तेजस की गर्जना, एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह का 'लीडिंग फ्रॉम द फ्रंट' अंदाज
भारतीय वायुसेना (IAF) के इतिहास में एक ऐसा स्वर्णिम और गौरवान्वित करने वाला अध्याय जुड़ गया है, जिसने देश के हर नागरिक और सैन्य बल का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। भारतीय वायुसेनाध्यक्ष एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह (Air Chief Marshal A.P. Singh) ने अपनी अंतिम आधिकारिक उड़ान में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। उन्होंने किसी विदेशी फाइटर जेट में उड़ान भरने के बजाय भारत के अपने स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान 'तेजस' (LCA Tejas) के कॉकपिट को चुना और नीले आसमान के सीने पर अपनी मारक क्षमता का परचम लहराया।
सैन्य परंपराओं में 'लीडिंग फ्रॉम द फ्रंट' (Leading from the Front) यानी आगे रहकर नेतृत्व करने के सिद्धांत का इससे बेहतर उदाहरण शायद ही कोई दूसरा हो सकता है। अपनी सेवानिवृत्ति और सेवा की अंतिम प्रक्रिया के दौरान वायुसेना प्रमुख ने जिस प्रकार से गगनचुंबी ऊंचाइयों पर तेजस को उड़ाकर उसकी युद्धक क्षमता और पैंतरेबाजी का मुआयना किया, उसने दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों को यह साफ संदेश दे दिया है कि भारत की भावी वायु शक्ति का भविष्य अब पूरी तरह स्वदेशी हाथों में सुरक्षित है।
अंतिम उड़ान में स्वदेशी तकनीक पर दिखाया अटूट भरोसा, देश के रक्षा उद्योग को मिला बड़ा बूस्ट
वायुसेना प्रमुख की इस अंतिम उड़ान का केवल एक औपचारिक महत्व नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरा और दूरगामी रणनीतिक संदेश छिपा हुआ है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) द्वारा निर्मित स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस को लेकर जो भरोसा वायुसेनाध्यक्ष ने जताया है, वह भारत सरकार के 'आत्मनिर्भर भारत' और रक्षा निर्माण में स्वावलंबन के संकल्प को अभूतपूर्व ताकत प्रदान करता है।
कॉकपिट में बैठकर गगनचुंबी ऊंचाइयों पर विभिन्न प्रकार की जटिल उड़ान कसरतों को अंजाम देने के बाद एयर चीफ मार्शल ने तेजस के अत्याधुनिक एवियोनिक्स, रडार सिस्टम, उड़ान नियंत्रण प्रणालियों (Fly-by-wire system) और युद्धाभ्यास में उसकी तेजी की खुलकर तारीफ की। जब वायुसेना का सर्वोच्च कमांडर स्वयं देश में बने लड़ाकू विमान पर इस तरह का अटूट विश्वास व्यक्त करता है, तो उससे न केवल वायुसेना के युवा फाइटर पायलटों का मनोबल आसमान छूने लगता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारतीय सैन्य निर्माण की साख कई गुना बढ़ जाती है।
3D एयरोबेटिक्स और फाइटर कॉकपिट से दिया कड़ा संदेश, क्यों खास है यह 'तेजस' उड़ान
एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह खुद एक बेहद अनुभवी फाइटर पायलट और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट रहे हैं, जिन्होंने अपने करियर में लड़ाकू विमानों की दर्जनों अलग-अलग श्रेणियों को सफलतापूर्वक उड़ाया है। अपनी अंतिम उड़ान में उन्होंने तेजस के एडवांस एमके-1 संस्करण में सवार होकर अपनी क्षमता का लोहा मनवाया।
उड़ान के दौरान उन्होंने उच्च-जी (High-G) मोड़ों, तेज कलाबाजियों और विभिन्न लड़ाकू फॉर्मेशन का प्रदर्शन किया। वायुसेना प्रमुख का यह साहसिक कदम उन सभी आलोचकों को मुंहतोड़ जवाब है जो स्वदेशी तकनीकों पर संदेह जताते रहे हैं। तेजस केवल एक विमान नहीं है, बल्कि यह भारतीय वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और रक्षा विशेषज्ञों के दशकों के अथक परिश्रम का प्रतीक है। लड़ाकू विमान से उतरने के बाद वायुसेना प्रमुख का चेहरा और उनके शब्द इस बात के गवाह थे कि भारतीय वायुसेना अब हर मायने में आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाइयों को छू रही है।
सेवानिवृत्ति के ऐतिहासिक पल और भारतीय वायुसेना के उज्ज्वल भविष्य की नई राह
अपनी अंतिम उड़ान पूरी करने के बाद जब एयर चीफ मार्शल का तेजस विमान रनवे पर उतरा, तो उन्हें वहां मौजूद वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों, फाइटर पायलटों और ग्राउंड क्रू द्वारा पारंपरिक वॉटर कैनन सैल्यूट और भव्य सलामी दी गई। इस भावुक और ऐतिहासिक पल ने वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर दीं, लेकिन साथ ही एक नई ऊर्जा का संचार भी किया।
भारतीय वायुसेना वर्तमान में अपने बेड़े के आधुनिकीकरण के दौर से गुजर रही है, जहां पुराने मिग-21 जैसे विमानों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर उनकी जगह तेजस एमके-1ए और भविष्य के तेजस एमके-2 जैसे उन्नत स्वदेशी लड़ाकू विमानों को शामिल किया जा रहा है। ऐसे महत्वपूर्ण समय में वायुसेना प्रमुख की यह यादगार अंतिम उड़ान आने वाली पीढ़ियों के फाइटर पायलटों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी और 'आत्मनिर्भर भारत' के सपने को पंख देती रहेगी।