आसमानी आफत: ड्रेनेज फेल, करंट और खुले मैनहोल ने ली 9 की जान, प्रशासन के दावों की खुली पोल

आसमानी आफत: ड्रेनेज फेल, करंट और खुले मैनहोल ने ली 9 की जान, प्रशासन के दावों की खुली पोल

महाराष्ट्र में मानसून की दस्तक के साथ ही लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने आम जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। इस भारी बारिश ने न केवल मौसम का मिजाज बदला है, बल्कि स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों के मानसून पूर्व इंतजामों और तैयारियों की भी पोल खोलकर रख दी है। राज्य के कई प्रमुख शहरों में ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह फेल नजर आ रहा है। सड़कों पर भारी जलभराव, बिना ढक्कन के खुले मैनहोल, मौत बनकर लटकते बिजली के नंगे तार, जर्जर इमारतें और बिना किसी सुरक्षा बैरिकेडिंग के चल रहे निर्माण कार्य इस मानसूनी सीजन में आम जनता के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। पिछले कुछ ही दिनों में राज्य के अलग-अलग हिस्सों में हुए हादसों में नौ लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जिसने जिम्मेदार प्रशासनिक विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर और तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं।

कल्याण और भिवंडी में करंट ने ली दो युवकों की जान

बिजली विभाग की घोर लापरवाही का सबसे भयानक रूप कल्याण-डोंबिवली और भिवंडी इलाके में देखने को मिला। कल्याण-डोंबिवली क्षेत्र में 26 वर्षीय युवा शशि राहुल चक्र खुले बिजली के तार की चपेट में आ गया। भारी बारिश के चलते सड़क पर घुटनों तक पानी भरा हुआ था, जिसमें ऊपर से टूटा हुआ बिजली का लाइव तार गिरा था। पूरे पानी में करंट दौड़ रहा था, जिससे अनजान शशि जैसे ही पानी में उतरा, उसे जोरदार झटका लगा और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि बिजली विभाग को तार टूटने की सूचना पहले ही दी गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसा ही एक और दर्दनाक हादसा भिवंडी में हुआ, जहां 28 वर्षीय मुस्तफा शेख सड़क पर पड़े खुले बिजली के तार की चपेट में आ गया और बारिश के पानी में फैले करंट के कारण उसने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया।

मुंबई में खुले मैनहोल और पेड़ गिरने से मचा कोहराम

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में बीएमसी (BMC) के दावों की हकीकत उस वक्त सामने आई जब 55 वर्षीय असलम शेख सड़क पर बने एक खुले मैनहोल में गिर गए। भारी जलभराव के कारण वह मैनहोल पानी में पूरी तरह छिप चुका था। सड़क पार करते समय असलम सीधे गटर के तेज बहाव में बह गए और बाद में उनका शव मिला। वहीं, एक अन्य हृदयविदारक घटना में तेज बारिश और हवा के कारण एक भारी-भरकम पेड़ अचानक एक स्कूल बस पर गिर गया। इस हादसे में 11 वर्षीय स्कूली छात्र विहान श्रीवास्तव की मौत हो गई, जबकि कई अन्य बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए। यह घटना मॉनसून से पहले पेड़ों की छंटाई के बड़े-बड़े दावों पर सवालिया निशान लगाती है।

ठाणे और पालघर में लापरवाही ने ली दो और जिंदगियां

ठाणे के मुंब्रा इलाके से भी करंट लगने की एक दर्दनाक खबर सामने आई, जहां 17 वर्षीय नाबालिग लड़की आलिया जलभराव के बीच सड़क पार करते समय किसी खंभे या खुले तार से फैले करंट की चपेट में आ गई और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। उधर, पालघर जिले के चहाडे गांव में 28 वर्षीय किशन वरठा नदी के तेज बहाव में बह गया। किशन मछली पकड़ने के लिए नदी में उतरा था, लेकिन लगातार हो रही भारी बारिश के कारण उफान पर आई नदी के तेज वेग को वह संभाल नहीं सका। अगले दिन उसका शव बरामद किया गया। प्रशासन की लगातार चेतावनियों के बावजूद लोग अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं।

जर्जर इमारतों का कहर: वालकेश्वर और कामोठे में गिरे स्लैब

लगातार हो रही बारिश के कारण पुरानी और कमजोर इमारतों के ढहने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। दक्षिण मुंबई के पॉश इलाके वालकेश्वर में एक बेहद पुरानी इमारत का स्लैब अचानक भरभराकर गिर गया, जिसकी चपेट में आने से 51 वर्षीय संतोष रामचंद्र भरसकर की मलबे में दबकर मौत हो गई। इस घटना ने मुंबई की जर्जर इमारतों के स्ट्रक्चरल ऑडिट और उनके रखरखाव की फाइलों को दोबारा खोल दिया है। ठीक ऐसा ही एक और हादसा पनवेल के कामोठे इलाके में हुआ, जहां 45 वर्षीय सुरेश लोखंडे अपने घर के अंदर मौजूद थे, तभी लगातार बारिश के सीपेज के कारण मकान का स्लैब गिर गया और मलबे में दबने से उन्होंने दम तोड़ दिया।

पुणे में मासूम की मौत: बिना बैरिकेडिंग का गड्ढा बना काल

विकास और निर्माण कार्यों के नाम पर बरती जा रही लापरवाही का सबसे दुखद उदाहरण पुणे के लोणी काळभोर इलाके में देखने को मिला। यहां महज दो वर्ष का मासूम सोहम लखन कसबे अपने घर के बाहर खेल रहा था। इलाके में सीवेज और बारिश के पानी की निकासी के लिए ठेकेदार द्वारा गहरे गड्ढे खोदे गए थे, लेकिन उन्हें बिना किसी बैरिकेडिंग या चेतावनी बोर्ड के खुला छोड़ दिया गया था। बारिश के पानी से लबालब भरे होने के कारण गड्ढे की गहराई का अंदाजा नहीं लग सका और खेलते-खेलते मासूम सोहम उसमें गिर गया, जिससे डूबने से उसकी मौत हो गई। इस मामले में पुलिस ने अज्ञात ठेकेदार के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज किया है।

सबसे बड़ा सवाल: इन नौ मौतों का असली जिम्मेदार कौन?

इन सभी नौ दर्दनाक हादसों में भले ही मौत का तात्कालिक कारण अलग-अलग नजर आता हो, लेकिन इन सबके पीछे की मुख्य वजह एक ही है—सिस्टम की घोर लापरवाही। कहीं खुले बिजली के तार मौत का जाल बने हुए हैं, तो कहीं बिना ढक्कन के मैनहोल लोगों को निगल रहे हैं। मानसून से पहले सुरक्षा इंतजामों की अनदेखी और अधूरे निर्माण कार्यों ने मासूमों की जान ली है। आज सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर समय रहते इन खतरनाक जगहों की मरम्मत, निरीक्षण और सुरक्षा व्यवस्था मुस्तैद की गई होती, तो क्या इन नौ नागरिकों की जान बचाई नहीं जा सकती थी? स्थानीय निकायों और प्रशासन को अब इन मौतों की जवाबदेही लेनी ही होगी।