अब कोचिंग सेंटर खोलने के लिए लेनी पड़ेगी सरकार से परमिशन, फीस भी देनी होगी
दिल्ली और लखनऊ के कोचिंग संस्थानों में हुए हालिया दर्दनाक हादसों ने सिस्टम की बड़ी खामियों को उजागर किया है। इन घटनाओं से कड़ा सबक लेते हुए हरियाणा सरकार ने राज्य के लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों को बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की कैबिनेट ने शिक्षा के नाम पर होने वाले व्यापार और असुरक्षित माहौल पर लगाम कसने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। सरकार का सीधा फोकस अब छात्रों की सुरक्षा पारदर्शिता और उन्हें मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं पर है।
भ्रामक विज्ञापनों का खेल खत्म और समय की पाबंदी
अक्सर देखा जाता है कि कोचिंग संस्थान बड़े-बड़े दावे और झूठे वादे करके माता-पिता को फंसाते हैं। नए नियमों के मुताबिक अब कोई भी सेंटर ऐसे भ्रामक प्रचार नहीं कर सकेगा। एक और बड़ा बदलाव यह किया गया है कि स्कूल या कॉलेज के समय पर कोचिंग की कक्षाएं नहीं चलेंगी। इसके अलावा हर संस्थान को अपनी वेबसाइट पर कोर्स फीस स्ट्रक्चर एक बैच में बच्चों की संख्या और पढ़ाने वाले शिक्षकों के बायोडाटा जैसी हर छोटी-बड़ी जानकारी सार्वजनिक करनी होगी।
सुविधाओं और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं
छात्रों से मोटी फीस वसूलने वाले संस्थानों को अब उन्हें उचित सुविधाएं भी देनी होंगी। हर कोचिंग सेंटर में पर्याप्त रोशनी साफ पीने का पानी और लड़के-लड़कियों के लिए अलग-अलग वाशरूम होना अनिवार्य है। बच्चों की सुरक्षा के लिए बिल्डिंग में फायर सेफ्टी और फर्स्ट-एड का होना जरूरी है। इसके साथ ही लाइब्रेरी पार्किंग स्मार्ट बोर्ड वाई-फाई कंप्यूटर लैब और दिव्यांग छात्रों के लिए बाधारहित इमारत का निर्माण सुनिश्चित करना होगा।
बिना पोर्टल पर आए नहीं चलेगा काम
गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक में 'हरियाणा निजी कोचिंग संस्थान (पंजीकरण और विनियमन) नियम 2026' को हरी झंडी दे दी गई। अब चाहे कोई नया कोचिंग सेंटर खोलना चाहता हो या पहले से चला रहा हो सभी को सरकार के एक विशेष पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना ही होगा।
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रजिस्ट्रेशन के लिए 10 हजार रुपये की फीस तय की गई है जिसका भुगतान सिर्फ ऑनलाइन होगा।
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सभी दस्तावेज सही होने पर 30 दिन के भीतर तीन साल की वैधता वाला लाइसेंस मिल जाएगा।
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लाइसेंस खत्म होने से एक महीने पहले 5 हजार रुपये की फीस देकर इसे रिन्यू कराना होगा।
बिल्डिंग की मजबूती और स्टाफ का वेरिफिकेशन जरूररी
पैसे कमाने के चक्कर में जर्जर इमारतों में चल रहे सेंटरों पर भी शिकंजा कसा गया है। संचालकों को यह साबित करना होगा कि इमारत की संरचना पूरी तरह से मजबूत है और उसमें आग से बचाव के पुख्ता इंतजाम हैं। बिल्डिंग अपनी है या किराए की इसकी जानकारी भी देनी होगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सेंटर में काम करने वाले हर शिक्षक और कर्मचारी का चरित्र प्रमाण पत्र जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है ताकि छात्रों को सुरक्षित माहौल मिल सके।