राज्य कायम करने के लिए टारगेट किलिंग (Target Killing) की वारदातों को अंजाम देते हैं। इस नए धमकी भरे खत ने कश्मीरी पंडितों के उस पुराने दर्द को ताजा कर दिया है, जिसमें वे लगातार यह गुहार लगा रहे हैं कि जब तक उन्हें पूरी तरह सुरक्षित परिसरों और चारदीवारी वाले ट्रांजिट फ्लैट्स में नहीं बसाया जाता, तब तक उनकी जान पर मंडराता खतरा हमेशा बना रहेगा। इस बीच, राजनीतिक दलों और स्थानीय संगठनों ने भी इस कायराना हरकत की कड़ी निंदा की है और सरकार से मांग की है कि प्रत्येक कश्मीरी पंडित कर्मचारी की सुरक्षा के लिए चाक-चौबंद और व्यक्तिगत सुरक्षा इंतजाम किए जाएं ताकि किसी भी अनहोनी को समय रहते रोका जा सके।
सुरक्षा एजेंसियों की हाई-लेवल बैठक और आतंकवादियों के खिलाफ बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू
इस सनसनीखेज धमकी के सामने आते ही श्रीनगर और अन्य जिलों में तैनात सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के शीर्ष अधिकारियों ने एक उच्चस्तरीय आपातकालीन बैठक बुलाई है, जिसमें सुरक्षा रणनीतियों की नए सिरे से समीक्षा की गई है। खुफिया इनपुट्स के आधार पर घाटी के संवेदनशील इलाकों, ट्रांजिट कैंपों और आवाजाही के रास्तों पर गश्त बढ़ा दी गई है, और संदिग्ध तत्वों पर पैनी नजर रखी जा रही है ताकि आतंकवादियों के किसी भी नापाक मंसूबे को उनके जन्म लेते ही कुचला जा सके। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वे इस तरह की गीदड़भभकियों से डरने वाले नहीं हैं और घाटी में अमन-चैन को बाधित करने वाले हर एक आतंकी और उसके मददगार को बहुत जल्द कानून के शिकंजे में कस दिया जाएगा। आम नागरिकों और कश्मीरी पंडित परिवारों से भी सतर्क रहने की अपील की गई है, साथ ही प्रशासन ने उन्हें यह पूरा भरोसा दिलाया है कि उनकी सुरक्षा सरकार की सबसे पहली और सर्वोच्च प्राथमिकता है, जिसके लिए सुरक्षाबल 24 घंटे पूरी मुस्तैदी के साथ तैनात हैं।