खतरे में दिग्गजों की कुर्सी! 2027 के ये 7 चुनाव तय करेंगे कौन बनेगा अगला प्रधानमंत्री, देखें पूरा गुणा-गणित

खतरे में दिग्गजों की कुर्सी! 2027 के ये 7 चुनाव तय करेंगे कौन बनेगा अगला प्रधानमंत्री, देखें पूरा गुणा-गणित

साल 2027 भारत की राजनीति के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित होने वाला है। इस साल उत्तर प्रदेश से लेकर मणिपुर तक सात बड़े राज्यों में नई सरकारें चुनी जाएंगी। ये चुनाव सिर्फ राज्यों की सत्ता तक सीमित नहीं हैं बल्कि इनका सीधा असर 2028 की राजनीतिक दिशा और 2029 के लोकसभा चुनाव पर पड़ेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लाल किले से अपने संबोधन में स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले समय में युवाओं और महिलाओं पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करके विकास का एक नया चुनावी मॉडल तैयार किया जा रहा है।

इस महासमर के लिए राजनीतिक दलों ने अपनी कमर कस ली है। भारतीय जनता पार्टी इन राज्यों में कुछ नए और चौंकाने वाले प्रयोग करने की तैयारी में है। ऐसा माना जा रहा है कि भाजपा नेता नितिन नवीन की टीम में चुनावी राज्यों के स्थानीय चेहरों को बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। आइए समझते हैं इन सात राज्यों का वर्तमान गणित और भविष्य की चुनौतियां।

यूपी में जीत की हैट्रिक या नया उलटफेर?

देश की राजनीति का रास्ता हमेशा यूपी से होकर जाता है। यहाँ कुल 403 विधानसभा सीटों पर सबसे बड़ा मुकाबला होना है। पिछले दस सालों से सत्ता पर काबिज भाजपा लगातार तीसरी बार जीत का परचम लहराना चाहती है। वर्तमान विधानसभा में भाजपा के पास 257 विधायक हैं जबकि मुख्य विपक्षी पार्टी सपा 111 विधायकों के साथ मजबूत टक्कर दे रही है। इसके अलावा राष्ट्रीय लोकदल के पास 9 विधायक हैं और सुभासपा के 6 विधायक हैं। बहुजन समाज पार्टी का सिर्फ एक विधायक है। अखिलेश यादव इस बार पीडीए फॉर्मूले के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं तथा चंदा चोरी जैसे मुद्दों पर सत्ता पक्ष को घेर रहे हैं। भाजपा विकास के बूते मैदान में है जबकि क्षेत्रीय पार्टियां अपने नए सामाजिक समीकरण बना रही हैं।

पंजाब में आम आदमी पार्टी की बड़ी परीक्षा

पंजाब में भगवंत मान की सरकार एक बार फिर अपनी कल्याणकारी योजनाओं के भरोसे मैदान में होगी। महिलाओं को हर महीने मिलने वाली आर्थिक मदद तथा मुफ्त इलाज और रोजगार के वादों के दम पर पार्टी सभी 117 सीटों पर अकेले किस्मत आजमाने जा रही है। पिछले चुनाव में 92 सीटें जीतकर आप ने सबको चौंका दिया था। उस वक्त कांग्रेस को 18 सीटें मिली थीं। शिरोमणि अकाली दल ने 3 सीटें जीती थीं जबकि भाजपा को 2 सीटें मिली थीं। बसपा और एक निर्दलीय के खाते में एक-एक सीट गई थी। कांग्रेस इस बार वापसी के लिए पूरा जोर लगा रही है जबकि भाजपा और अकाली दल के बीच गठबंधन की सुगबुगाहट तेज है।

गुजरात का अभेद्य किला

गुजरात हमेशा से भाजपा का सबसे मजबूत गढ़ रहा है जहाँ वे 32 साल से राज कर रहे हैं। पिछले चुनाव में 182 में से 156 सीटें जीतकर सत्ताधारी दल ने एक नया रिकॉर्ड बनाया था। कांग्रेस 17 सीटों पर सिमट गई थी जबकि आम आदमी पार्टी ने 5 सीटें हासिल की थीं और 4 सीटें अन्य के पास गई थीं। भाजपा यहाँ सत्ता विरोधी लहर से बिल्कुल बेफिक्र नजर आ रही है। वहीं आम आदमी पार्टी को उम्मीद है कि वह यहाँ पंजाब जैसे चौंकाने वाले नतीजे ला सकती है।

उत्तराखंड और गोवा में कांटे की टक्कर

उत्तराखंड की 70 सीटों पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी विकास कार्यों के नाम पर जनता के बीच जाएंगे। पिछली बार भाजपा ने यहाँ 47 सीटें जीती थीं। कांग्रेस 19 सीटों पर रुक गई थी और अन्य को 4 सीटें मिली थीं। कांग्रेस को इस बार सत्ता विरोधी लहर से काफी उम्मीदें हैं। दूसरी तरफ 40 सीटों वाले गोवा में भाजपा लगातार चौथी बार सरकार बनाने का सपना देख रही है। पिछली बार 20 सीटें जीतकर वे पूर्ण बहुमत से महज एक कदम दूर रह गए थे। कांग्रेस को 11 सीटें मिली थीं। आम आदमी पार्टी और एमजीपी ने दो-दो सीटें जीती थीं। जीएफपी और आरजीपी को एक-एक सीट मिली थी तथा तीन निर्दलीय जीते थे। इस बार भाजपा ने 30 सीटों का बड़ा लक्ष्य रखा है जबकि क्षेत्रीय दल मुकाबले को बेहद कड़ा बना सकते हैं।

हिमाचल की राजनीतिक रस्साकशी

पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में कुल 68 विधानसभा सीटें हैं। यहाँ मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के सामने अपनी सत्ता बचाने की बड़ी चुनौती होगी। पिछले 2022 के चुनाव में 40 सीटें जीतकर कांग्रेस ने भाजपा को 25 सीटों पर रोक दिया था। राज्य सरकार का आरोप है कि केंद्र सरकार आपदा राहत में उनके साथ भेदभाव कर रही है। भाजपा इस आरोप को सिरे से नकारते हुए सत्ता में वापसी के लिए बेहद आक्रामक रणनीति पर काम कर रही है।

मणिपुर में शांति और स्थायित्व की तलाश

मैतेई और कुकी समुदायों के बीच चल रहे विवाद का दंश झेल रहे मणिपुर के लिए यह चुनाव बेहद संवेदनशील है। राज्य की 60 सीटों पर मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद की साख दांव पर होगी। यहाँ 13 फरवरी 2025 से 4 फरवरी 2026 तक राष्ट्रपति शासन लागू रहा था। इसे देखते हुए अगस्त 2026 में कांग्रेस पार्टी ने अपने ब्लॉक स्तर के संगठन को पूरी तरह से बदल दिया है। फिलहाल यहाँ की राजनीतिक स्थिति काफी जटिल है और किसी भी पार्टी ने जीत का कोई बहुत बड़ा दावा नहीं किया है।