संसद मार्ग थाने के बाहर राहुल गांधी का 6 घंटे का हाई-वोल्टेज धरना: पैलेट गन मामले में एफआईआर दर्ज होने तक क्या-क्या हुआ?

संसद मार्ग थाने के बाहर राहुल गांधी का 6 घंटे का हाई-वोल्टेज धरना: पैलेट गन मामले में एफआईआर दर्ज होने तक क्या-क्या हुआ?

दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र साहिल लोचब (Sahil Lochab) को न्याय दिलाने और उसकी शिकायत पर एफआईआर दर्ज कराने के लिए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर किया गया धरना राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बन गया। पिछले महीने 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान गंभीर रूप से घायल हुए 19 वर्षीय साहिल और उनकी मां को लेकर राहुल गांधी थाने पहुंचे थे। पुलिस द्वारा शुरुआती आनाकानी के बाद, करीब छह से आठ घंटे चले इस मैराथन धरने और उच्चाधिकारियों के साथ बैठकों के दौर के बाद आखिरकार दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज किया।

सुबह थाने पहुंचने से लेकर धरने पर बैठने तक की शुरुआत

घटना की शुरुआत तब हुई जब साहिल ने आरोप लगाया कि 14 अगस्त को लिखित शिकायत देने और लगातार फॉलोअप करने के बावजूद पुलिस ने उनकी एफआईआर दर्ज नहीं की थी। इसके बाद राहुल गांधी ने हस्तक्षेप किया और साहिल तथा उनकी मां को लेकर सबसे पहले मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन और फिर संसद मार्ग स्थित केंद्रीय जिला पुलिस उपायुक्त (DCP) कार्यालय पहुंचे। जब वहां कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और पुलिस अधिकारियों ने असमर्थता जताई, तो राहुल गांधी ने थाने के प्रांगण में ही धरने पर बैठने का ऐलान कर दिया। देखते ही देखते यह जगह बड़े राजनीतिक विरोध प्रदर्शन का अड्डा बन गई।

कांग्रेस नेताओं का जमावड़ा और सुरक्षा के कड़े इंतजाम

जैसे ही राहुल गांधी के धरने पर बैठने की खबर फैली, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, वरिष्ठ नेता जयराम रमेश, अधीर रंजन चौधरी और कुमारी सैलजा समेत कई दिग्गज नेता और सैकड़ों कार्यकर्ता संसद मार्ग थाने के बाहर पहुंच गए। स्थिति को नियंत्रित करने और भीड़ को बढ़ने से रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने तुरंत रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और अर्धसैनिक बलों को तैनात कर दिया। थाने के गेट बंद कर दिए गए और आसपास के रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी गई। इस दौरान राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पुलिस पर 'ऊपर से आदेश' थे कि इस मामले में कोई केस दर्ज न किया जाए।

बैठकों का दौर और अंततः एफआईआर दर्ज होना

दोपहर करीब 12:30 बजे से शाम 6:30 बजे के बीच संयुक्त पुलिस आयुक्त (नई दिल्ली) नूपुर प्रसाद, डीसीपी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ राहुल गांधी, साहिल और उनके वकीलों की कई दौर की लंबी बैठकें चलीं। अंततः पुलिस ने शाम को अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 118 (खतरनाक हथियारों से चोट पहुंचाना) और 125 (मानव जीवन को खतरे में डालने वाला कृत्य) के तहत एफआईआर दर्ज कर ली। एफआईआर दर्ज होने के बाद राहुल गांधी ने इसे 'न्याय की ओर पहला कदम' बताया और अपना धरना समाप्त किया।