चारों तक बर्फ, खतरनाक पहाड़ पर सेना के पायलटों ने दिखाया दम, मौत के मुंह से बचा लाए जिंदगी

चारों तक बर्फ, खतरनाक पहाड़ पर सेना के पायलटों ने दिखाया दम, मौत के मुंह से बचा लाए जिंदगी

भारतीय सेना के शौर्य, पराक्रम और मानवीय संवेदनाओं के किस्से अक्सर पूरी दुनिया में मिसाल कायम करते हैं, और एक बार फिर हमारे वीर सैनिकों ने यह साबित कर दिया है कि उनके लिए देश के हर एक नागरिक की जान सबसे ऊपर है। देश के सबसे दुर्गम और बर्फीले इलाकों में से एक, जहां सांस लेना तक दूभर हो जाता है, वहां भारतीय सेना के एविएशन पायलटों ने अकल्पनीय साहस का परिचय देते हुए एक ऐसा रेस्क्यू ऑपरेशन अंजाम दिया है जिसे देखकर हर किसी का सीना गर्व से चौड़ा हो जाए। समुद्र तल से करीब 18600 फीट की ऊंचाई पर स्थित एक बेहद खतरनाक और जानलेवा पहाड़ की चोटी पर फंसे व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए सेना के पायलटों ने मौत को नजदीक से चुनौती दी। इस ऊंचाई पर न केवल आक्सीजन की भारी कमी होती है, बल्कि बर्फीले तूफान और खड़ी ढलानों के कारण हेलीकॉप्टर को लैंड करना या स्थिर रखना किसी भी पायलट के लिए सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा होती है। इसके बावजूद, अपनी जान की परवाह किए बिना भारतीय सेना के इन देवदूतो ने आसमान के रास्ते वह कर दिखाया जो नामुमकिन सा लग रहा था। इस साहसिक अभियान की गूंज अब पूरे देश में सुनाई दे रही है, जो यह याद दिलाती है कि कैसे हमारे सुरक्षा बल हर परिस्थिति में जनता की ढाल बनकर खड़े रहते हैं।

हिमालय के बेहद ऊंचे और बर्फीले क्षेत्रों में मौसम कब अपना भयंकर रूप ले ले, इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। जिस इलाके में यह रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया, वहां का तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे रहता है और हवा का दबाव इतना कम होता है कि सामान्य व्यक्ति कुछ ही मिनटों में दम तोड़ सकता है। चारों तरफ मीलों तक फैली बर्फ की चादर और खड़ी चट्टानें इस इलाके को किसी खतरनाक भूलभुलैया की तरह बना देती हैं, जहां गलती की कोई गुंजाइश नहीं होती। ऐसे भीषण और दुर्गम भौगोलिक हालातों में जब एक व्यक्ति जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहा था, तब पारंपरिक रेस्क्यू टीमों के लिए वहां पैदल पहुंचना असंभव साबित हो रहा था। ऐसी स्थिति में केवल भारतीय वायु सेना और थल सेना के एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर्स (ALH) और उनके हुनरमंद पायलट ही एकमात्र उम्मीद बचे थे। पायलटों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि अत्यधिक ऊंचाई के कारण हेलीकॉप्टर का इंजन पूरी क्षमता से काम नहीं कर पाता और बर्फीली हवाओं के झोंके मशीन को अनियंत्रित करने की कोशिश करते हैं। इन तमाम प्राकृतिक बाधाओं को पार करते हुए हमारे जांबाज पायलटों ने अपनी असाधारण तकनीकी दक्षता का परिचय दिया।

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान का वह मंजर बेहद रोमांचक और रोंगटे खड़े करने वाला था, जहां एक तरफ गहरी खाई और दूसरी तरफ कोहरे तथा बर्फ से ढकी खतरनाक चट्टानें थीं। सेना के पायलटों ने अत्यधिक जोखिम उठाते हुए अपने हेलीकॉप्टर को उस खतरनाक पहाड़ की ढलान पर कुछ ही पलों के लिए इस तरह होवर (Hover) किया कि मशीन का संतुलन जरा सा भी बिगड़ता तो विमान सीधे खाई में जा सकता था। कॉकपिट में बैठे कैप्टन और उनकी टीम ने सूझबूझ और असाधारण मानसिक दृढ़ता का परिचय देते हुए एयरक्राफ्ट को पूरी तरह नियंत्रित रखा। जमीन पर फंसे हुए व्यक्ति तक पहुंचने के लिए विंच केबल का इस्तेमाल किया गया और बेहद सटीकता के साथ उसे सुरक्षित रूप से हेलीकॉप्टर के अंदर खींच लिया गया। यह कोई आम उड़ान नहीं थी, बल्कि यह एक ऐसा लाइव ऑपरेशन था जिसमें एक-एक सेकंड की कीमत जान बचाने के बराबर थी। जब सुरक्षित रेस्क्यू के बाद हेलीकॉप्टर ने बेस कैंप की तरफ वापसी की उड़ान भरी, तो वहां मौजूद हर सैन्य अधिकारी और साथी सैनिकों की आंखें नम थीं और सभी के मुंह से इन पायलटों के लिए गर्व के शब्द निकल रहे थे।

भारतीय सेना हमेशा से देश की सीमाओं की रक्षा करने के साथ-साथ आपदा प्रबंधन, प्राकृतिक आपदाओं और संकट के समय आम जनता की मदद करने में सबसे आगे रही है। 18,600 फीट की उस बर्फीली चोटी पर चलाया गया यह ऐतिहासिक रेस्क्यू ऑपरेशन इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि हमारे सैनिक देश के हर कोने में नागरिक जीवन की रक्षा के लिए अपनी जान दांव पर लगाने से कभी पीछे नहीं हटते। इस घटना के सोशल मीडिया पर आने के बाद से ही देश भर के आम नागरिक, राजनेता और युवा इन जांबाज पायलटों की बहादुरी को सलाम कर रहे हैं। रक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि भारतीय सेना के पास दुनिया के सबसे बेहतरीन और प्रशिक्षित पायलट मौजूद हैं, जो किसी भी विषम परिस्थिति में अपने अदम्य साहस और आधुनिक तकनीक के बल पर असंभव को भी संभव बना सकते हैं। यह गाथा आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी कि देश की खातिर खाकी और वर्दी पहनने वाले लोग किस तरह हर मुश्किल घड़ी में देशवासियों के लिए भगवान का दूसरा रूप साबित होते हैं।